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Kaifi Azmi Google Doodle: कैफी आजमी- वो शायर जो सिर्फ नज़्मों में नहीं ज़िंदगी में मिठास घोलता था

News18Hindi
Updated: January 15, 2020, 12:19 PM IST
Kaifi Azmi Google Doodle: कैफी आजमी- वो शायर जो सिर्फ नज़्मों में नहीं ज़िंदगी में मिठास घोलता था
कैफी आजमी की फाइल फोटो (साभारः ट्विटर)

कैफी आजमी (Kaifi Azmi) सिर्फ अपनी नज़्मों तक ही प्रगतिशील नहीं बल्कि अपनी ज़िंदगी में भी उतना ही प्रोग्रेसिव रहे. नज्मों के लिखने वाले शायर ने अमीरी-गरीबी के अंतर को मिटाने की बात की, पुरुषों और महिलाओं को सामान दर्जा देने की बात की.

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  • Last Updated: January 15, 2020, 12:19 PM IST
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इतना तो जिंदगी में किसी की खलल पड़े, हंसने से हो सुकूं ना रोने से कल पड़े,
जिस तरह से हंस रहा हूं मैं, पी-पी के अश्केगम, यूं दूसरा हंसे तो कलेजा निकल पड़े.

इतनी बड़ी दुनिया में किस शख्स को इस बात का यकीन होगा कि दिल को छू जाने वाली, कलेजे को चीर कर रखने वाली इस नज्म का लेखक कोई जाना माना नाम नहीं एक 11 साल का बच्चा था. किसी ने कल्पना तक नहीं की थी कि वो बच्चा जिसने अपनी पहली नज्म से लोगों के दिल और दिमाग पर उतर जाएगा, वो एक दिन हिंदुस्तान का ऐसा नाम बन जाएगा, जिसका लिखा हुआ लोगों को प्रेरणा देगा, किसी की मोहब्बत बन जाएगा, किसी को दोबारा दिल जोड़ने का दिलासा देगा. वो नाम है कैफी आजमी का.

कैफी आजमी सिर्फ अपनी नज़्मों तक ही प्रगतिशील नहीं बल्कि अपनी ज़िंदगी में भी उतना ही प्रोग्रेसिव रहे. नज्मों के लिखने वाले शायर ने अमीरी-गरीबी के अंतर को मिटाने की बात की, पुरुषों और महिलाओं को सामान दर्जा देने की बात की. जमीनदार घराने से आने वाले कैफी आजमी ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव को देखा. उनके पिता के पास कई बीघा खेती, जमींदारी थी. कैफी के बड़े भाई के जन्म लेने के बाद उनके पिता ने नौकरी करने का फैसला लिया. कैफी की पढ़ाई किसी अंग्रेजी स्कूल में नहीं बल्कि मदरसे में हुई.

भाइयों से अलग था स्कूल
कैफी के अन्य भाइयों को अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाया गया, लेकिन उन्हें दीनी शिक्षा यानि की धर्म से जुड़ी शिक्षा देने के लिए मदरसे में पढ़ाया गया. कैफी के माता-पिता को लगता था कि अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने से उनके सभी बच्चे फातिहा पढ़ना नहीं सीख पाएंगें. इस स्थिति में कोई तो घर में हो जिसे इन चीजों का ज्ञान भी हो. इसलिए उन्होंने कैफी की पढ़ाई मदरसे में पूरी करवाई.

इंसानियत को माना धर्मकैफी ने बेशक से दीनी शिक्षा प्राप्त की, परन्तु इंसानियत को ही अपना पहला धर्म माना. अपनी नज्मों से कैफी ने हमेशा ही इंसानियत को तवज्जों दी. कैफी आजमीं के 101वीं जयंती पर पढ़ते हैं उनकी कुछ खास नज्में जो लोगों के दिलों में हमेशा ही जिंदा है और संघर्षों के साथ जीना सिखाती है.

  • चूम लेने दे मुझे हाथ अपने
    जिन से तोड़ी हैं कई ज़ंजीरे
    तूने बदला है मशियत का मिज़ाज
    तूने लिखी हैं नई तक़दीरें
    इंक़लाबों के वतन



  • मुझ को देख़ो के मैं वही तो हूं
    कुछ मशीनें बनाई जब मैंने
    उन मशीनों के मालिकों ने मुझे
    बे-झिझक उनमें ऐसे झौंक दिया
    इनसे मैं कुछ नहीं हूं ईंधन हूं



  • मेरा बचपन भी साथ ले आया
    गांव से जब भी आ गया कोई

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First published: January 14, 2020, 5:14 PM IST
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