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30 से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए हेल्थ से जुड़े ये 5 टेस्ट कराना हैं जरूरी!

30 से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए हेल्थ से जुड़े ये 5 टेस्ट कराना हैं जरूरी!

एक्सपर्ट के मुताबिक, हर महिला को 30 साल की उम्र में पांच महत्वपूर्ण टेस्ट करवाना चाहिए. (प्रतीकात्मक फोटो- pixels.com)

एक्सपर्ट के मुताबिक, हर महिला को 30 साल की उम्र में पांच महत्वपूर्ण टेस्ट करवाना चाहिए. (प्रतीकात्मक फोटो- pixels.com)

Essential Diagnostic Tests for Women : महिलाओं के जीवन का तीसरा दशक एक महत्वपूर्ण टाइम होता है. काम के तनाव और अन्य अनगिनत जिम्मेदारियों से जुगलबंदी करना स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.

  • News18Hindi
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    Essential Diagnostic Tests for Women : मानव शरीर जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक अनेक परिवर्तनों से गुजरता है. जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारा मैटाबॉलिज्म (Metabolism) और अन्य प्रक्रियाएं धीमी हो जाती हैं, जिससे डायबिटीज (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) जैसी हेल्थ कंडीशंस का सामना करना पड़ता है. ऐसे में हेल्थ चेकअप करवाना बेहद जरूरी हो जाता है. अपनी वर्क लाइफ को बैलेंस करने के लिए महिलाओं के जीवन का तीसरा दशक एक महत्वपूर्ण टाइम होता है. काम के तनाव और अन्य अनगिनत जिम्मेदारियों से जुगलबंदी करना स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.

    इंडियन एक्स्प्रेस डॉटकॉम की रिपोर्ट में प्रोएक्टिव फॉर हर (Proactive For Her) की क्लीनिकल डायरेक्टर डॉ गीता औरंगाबादकर (Dr Geeta Aurangabadkar) ने कहा कि लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों को रोकने और उन्हें जड़ से खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है कि सालाना चेकअप कराएं. डॉ औरंगाबादकर का कहना है कि हर महिला को 30 साल की उम्र में पांच महत्वपूर्ण टेस्ट करवाना चाहिए.

    कम्प्लीट ब्लड काउंट (Complete blood count)
    कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) एक ब्लड टेस्ट है जिसका यूज आपकी पूरी हेल्थ का मूल्यांकन करने और एनीमिया, इनफेक्शन और दुर्लभ मामलों, यहां तक ​​कि ब्लड कैंसर जैसी डिजीज की एक विस्तृत श्रृंखला का पता लगाने के लिए किया जाता है. एक कम्प्लीट ब्लड काउंट टेस्ट आपके ब्ल्ड के कई घटकों को मापता है, जिसमें रेड ब्लड सेल्स (R.B.C s),व्हाइट ब्लड सेल्स (W.B.C s), हीमोग्लोबिन, हेमटोक्रिट (Hct) और प्लेटलेट्स शामिल हैं.

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    डॉ औरंगाबादकर के अनुसार, “एक अनुमान के मुताबिक प्रजनन आयु की गैर-गर्भवती महिलाओं में से 52 प्रतिशत एनीमिक हैं. आपके 30 की उम्र के करीब, इस परीक्षण का उपयोग आमतौर पर एनीमिया का पता लगाने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में किया जाता है. इससे सामान्य पोषक तत्वों की कमी के बारे में और सुराग मिल सकते हैं जो एनीमिया का कारण बन सकते हैं, जैसे कि आयरन या बी 12. सीबीसी आपकी पूरी हेल्थ और उपचार (यदि आप किसी से गुजर रहे हैं) की निगरानी के लिए भी किया जाता है. ”

    लिपिड प्रोफाइल (Lipid profile)
    लिपिड प्रोफाइल (Lipid profile) ब्लड में लिपिड नाम के विशिष्ट वसा अणुओं (specific fat molecules) के लेवल को मापता है. इसका एक पैनल टेस्ट कई प्रकार के कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) सहित कई पदार्थों को मापता है. यह परीक्षण हार्ट डिजीज के रिस्क और रक्त वाहिकाओं (blood vessels) के स्वास्थ्य की जांच करने में मदद करता है.

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    डॉ औरंगाबादकर के अनुसार, लिपिड प्रोफाइल की नॉलेज किसी को अपने खाने की आदतों, आहार, तनाव, व्यायाम और जीवन शैली को सकारात्मक दिशा में बदलने में मदद कर सकता है. उन्होंने आगे कहा कि आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि थायराइड डिजीज और पीसीओएस आमतौर पर प्रतिकूल लिपिड प्रोफाइल से जुड़े होते हैं,”

    थायराइड फंक्शन टेस्ट (TSH)
    भारत में लगभग 10 में से 1 महिला को थायराइड (thyroid) की समस्या है. चूंकि लक्षण आमतौर पर शुरू में धीमे होते हैं और अक्सर लंबे समय तक किसी का ध्यान नहीं जाता है, इसलिए थायराइड की समस्याओं के लिए खुद को जांचना महत्वपूर्ण है. डॉ औरंगाबादकर के अनुसार, “ज्यादातर रिपोर्ट किए गए लक्षण अनियमित पीरियड्स, ज्यादा वजन बढ़ना, बालों का झड़ना या बांझपन हैं,” इस सिंपल ब्लड टेस्ट से अंडर एक्टिव थायरॉयड ग्रंथि (हाइपोथायरायडिज्म) और एक ओवर एक्टिव थायरॉयड ग्रंथि (हाइपरथायरायडिज्म) के टेस्ट के नतीजे मिलना आवश्यक है.

    ब्ल्ड शुगर (Blood Sugar)
    डॉ औरंगाबादकर के अनुसार, 35-49 वर्ष की आयु की 10 में से एक से अधिक महिलाओं में डायबिटीज की शिकायत देखी जाती है. डायबिटीज के लक्षण लंबे समय तक बिना किसी की जानकारी के छिपे हो सकते हैं. डायबिटीज आपके ब्लड शुगर को असामान्य रूप से हाई लेवल तक बढ़ा सकता है क्योंकि आपका शरीर इंसुलिन का उत्पादन या उसका ठीक से उपयोग नहीं कर पा रहा है. उन्होंने कहा कि शरीर में एनर्जी के लिए ब्लड शुगर का यूज करने के लिए इंसुलिन बहुत जरूरी है.

    पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test)
    दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) से होने वाली लगभग एक-चौथाई मौत भारत में होती है. पैप स्मीयर गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए एक सरल जांच प्रक्रिया है और इससे शुरुआती चरण में ही समस्या का पता चल जाता है. इसका उपयोग गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं (Cells) में उन परिवर्तनों का पता लगाने के लिए भी किया जाता है जो बाद में कैंसर में बदल सकते हैं और उन पर और निगरानी रखने की आवश्यकता है.

    इस प्रक्रिया में आपकी स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynaecologist) या एक प्रशिक्षित नर्स द्वारा जांच शामिल है, जो आपके गर्भाशय ग्रीवा (cervix) से कोशिकाओं के कोमल स्क्रैपिंग द्वारा एक नमूना लेती है, जिसे बाद में असामान्य कोशिकाओं या किसी संक्रमण के लिए माइक्रोस्कोप के तहत जांच की जाती है. 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाएं हर 5 साल में इस टेस्ट को करवाने पर विचार कर सकती हैं, जो एक एचपीवी टेस्ट (ह्यूमन पेपिलोमावायरस) के साथ पैप स्मीयर को मिलाएगा.

    Tags: Health, Health News

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