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गुड़गांव से गुजर रहे हैं तो 'कल्याण छोले-कुलचे' ठेले पर भीड़ देख चौंकिएगा मत...क्योंकि...!

कुल्चा कहीं शाकाहारी बनता है तो कहीं इसे मांसाहारी बनाया जाता है.

कुल्चा कहीं शाकाहारी बनता है तो कहीं इसे मांसाहारी बनाया जाता है.

गुड़गांव (Gurugram) में आपको एक ठेले पर बहुत भीड़ दिखेगी और अगर वो मटर-कुलचा (Chole Kulche) बेच रहा हो तो ध्यान से देखिएगा उसका नाम 'कल्याण छोले-कुलचे' वाला ही होगा.

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    (विवेक कुमार पांडेय)

    ऑफिस जाने की जल्दी हो या फिर लंच (Lunch) भूल गए हों … या हो सकता है कि शाम को घर जाते वक्त भूख लग जाए. जी, अगर आप दिल्ली-एनसीआर में हैं तो कोई चिंता की बात नहीं. सेहत के लिए बेहतर और सस्‍ता मटर-कुलचा आपके के लिए पेश है. वैसे तो दिल्ली-एनसीआर में हर जगह आपको मटर-कुलचे (Chole Kulche) के ठेले या खोंमचे मिल जाएंगे, लेकिन कुछ जगहें खास हो जाती हैं.

    गुड़गांव की गली में खास

    ऐसी ही एक विशेष जगह है गुड़गांव (Gurugram) में सरस्वती विहार मोड़ पर. एमजी रोड मेट्रो से निकल कर वाटिका बिल्डिंग के कोने में. यहां पर आपको एक ठेले पर बहुत भीड़ दिखेगी और अगर वो मटर-कुलचा (Chole Kulche) बेच रहा हो तो ध्यान से देखिएगा उसका नाम पक्का ‘कल्याण छोले-कुलचा’ वाला ही होगा. यहां सुबह नौ बजे से ही कतार दिखने लगती है. दोपहर 12 बजे के बाद तो आपको अपनी बारी के लिए थोड़ा इंतजार भी करना पड़ सकता है.

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    सादगी और सफाई है विशेष

    कल्याण छोले-कुलचे की प्रीपरेशन भी आप लाइव ही देख सकते हैं. गरम-गरम मटर के छोले निकलते हैं और उसमें छोटे कटे हुए टमाटर-प्याज के साथ अदरख की लड़ियां डाली जाती हैं. इसके साथ ही नींबू और कुछ साधारण से मसाले. इन्हीं को हिला-मिलाकर एक स्वादिष्ट रेसेपी तैयार हो जाती है. इसके बाद पतले-पतले तीन कुलचे वह बटर में लगाकर तवों पर सेंकता है. चटनी और बारीक कटी हुई प्याज के साथ आपको परोस दिया जाता है. और हां, छाछ पीना मत भूलिएगा.

    कुल्चा बड़ा नवाबी है

    वैसे तो कुलचा हम सभी फुटपाथों पर खड़े होकर की खाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं यह शाही किचन से निकला हुआ खाना है. मुगलों के समय नान का प्रचलन काफी था और निजामों ने इसका नरम रूप कुलचा बना डाला. कुल्चा नरम और हल्का होता है खाने में. हमारे देश में पंजाब से हैदराबाद तक कई तरह के अलग-अलग कुलचे मौजूद हैं. कहीं शाकाहारी बनता है तो कहीं पर इसे मांसाहारी बनाया जाता है. साथ ही अलग-अलग टेक्सचर भी होते हैं कुलचे के.

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    मटर की कहानी

    जो छोले कुलचा के साथ खाए जाते हैं उसका इतिहास बहुत पुराना है. बताया जाता है कि दुनिया के सबसे पुरानी फसलों में मटर का जिक्र आता है. साथ ही पुरानी से पुरानी सभ्याताओं में मटर के अवषेश मिले हैं. हरी-हरी छेमिया भी जाड़े के दिन में आपको मिलती हैं. इन्हीं मटर को सुखा कर उनसे छोले बनाए जाते हैं. पूरी दुनिया में आज की तारीख में मटर खाया जाता है. हरी मटर की हींग वाली घुघनी के क्या कहने. बिहार-उत्तर प्रदेश में यह खूब खाई जाती है. यह फाइबर-प्रोटीन से भरा हुआ होता है.

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