क्या सच में कोरोना वायरस से लड़ने में मदद कर रहा है इम्यून सिस्टम?

व्यक्ति के वायरस के चपेट में आने से शरीर में मौजूद एंटीबॉडी (Antibody) तेजी से घट रहे हैं.
व्यक्ति के वायरस के चपेट में आने से शरीर में मौजूद एंटीबॉडी (Antibody) तेजी से घट रहे हैं.

मनुष्य में जन्मजात रूप से प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) विकसित होता है. यह शरीर में रोगजनकों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 10:58 AM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ जंग लड़ने में मनुष्य के प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity System) को शुरुआत से ही प्रभावी बताया जा रहा है. अब एक नया अध्ययन सामने आया है जिसमें यह बताया गया है कि व्यक्ति के वायरस के चपेट में आने से शरीर में मौजूद एंटीबॉडी (Antibody) तेजी से घट रहे हैं. इंपीरियल कॉलेज लंदन (Imperial College London) के शोधकर्ताओं के मुताबिक, शरीर में मौजूद पर्याप्त एंटीबॉडी वाले लोगों की संख्या जून और सितंबर के बीच 26 प्रतिशत कम हो गई है.
इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ता और प्रोफेसर हेलेन वार्ड ने कहा- रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) काफी तेजी से घट रही है, हमे पहले राउंड में अभी तीन महीने हुए हैं और हम पहले ही एंटीबॉडीज में 26 फीसदी की कमी के बारे में बता चुके हैं.

बता दें कि मनुष्य में जन्मजात रूप से प्रतिरक्षा तंत्र विकसित होता है. यह शरीर में रोगजनकों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करता है. यह वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी उत्पन्न करने के लिए शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करता है, लेकिन कभी-कभी, प्रतिरक्षा प्रणाली जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया कर जाती है जो संक्रमण से लड़ने वाले व्यक्ति को खतरे में डाल देती है.

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साइटोकिन्स शरीर के लिए हानिकारक


सूजन पैदा करने वाले प्रोटीन्स जिन्हें 'किमोकिन्स' कहा जाता है जो शरीर में संक्रमण होने वाली जगह के लिए प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सचेत करते हैं. इस बीच, कुछ 'साइटोकिन्स' रक्त वाहिकाओं से संक्रमित ऊतक तक न्यूट्रोफिल, एक प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका का मार्गदर्शन करते हैं. साइटोकिन्स दिल की धड़कनों और शरीर के तापमान को बढ़ाने का कारण बनते हैं और शरीर में रोगजनकों की शक्ति खत्म कर रक्त के थक्के बनाते हैं.

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'साइटोकिन स्टोर्म' की समस्या
जब शरीर साइटोकिन्स के उत्पादन को नियंत्रित करने में असमर्थ होता है तो यह 'साइटोकिन स्टोर्म' नामक स्थिति को जन्म देता है. साइटोकिन्स का अधिक उत्पादन कुछ मामलों में अंग की विफलता का कारण बन सकता है. बता दें कि 'साइटोकिन स्टोर्म' कोविड-19 संक्रमितों के लिए विनाशकारी परिणाम है. दरअसल कोरोना वायरस व्यक्ति के शरीर में आंख, मुंह और नाक से प्रवेश करता है. सांस लेने की प्रक्रिया में भी वायरस का संचरण शरीर में होता है. आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कोरोना के मामले चार करोड़ से अधिक हो चुके हैं. वहीं, दुनियाभर में 12 लाख लोगों ने इस जानलेवा वायरस से दम तोड़ दिया है. भारत में कोरोना वायरस से 80 लाख लोग संक्रमित हैं तो वहीं एक लाख से ज्यादा लोगों की इससे मौत हो चुकी है.
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