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जॉब के साथ ऐसे रखें पार्टनर और बच्चे को खुश, घर के लिए बनेंगी परफेक्ट

News18Hindi
Updated: October 20, 2019, 1:40 PM IST
जॉब के साथ ऐसे रखें पार्टनर और बच्चे को खुश, घर के लिए बनेंगी परफेक्ट
कई बार बच्चे को समय देने या कपल टाइम को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगता है.

यह जरूर तय करें कि बच्चे के सामने आपस में कैसे व्यवहार करना है. बच्चे के सामने न तो पार्टनर से ऊंची आवाज में बात करें, न उसे टोकें या आलोचना करें.

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  • Last Updated: October 20, 2019, 1:40 PM IST
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अगर आप वर्किंग वुमेन हैं तो पार्टनर, पैरेंटिंग और जॉब के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाता है. आप चाहे किसी भी फील्ड में जॉब करें, कॉम्पिटिशन हर जगह होने लगा है. सारा दिन ऑफिस में काम करने के बाद पार्टनर और बच्चों के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताना किसी चैलेंज से कम नहीं होता. हर महिला चाहती है कि उसका पति सिर्फ उससे प्यार करें और उसके बच्चे हमेशा स्वस्थ और खुश रहें. हर पैरेंट्स की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे खुश रहें, तरक्की करें और उन्हें वह सब मिले, जिसकी उन्हें चाह हो. इसके लिए वह अपने बच्चे को बेहतर परवरिश देना चाहते हैं. कई बार पैरेंटिंग के तौर-तरीके को लेकर पार्टनर्स के बीच मतभेद होता है. मतभेद बढ़ता है तो रिश्ते में तनाव पैदा होता है. जानते हैं ऐसे ही कुछ पेरेंटिंग मुद्दों के बारे में, जिनसे कपल्स के रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं. कैसे करें इस समस्या को हल.

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टाइम को ऐसे करें मैनेज

जैसे ही किसी जीवन में बच्चा आता है, पूरा घर उसी के इर्द-गिर्द घूमने लगता है. बच्चा एक तरह से वैवाहिक जीवन को पूर्ण करता है, वह अनजाने में ही जीने का मकसद देता है और लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाता है. यहां तक सब कुछ सुंदर प्रतीत होता है लेकिन इसके लिए नए मेहमान को पैरेंट्स का भरपूर समय और ध्यान भी चाहिए. जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, अटेंशन सीकिंग होने लगता है और माता-पिता का ध्यान इसी पर केंद्रित हो जाता है कि कहीं वह गिर न जाए, खुद को चोट न पहुंचा ले. उसे कुछ हो न जाए. महानगरों में नौकरीपेशा एकल परिवारों के पास समय का अभाव है, इस वजह से कई बार बच्चे को समय देने या कपल टाइम को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगता है. कई बार विवाद इतना बढ़ जाता है कि रिश्ते में दरार पैदा हो जाती है. ऐसी स्थितियों में समझदारी की जरूरत होती है. टाइम मैनेजमेंट कुछ इस तरह करें कि बच्चे और पार्टनर दोनों को समय दे सकें. वीक डेज पर समय न हो तो वीकेंड पर खुद को फ्री करें. यह समय बच्चे और फैमिली के लिए होना चाहिए. महीने में एक-दो बार पार्टनर के साथ समय बिताएं. माता-पिता या रिश्तेदार के पास बच्चे को छोड़ें और कपल टाइम इन्जॉय करें.

