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Death Anniversary Special : उर्दू के इन्कलाबी शायर जोश मलीहाबादी, जिनकी नज्मों ने रूह को छुआ

News18Hindi
Updated: February 22, 2020, 12:58 PM IST
Death Anniversary Special : उर्दू के इन्कलाबी शायर जोश मलीहाबादी, जिनकी नज्मों ने रूह को छुआ
भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के रोकने पर भी मलीहाबादी नहीं मानें और 1958 में पाकिस्तान चले गए.

महीलाबादी की कहानियां, बातों, गजलों और आत्मकथा को किसी भी तरह के शब्दों में नहीं पिरोया जा सकता. इसलिए आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपके लिए लेकर आए हैं उनके कुछ बेहतरीन शेर, जिन्हें पढ़कर आपकी रूह खुश हो जाएगी.

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  • Last Updated: February 22, 2020, 12:58 PM IST
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तुझको इन नींद की तरसी हुई आंखों की कसम
अपनी रातों को मेरी हिज्र में बरबाद न कर

उर्दू के मशहूर शायर मिर्जा गालिब के बाद कुछ चुनिंदा लोगों का नाम शायरी, नज्मों के जरिए रूह को छूने में आता है तो उस खास शख्स का नाम है जोश मलीहाबादी का. नवाबी नगरी लखनऊ में जन्मे मलीहाबादी की आज पुण्यतिथि है. भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के रोकने पर भी मलीहाबादी नहीं मानें और 1958 में पाकिस्तान चले गए. दिल से भारतीय मलीहाबादी के इस फैसले ने काफी लोगों को निराश किया.

पाकिस्तान जाने के बाद भी मलीहाबादी का भारत के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ. अपनी आत्मकथा 'यादों की बारात' में उन्होंने आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, रवींद्रनाथ ठाकुर से अपने खुशनुमा पहलूओं का जिक्र किया. महीलाबादी की कहानियां, बातों, गजलों और आत्मकथा को किसी भी तरह के शब्दों में नहीं पिरोया जा सकता. इसलिए आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपके लिए लेकर आए हैं उनके कुछ बेहतरीन शेर, जिन्हें पढ़कर आपकी रूह खुश हो जाएगी.



एक दिन कह लीजिए जो कुछ है दिल में आप के
एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है

तुझको इन नींद की तरसी हुई आंखों की कसम
अपनी रातों को मेरी हिज्र में बरबाद न कर

दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया

इस का रोना नहीं क्यूं तुम ने किया दिल बर्बाद
इस का ग़म है कि बहुत देर में बर्बाद किया

रहता नहीं है दहर में जब कोई आसरा
उस वक़्त आदमी पे गुज़रती है क्या न पूछ

दिल मिला है जिन्हें हमारा सा
तल्ख़ उन सब की ज़िंदगानी है

छाई हुई है इश्क़ की फिर दिल पे बे-ख़ुदी
फिर ज़िंदगी को होश में लाए हुए हैं हम

इंसान के लहू को पियो इज़्न-ए-आम है
अंगूर की शराब का पीना हराम है

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First published: February 22, 2020, 12:56 PM IST
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