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International Women’s Day 2021: राजनीति से लेकर घर तक, इन जगहों में है मातृसत्ता का बोलबाला

दुनिया की ऐसी जगहें जहां महिलाएं करती हैं राज.
Image: pexels-jessie-crettenden

दुनिया की ऐसी जगहें जहां महिलाएं करती हैं राज. Image: pexels-jessie-crettenden

Know About The Societies Where Women Rule: वीमेंस डे (Women’s Day) पर जानिए उन जगहों के बारे में जहां महिलाओं को पूरे अ ...अधिक पढ़ें

    Know About The Societies Where Women Rule: कहते हैं कि जैसे -जैसे विकास हुआ समाज में जागरूकता आने लगी तो बगैर जेंडर बायस के सबके लिए समान अधिकारों की वकालत हुई, लेकिन अगर इतिहास में पीछे लौटकर देखा जाए तो क्या ऐसा नहीं था कि आदिवासी और बगैर पढ़े-लिखे समाजों में महिलाएं हमेशा से अहम रहीं ? फिर चाहे वो पॉलिटिक्स हो या घर. वीमेंस डे (Women’s Day) की कवायद और जरूरत तो अपग्रेड सोसाइटी में शुरू हुई, अगर ऐसा नहीं था तो सदियों से महिलाओं की छांव तले और उनके कंट्रोल में मातृसत्तात्मक (Matriarchal) समाज संपन्न और फले-फूले न होते. आज भी ऐसे समाजों का अस्तिव यह बताने के लिए काफी है कि महिलाएं अहम थी, उन्हें शायद किसी साजिश के तहत धीरे-धीरे हाशिए की तरफ धकेला गया. आज वीमेंस डे (Women’s Day) पर हम आपको दुनिया भर के ऐसे ही समुदायों और समाजों के बारे में बताने जा रहे हैं,जहां महिलाएं व्यापक सामाजिक संरचना से लेकर राजनीति, अर्थशास्त्र सबकी कमान संभालती हैं.

    इतिहास है गवाह महिलाओं के सशक्त होने काः
    अगर आप सिर्फ एक ग्रीक महाकाव्य खोल कर देख लें तो आपको पता चल जाएगा कि की महिलाएं समाज में कितना अहम स्थान रखती थीं. इसके पेज देवियों और महिला योद्धाओं की गाथा से भरे पड़े हैं,जहां उन्हें पूजने के स्तर तक आदर दिया गया है. लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतता गया दुनिया भर के समाजों में पितृसत्तात्मक (Patriarchal ) संरचना की तरफ झुकाव शुरू हो गया. जो आधुनिक वक्त में अधिकतर समुदायों में बड़े स्तर पर है. हालांकि, अभी भी मातृसत्तात्मक समाज अस्तिव में हैं. जहां महिलाएं सभी मामलों, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावी स्थिति में हैं और आज भी पाश्चात्य-पितृसत्तात्मक से खुद को अलग रखे हुए हैं.

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    मोसुः  

    मोसु (Mosuo) महिलाएं चीन की आखिरी जीवित मातृसत्ता हैं. दि इंडिपेंडेंट के मुताबिक ये लगभग 40,000 हैं जो तिब्बती बौद्ध धर्म को मानती हैं. इस समाज में वंश का पता परिवार की महिलाओं के जरिए ही लगाया जाता है और संपत्ति महिला उत्तराधिकारी को ही सौंपी जाती है. ये महिलाएं शादी भी नहीं करती मतलब ये अपना एक साथी चुन सकती हैं, लेकिन उसके साथ रहना इनकी बाध्यता नहीं होती. इस समाज में मां बच्चों को पालने में प्राथमिक भूमिका निभाती है.

    बरिबरिः  

    बरिबरि (BriBri) मध्य अमेरिका के कैरेबियाई इलाके के देश कोस्टा रिका(Costa Rica) की एक स्वदेशी जनजाति है. इनकी अनुमानित संख्या 12 हजार से लेकर 35 हजार तक मानी जाती है. इस सोसाइटी में मां को ही बच्चों के नाम जमीन देने का अधिकार है. यहां महिलाएं पूजनीय हैं. इस तरह से वे अकेली ऐसी शख़्स हैं जिन्हें धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पवित्र कोको पेय तैयार करने का हक है.

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    उमोजाः  

    केन्या का उमोजा (Umoja) गांव सही मायनों में नो मैंस लैंड है, यह उमोजा जनजाति की ऐसी महिलाओं का गांव है जहां पूरी तरह से पुरुषों पर प्रतिबंध है. यह गांव उन महिलाओं और लड़कियों के लिए एक घर है, जिन्होंने यौन या जेंडर बेस्ड हिंसा का अनुभव किया है. उमोजा का मतलब स्वाहिली भाषा में "एकता" होता है. यह गांव 1990 में बसाया गया. यहां महिलाएं और बच्चे अपने जीवन यापन के लिए पेशे के तौर टूरिस्ट को अपने गांव की सैर कराने का काम करती हैं. इसके साथ ही यह दूसरी महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने का काम भी करते हैं.

    मिनांगकाबाउः  

    इंडोनेशिया के मिनांगकाबाउ (Minangkabau ) समुदाय 2017 तक लगभग 40 लाख लोगों को शामिल करने वाले सबसे बड़े जीवित मातृसत्तात्मक समाज का हिस्सा हैं. इस संस्कृति में आम धारणा यह है कि समाज में मां सबसे अहम इंसान है. महिलाएं जिंदगी के घरेलू दायरे पर राज करती हैं और मिनंगकाबाउ समाज में विवाह होता है, लेकिन तभी जब महिलाओं के पार्टनर्स के पास अलग-अलग स्लीपिंग क्वार्टर हों.

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    अकानः  

    मेंटल फ्लॉस के मुताबिक घाना के अकान (Akan) लोगों का सामाजिक संगठन मैट्रिक्लैन (Matriclan) पर बेस है, मतलब यहां मातृत्व के बंधनों या माताओं को वरीयता मिलती है. यहां पहचान, विरासत, धन और राजनीति सभी महिलाओं के आधार पर ही तय किए जाते हैं. जैसा कि नाम से पता चलता है, मैट्रिक्लैन की संस्थापक महिला है, लेकिन इस क्लैन में पुरुष भी लीडरशिप वाले पदों पर होते हैं.

    खासीः  

    भारत में साल 2011 मातृसत्तात्मक समाज खासी (Khasi) के सदस्यों की संख्या लगभग एक लाख थी. इस समाज में बच्चों की देखभाल केवल मांएं और सास ही कर सकती हैं. गार्जियन के मुताबिक यहां पारिवारिक समारोहों में शामिल होने का भी पुरुषों को हक नहीं हैं. सबसे बड़ी बात जब खासी जनजाति की महिलाओं की शादी होती हैं, तो उनके पति की जगह उनका सरनेम ही बच्चों में चलता है.

    Tags: International Women's Day, Lifestyle, Woman

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