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वायु प्रदूषण के कहर के बाद अब दिल्ली में किडनी और लिवर की बीमारियों से हो रही है मौत, रिसर्च में खुलासा

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Updated: November 26, 2019, 1:07 PM IST
वायु प्रदूषण के कहर के बाद अब दिल्ली में किडनी और लिवर की बीमारियों से हो रही है मौत, रिसर्च में खुलासा
इस समय दिल्ली में किडनी, सांस, दिल और लिवर की बीमारियों से सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही हैं.

डॉक्टरों का मानना है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की वजह से सांस संबंधी संक्रमण बढ़ा है जबकि बदलते लाइफस्टाइल के चलते लोग डार्ट संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 1:07 PM IST
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दिल्ली में पहले तो वायु प्रदूषण ने अपना कहर बरपाया और अब किडनी, सांस, दिल और लिवर की बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस समय दिल्ली में किडनी, सांस, दिल और लिवर की बीमारियों से सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही हैं. दरअसल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2017 में हुई मौतों पर पहली बार अध्ययन किया है.

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2017 में दिल्ली में करीब 81 हजार लोगों की हुई मौत 
अमर उजाला में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में लासेंट में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि वर्ष 2017 में दिल्ली में तकरीबन 81 हजार लोगों की मौत हुई हैं, जिसमें से 21.3 फीसदी संचारी और 57.6 फीसदी मौतें गैर संचारी रोगों की वजह से हुई हैं. वहीं सड़क दुर्घटनाओं सहित चोटिल होने से 7.9 प्रतिशत मौतें हुई हैं. इस समय में टीबी, डायरिया, श्वसन संक्रमण, दिल, किडनी फेलियर, लिवर या अल्कोहल का सेवन, क्रोनिक श्वसन रोग बीमारियां सबसे ज्यादा जानलेवा बनी हुई हैं.

वायु प्रदूषण की वजह से सांस संबंधी संक्रमण बढ़ा है
डॉक्टरों का मानना है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की वजह से सांस संबंधी संक्रमण बढ़ा है जबकि बदलते लाइफस्टाइल के चलते लोग डार्ट संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. अल्कोहल का अत्यधिक सेवन इन्हें पहले फैटी लिवर और बाद में लिवर सिरोसिस जैसे रोगों की चपेट में ले रहा है. आईसीएमआर के वैज्ञानिकों के अनुसार इस अध्ययन के पीछे विभिन्न रोगों की वर्तमान स्थिति, उनसे होने वाली मौतें और किस आयुवर्ग में किन बीमारियों का फैलाव ज्यादा है जैसी जानकारियां हासिल करना मुख्य उद्देश्य था ताकि सरकार इस स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आगे कार्य कर सके.

विशेषज्ञों की राय
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल का कहना है कि गैर संचारी रोगों से होने वाली मौतों को रोकना संभव है. इसके लिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है. वहीं डॉ. आर एन कालरा का कहना है कि युवाओं में फैल रहे हृदय रोग और डायबिटीज को रोकना बेहद जरूरी है.

सफदरजंग अस्पताल के किडनी विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा के अनुसार किडनी फेलियर की वजह से आज बहुत अधिक मौतें हो रही हैं जबकि लोग समय समय पर जांच कराकर इससे अपना बचाव कर सकते हैं. एम्स के श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. करण मदान का कहना है कि सांस संबंधी संक्रमण के अलावा क्रोनिक बीमारियों से बचाव बेहद जरूरी है.

14 वर्ष तक संक्रमण से मौत
अध्ययन के अनुसार दिल्ली में 0 से 14 वर्ष की आयु के बीच सबसे ज्यादा मौत संक्रमण की वजह से हो रही हैं. इसमें डायरिया, श्वसन संक्रमण, प्रसवकालीन और संतुलित आहार न मिलना शामिल है. 4 वर्ष तक की आयु की बात करें तो डायरिया और श्वसन संक्रमण की चपेट में आने से सर्वाधिक मौतें बच्चियों की हुई हैं.

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युवाओं को हार्ट की समस्या
वर्ष 2017 में हुई मौतों को अगर आयुवर्ग में देखें तो 15 से 49 वर्ष के दौरान सर्वाधिक मौतें हृदय रोग और लिवर व अल्कोहल के ज्यादा सेवन से जुड़ी हैं. जबकि 50 वर्ष से ऊपर के लोगों की मौत में हृदय रोग के अलावा टीबी व सांस संबंधी बीमारियां मुख्य कारण थीं.

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First published: November 26, 2019, 1:00 PM IST
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