अच्छी पैरेंटिंग के लिए करें ये काम

हर व्यक्ति के विचार, सोच या भावनाएं अलग होती हैं. ऐसे में पति-पत्नी भी एक जैसा नहीं सोच सकते. पैरेंटल स्टाइल भी अलग हो सकता है. कई पैरेंट्स अनुशासन पसंद करते हैं तो कुछ बच्चों के साथ दोस्ताना ढंग से पेश आते हैं. कुछ लोग सख्त-मिजाज होते हैं तो कुछ उदार मन के. कई बार हजबैंड को वाइफ का बच्चे के प्रति जयादा पॉजेसिव होना अखरता है तो पत्नी को पति के लाड़-प्यार से परेशानी होने लगती है. दोनों अपने विचारों, अनुभवों और ज्ञान के आधार पर पैरेंटिंग रूल्स बनाते हैं. बच्चे के भविष्य को देखते हुए संयुक्त रूप से पैरेंटल स्टाइल डेवलप करने की जरूरत होती है. इसलिए बच्चे के भविष्य से जुड़ी इच्छाओं-अपेक्षाओं के बारे में आपस में बात करें और पैरेंटिंग रूल्स सुनिश्चित करें. इसके अलावा जो आदतें या अनुशासन संबंधी नियम बच्चे के लिए निर्धारित कर रहे हैं, उनका स्वयं भी पालन करें.

एक-दूसरे को टोकना छोड़ दें
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कई बार एक पार्टनर को दूसरे की बात पसंद नहीं आती तो वह बच्चे के सामने ही अपने जीवनसाथी को टोकने या डांटने लगता है. इससे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जब उसे लगता है कि पैरेंट्स आपस में ही एक दूरे को डांट रहे हैं तो वह खुद भी लापरवाह हो जाता है. अगर पेरेंटिंग को लेकर पार्टनर के रवैये या विचार से असहमत हैं तो उसे बच्चे के सामने डांटने या टोकने से बेहतर है कि अकेले में बात करें. यह जरूर तय करें कि बच्चे के सामने आपस में कैसे व्यवहार करना है. बच्चे के सामने न तो पार्टनर से ऊंची आवाज में बात करें, न उसे टोकें या आलोचना करें.

जिम्मेदारियों का करें बंटवारा

भले ही आज स्त्रियां घर से बाहर निकल कर काम कर रही हैं, मगर घरेलू कार्य आज भी आमतौर पर उन्हीं की जिम्मेदारी समझी जाती है. ऑफिस और घर के बीच सामंजस्य बिठाना स्त्री के लिए मुश्किल हो जाता है, जिसका नतीजा होता है, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और कुंठा. ऐसी स्थितियों में आपसी रिश्ते प्रभावित होने लगते हैं. अत्यधिक थकान या दबाव में गुस्सा आना स्वाभाविक है. इसलिए घरेलू कार्यों में पति को हाथ बंटाना चाहिए. पत्नी किचन संभाल रही है तो पति कोई अन्य काम संभाल सकते हैं इससे बच्चों को भी घरेलू कार्यों का महत्व समझ आएगा और उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी.

एक दूसरे पर आरोप न लगाएं

कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता, उसके निर्णय हमेशा सही नहीं होते, भले ही वह करियर के संबंध में हो या परवरिश के लिए. अगर बच्चे के लिए लिया गया कोई फैसला सही न रहा हो तो पार्टनर को ताने मारने से अच्छा है कि आगे बढ़ें और सही फैसले लें. एक दूसरे पर आरोप लगाने से स्थिति बिगड़ती है. किसी को दोषी बनाने से पहले स्थितियों का आंकलन करें. किन स्थितियों में फैसला लिया गया और तब से स्थितियां कितनी बदलीं, ऐसे हर पहलू पर सोचें. अगर कोई फैसला गलत रहा हो तो इस बात पर विचार करें कि आगे उसे कैसे सही किया जा सकता है.

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प्राइवेसी जरूरी

भारतीय घरों में प्राइवेसी का कॉन्सेप्ट अभी उतना नहीं है. बच्चा आमतौर पर माता-पिता के साथ सोता है क्योंकि उसे दोनों के साथ की जरूरत होती है. छोटे बच्चे के साथ कई बार जागना पड़ता है. बड़ा होने पर भी वह पैरेंट्स के साथ सोना चाहता है, जिससे पति-पत्नी को एक-दूसरे के लिए समय नहीं मिल पाता. इससे समस्याएं हो सकती हैं. एक उम्र के बाद बच्चों को अलग सोने के लिए प्रेरित करें. शुरुआत में बच्चे का बेड अपने बेडरूम में ही लगाएं. सोते समय उनके साथ रहें. जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो उसके लिए अलग बैडरूम बनाएं.

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First published: October 20, 2019, 1:40 PM IST
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