मैराथन में हिस्सा लेने से पहले कर लें ये तैयारी, नहीं तो जा सकती है जान

मैराथन में हिस्सा लेने के लिए शरीर को 2-3 महीने पहले से एक्टिव रखना बहुत जरूरी होता है.

अक्सर देखा जाता है कि हाफ मैराथन, मैराथन का हिस्सा बनने के लिए लोग बस निकल पड़ते हैं, इसके लिए वो किसी भी तरह की तैयारी नहीं करते हैं. जबकि इस तरह के इवेंट में हिस्सा लेने के लिए तैयारी की बहुत ज्यादा जरूरत होती है

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    मुंबई मैराथन 2020 में शामिल हुए 64 वर्षीय शख्स की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. रविवार को 64 वर्षीय गजानन मल्जालकर मुंबई मैराथन 2020 में दौड़ लगा रहे थे, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मौत हो गई. मैराथन में शामिल होने वाले अन्य दो लोगों को भी दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में दोनों लोगों का इलाज चल रहा है.

    ये कोई पहला मौका नहीं है जब किसी मैराथन में हिस्सा लेने से दौड़ने वालों को दिल का दौरा पड़ा हो. इससे पहले बैंगलोर, दिल्ली में आयोजित कई रेस में इस तरह के हादसे देखने को मिले हैं. इन हादसों की वजह है बिना तैयारी के बस चल पड़ना.

    कई महीनों पहले से शुरू करें तैयारी
    अक्सर देखा जाता है कि हाफ मैराथन, मैराथन का हिस्सा बनने के लिए लोग बस निकल पड़ते हैं, इसके लिए वो किसी भी तरह की तैयारी नहीं करते हैं. जबकि इस तरह के इवेंट में हिस्सा लेने के लिए तैयारी की बहुत ज्यादा जरूरत होती है. लगातार 10-12 किलोमीटर दौड़ने के लिए कई महीनों की तैयारी की जाती है.

    मैराथन में हिस्सा लेने से पहले मेडिकल टेस्ट जरूर करवाएं.
    मैराथन में हिस्सा लेने से पहले मेडिकल टेस्ट जरूर करवाएं.


    मेडिकली फिट रहना है जरूरी
    शरीर को 2-3 महीने पहले से एक्टिव रखना बहुत जरूरी होता है. इस तरह के इवेंट में हिस्सा लेने के लिए पहले मेडिकली फिट हों. जिन लोगों को ब्लड प्रेशर, हार्ट संबंधित बीमारियां हैं वो, सबसे पहले अपना फ़िटनेस लेवल चेक करवाएं. इससे यह भी पता चलता है कि क्या आपका हार्ट मैराथन का स्ट्रेस झेलने में सक्षम है या नहीं. इस तरह के इवेंट में फिजिकल फिटनेस के साथ मेंटल फिटनेस भी जरूरी है.

     

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    दौड़ने के दौरान ही जूतों को बदलें.
    दौड़ने के दौरान ही जूतों को बदलें.


     

    जूतों का रखें खास ध्यान
    अपने तलवे के शेप के अनुसार फ़ुटवेयर पहनें, क्योंकि ऐसा देखा गया है कि ज़्यादातर धावक ग़लत रनिंग शूज़ पहनने के चलते चोटिल हो जाते हैं. हर 300 से 350 मील की दूरी तय करने के बाद अपने जूते बदलें, ऐसा इसलिए क्योंकि जूतों का कुशन कम हो जाता है, जिससे पैर चोटिल हो सकते हैं.

     

    धीरे-धीरे बढ़ाएं रफ्तार
    दौड़ की शुरुआत धीरे-धीरे करें, बॉडी में फ़्लूइड का बैलेंस बनाए रखें, एक हफ़्ते पहले से इलेक्ट्रॉल, जूस और पानी भरपूर लें, ताकि कभी भी बॉडी में फ़्लूइड की मात्रा कम न होने पाए. शरीर में पानी का लेवल बनाए रखने के लिए आप दिनभर पानी पीते रहते हैं, लेकिन दौड़ने से पहले थोड़ा ज़्यादा पानी पिएं. दौड़ने के दौरान और बाद में भी पानी पीते रहें. भरपूर पानी पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बना रहेगा. नारियल पानी, नींबू पानी या कोकम जूस नैचुरल स्पोर्ट्स ड्रिंक हैं. लंबी दूरी की दौड़ के दौरान इन्हें पीने से न केवल शरीर हाइड्रेटेड रहता है, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी बरक़रार रहता है.

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