केदारनाथ के कपाट खुले, यहां नहीं टेका मत्था तो अधूरा है बाबा भोले का दर्शन!

मंदिर के अलावा इन जगहों पर नहीं किया दर्शन तो अधूरी रह जाएगी आपकी तीर्थयात्रा!

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द्वादश ज्योतिर्लिगों में से एक केदारनाथ के कपाट आज खुल गए हैं. यह मंदिर मंदिर 3593 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप कट जाते हैं और वो मोक्ष को प्राप्त होता है. मंदिर को काफी चमत्कारी माना जाता है. ऐसा ही एक चमत्कार हुआ था साल 2013 में. जब जल आपदा में तीर्थयात्रियों समेत सबकुछ सर्वनाश हो गया था उस समय मंदिर को बिलकुल भी क्षति नहीं पहुंची थी. मंदिर के चमत्कार का ही प्रभाव है कि हर साल कपाट खुलने के बाद बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों का जत्था भोलेनाथ के दर्शन के लिए रवाना होता है. अगर आप भी इस बार दर्शनार्थियों के जत्थे में शामिल हैं तो इन जगहों पर मत्था टेकना न भूलें क्योंकी इन जगहों पर दर्शन किए बिना आपकी केदारनाथ यात्रा अधूरी मानी जाएगी.

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केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे बने अमृत कुंड में वो पवित्र जल एकत्र होता है जिसे शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है. भक्त चरणामृत की तरह इस जल को ग्रहण करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस प्रसाद के सेवन से सभी प्रकार के चरम रोग ठीक हो जाते हैं.



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केदारनाथ मंदिर से महज 200 मीटर की दूरी पर है रेतस कुंड. इसकी ख़ास बात है कि कुंड के पास जाकर 'ॐ नमः शिवाय' और 'बम-बम भोले' के जयकारे लगाने पर कुंड में पानी के बुलबुले उठते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस जल को पीते हैं वो शिवलोक को प्राप्त होते हैं. हालांकि 2013 में आई जल आपदा के बाद ये कुंड विलुप्त हो गया था. हालांकि बाद में ये फिर मिल गया था.

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