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हल्के से झटके से भी टूट सकती है हड्डी, कहीं आपको ओस्टियोपोरोसिस तो नहीं ?

हल्के से झटके से भी टूट सकती है हड्डी, कहीं आपको ओस्टियोपोरोसिस तो नहीं ?

ओस्टियोपोरोसिस बीमारी के बारे में जानें (credit: pexels/Alex Green)

ओस्टियोपोरोसिस बीमारी के बारे में जानें (credit: pexels/Alex Green)

Everything About Osteoporosis: ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां पतली और कमज़ोर हो सकती हैं जो केवल खांसी और छींक आने या ज़रा से झटके लगने पर भी टूट सकती हैं. इस फ्रैक्चर को ठीक होने में कितना समय लगेगा ये आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और इस बात पर निर्भर करेगा...

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    Everything About Osteoporosis: अगर आपकी हड्डियां हल्के -फुल्के झटकों से और आसानी से टूट जाती हैं तो कहीं आपको ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) तो नहीं है ? ओस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो हड्डियों को कमज़ोर करती है. एक स्वस्थ हड्डी के अंदर छत्ते की तरह छोटे-छोटे छेद होते हैं. यह बीमारी इन छेदों के आकार को बड़ा करती है. यानि हड्डी का घनत्व काम होता जाता है.जिससे हड्डियां पतली और कमजोर हो जाती हैं और इनके टूटने का खतरा काफी बढ़ जाता है. ये बीमारी वैसे तो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है. लेकिन बुजुर्गों और महिलाओं में इसके होने की सम्भावना कई गुना ज्यादा होती है.

    Healthline में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, United States में लगभग 53 मिलियन लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं और इनमें से बहुत ऐसे लोग भी हैं, जिनको ये बीमारी होने का खतरा बहुत ज्यादा है. ओस्टियोपोरोसिस में दैनिक क्रियाओं को करने के दौरान जिन हड्डियों के टूटने का खतरा सबसे ज्यादा होता है उनमें पसलियां, कूल्हे, कलाई और रीढ़ की हड्डियां शामिल हैं.

    ओस्टियोपोरोसिस के लक्षण (Osteoporosis Symptoms):
    इस बीमारी के शुरूआती दौर में किसी भी तरह के लक्षण देखने को नहीं मिलते हैं. इससे अप्रत्याशित फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन अगर आपके मसूड़ों में दिक्कत हो रही है, पकड़ कमज़ोर हो रही है, नाखून टूट रहे हैं या आपके परिवार में पहले किसी को ऑस्टियोपोरोसिस हो चुका है, तो आपको डॉक्टर से ज़रूर सम्पर्क करना चाहिए.अगर समय पर ओस्टियोपोरोसिस का इलाज न किया गया तो ये गंभीर हो सकता है. हड्डियां पतली और कमज़ोर हो सकती हैं जो केवल खांसी और छींक आने या ज़रा से झटके लगने पर भी टूट सकती हैं. इस फ्रैक्चर को ठीक होने में कितना समय लगेगा ये आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और इस बात पर निर्भर करेगा कि फ्रैक्चर कहां है और कितना गंभीर है.

    बढ़ती उम्र, मीनोपॉज़ और कई और भी हैं रिस्क फैक्टर
    ऑस्टियोपोरोसिस के रिस्क फैक्टर कई हैं जिनमें से बढ़ती उम्र और मीनोपॉस सबसे बढ़ा रिस्क फैक्टर है. 30 के बाद जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है हड्डियों का घनत्व कम होता जाता है और हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं, जिसके टूटने की संभावना ज्यादा होती है. वहीं 45 से 55 वर्ष की आयु के आसपास की महिलाओं में मीनोपॉज़ की शुरुआत जब होती है तो हार्मोन्स में बदलाव होता है. इसकी वजह से फ्रैक्चर होने की सम्भावना ज्यादा हो जाती है. ऐसा नहीं है कि पुरुषों में फ्रैक्चर नहीं होता है. लेकिन जब पुरुष 65 से 70 की उम्र तक पहुंचते हैं, तब उनको फ्रैक्चर होने की सम्भावना ज्यादा होती है.ऑस्टियोपोरोसिस के कई और रिस्क फैक्टर में खराब पोषण, धूम्रपान करना, शरीर का वजन कम होना, ऑस्टियोपोरोसिस का पारिवारिक इतिहास होना, महिला होना, फिज़िकल एक्टिविटी कम होना शामिल है.

    इन पर करें अमल
    ऑस्टियोपोरोसिस का वैसे तो कोई इलाज नहीं है. लेकिन कुछ चीज़ों के ज़रिये ये कोशिश की जा सकती है की हड्डियों को टूटने से बचाया जा सके. अपनी हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए, आपको अपने दैनिक आहार में कुछ पोषक तत्वों को शामिल करना होगा. इनमे सबसे जरूरी है कैल्शियम और विटामिन डी. इसके साथ ही अपने खाने में प्रोटीन, मैग्नीशियम, विटामिन ‘के’ और जस्ता शामिल करें. वजन बढ़ाने वाले व्यायाम करें. धूम्रपान न करें. डॉक्टर्स से सलाह लेते रहें.

    Tags: Health, Health News, Lifestyle

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