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'Always On' ऑफिस में कैसे बनाएं एक पॉजिटिव डिजिटल कल्चर, जानिए

बहुत जरूरी है ऑफिस में फोन-फ्री ब्रेक्स को बढ़ावा दिया जाए. (प्रतीकात्मक फोटो-canva.com)

बहुत जरूरी है ऑफिस में फोन-फ्री ब्रेक्स को बढ़ावा दिया जाए. (प्रतीकात्मक फोटो-canva.com)

एम्प्लॉयर यानी नियोक्ता अपने एम्प्लॉई से हमेशा पहुंच में रहने और जवाबदेह रहने की उम्मीद रखता है. लेकिन कई अध्ययन बताते हैं कि लगातार कनेक्टिविटी बने रहने से प्रोडक्टिविटी घट जाती है. स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति दिन में 150 बार फोन देखता है. केवल एक मैसेज की वजह से उसके रोज के कामों में गलती की गुंजाइश बढ़ जाती है और दोबारा फ्लो में लौटने में लगभग 11 मिनट लग जाते हैं.

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आज के कॉम्पिटिव वर्ल्ड में इंसान 24 घंटे खुद को फोन पर, व्हाट्सऐप पर, लैपटॉप के जरिए किसी बिजनेस ग्रुप पर, किसी ऑनलाइन कॉन्क्लेव में या अपने बिजनेस से जुड़े मामलों में ही फंसा रहता है. आज अगर हम ये कहें कि हमारे काम करने का तरीका बदल गया है. आज लोग ऑलवेज़-ऑन कल्चर (Always On Culture) अपना रहे हैं. एम्प्लॉयर यानी नियोक्ता अपने एम्प्लॉई से हमेशा पहुंच में रहने और जवाबदेह रहने की उम्मीद रखता है. लेकिन कई अध्ययन बताते हैं कि लगातार कनेक्टिविटी बने रहने से प्रोडक्टिविटी घट जाती है. स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति दिन में 150 बार फोन देखता है. केवल एक मैसेज की वजह से उसके रोज के कामों में गलती की गुंजाइश बढ़ जाती है और दोबारा फ्लो में लौटने में लगभग 11 मिनट लग जाते हैं.

टेक्नोलॉजी के नेगेटिव इफैक्ट्स का एक बैलेंस बैठाने के लिए एक एम्प्लॉयर एक पॉजिटिव डिजिटल कल्चर अपनाने की शुरुआत कर सकते हैं. नॉरक्वेस्ट कॉलेज के चीफ कल्चर एंड ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर और हावर्ड प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम के इंस्ट्रक्टर लोरेन रुबिस ने कुछ उपाए बताए हैं. ये उपाय आपकी मदद कर सकते हैं.

दिमाग को रिलैक्स करने के लिए स्पेस दें
ऑफिस में ही वर्कर के लिए ऐसा स्पेस ढूंढा जा सकता है, जहां वो अपने काम और डिवाइस से ब्रेक लेकर कुछ देर एकांत में बैठकर सोच-विचार कर सकें. इस तरह का डाउन टाइम मिलने से वर्कर को अपने डिफॉल्ट मोड नेटवर्क (default mode network) को एक्टिवेट करने में मदद मिल जाती है. इस तरह उन्हें नई जानकारियां और नए आइडियाज़ भी हासिल हो सकते हैं.

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फोन-फ्री ब्रेक्स के लिए बढ़ावा दें
आधे से भी ज्यादा वर्कर्स डाउनटाइम में भी अपने स्मार्टफोन्स साथ रखना पसंद करते हैं. जबकि स्टडी बताती हैं कि जो वर्कर्स ब्रेक्स के दौरान भी अपने स्मार्टफोन साथ रखते हैं, काम पर लौटने के बाद उनकी प्रोडक्टिविटी काफी हद तक घट जाती है और ना ही उनमें पर्याप्त एनर्जी ही दिखाई देती है. ऐसे में बहुत जरूरी है ऑफिस में फोन-फ्री ब्रेक्स को बढ़ावा दिया जाए.

रिएक्शन देने की जल्दबाजी ना करें
ज्यादातर वर्कर्स अपने एम्प्लॉयर को तुरंत ही प्रतिक्रिया देने की जल्दी में रहते हैं. फिर चाहे वो बातचीत काम के बाद हो या वीकेंड पर या फिर छुट्टियों के दौरान. लीडर्स चाहें तो अपने कर्मचारियों के लिए पूरी तरह से पॉजिटिव डिजिटल माहौल पैदा कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें एक पॉलिसी बनानी होगी कि कब और कैसे अपने कर्मचारियों से प्रतिक्रिया की उम्मीद की जाती है.

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‘फोकस टाइम’ को ब्लॉक करना बताएं
बहुत से वर्कर्स को लगता है कि अपना काम पूरा करने के लिए उन्हें निरंतर समय नहीं मिल पाता है. जिन कर्मचारियों को अपने लिए 55 मिनट भी मिल जाते हैं वो ज्यादा ऊर्जावान, दोस्ताना, मजेदार और स्मार्ट होते हैं. कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्टिव बनाने के लिए कैलेंडर पर उन्हें ‘फोकस टाइम’ ब्लॉक करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है.

Tags: Employees, Employer, Lifestyle, Office culture

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