जानिए क्‍या है मैंसप्लेनिंग, कहीं आप भी तो नहीं बन रहीं इसकी शिकार?

मैंसप्लेनिंग करियर और हेल्थ के है परेशानी.
Mansplaining pexels-fauxels

मैंसप्लेनिंग करियर और हेल्थ के है परेशानी. Mansplaining pexels-fauxels

Mansplaining Exists: किसी पुरुष ने आपके अपने सबजेक्ट में मास्टर होने के बाद भी आपको यह बताने में कसर नहीं छोड़ी कि आप कम जानती हैं तो यह मैंसप्लेनिंग (Mansplaining) है.

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आप जूलॉजी की टीचर है और बहुत बेहतर तरीके से अपने स्टूडेंट्स को रिप्रोडेक्टिव सिस्टम के बारे में बता रहीं हैं, अचानक आपके हिंदी पढ़ाने वाले एक कलीग आते हैं और आपसे कहते हैं कि मैडम इसे इस तरह से बच्चों को बताएं तो ठीक रहेगा. तब कैसा महसूस किया है आपने, खीज होती है न?मन करता है कह दें कि हमें इस बारे में आपसे ज्यादा पता है. आप अपने कलीग के इस तरह के व्यवहार को कोई नाम नहीं दे पा रही हैं तो हम आपको बताते हैं इसे क्या नाम दें. इसे मैंसप्लेनिंग (Mansplaining ) कहते हैं. जी हां इसकी जड़ें पितृसत्तामक माइंड सेट से इस कदर जुड़ी हैं कि लोग यह स्वीकार ही नहीं कर पाते कि एक महिला भी अपने फील्ड में मास्टर हो सकती है, परफेक्ट हो सकती है. तो फिर इस तरह के व्यवहार से निपटने के लिए तैयार हो जाएं, न इससे खुद को कमतर आंकें और न ही अपने सेल्फ कॉन्फिडेंस में कमी लाएं.

कहां से आया ये शब्दः 

अंग्रेजी के शब्द एक्सप्लैन (Explain) के बोलचाल का शब्द स्प्लैन (Splain) दो सौ से अधिक साल से इस्तेमाल में है. लेकिन यह मशहूर हुआ साल 2008 से जब अमरीकी राइटर रेबेका सोलनिट का एक एसे (Essay) 'मेन एक्सप्लैन थिंग्स टू मी' (Men Explain Things to Me) टॉमडिस्पेच डॉटकॉम में पब्लिश हुआ. यह उन्होंने अपने पार्टी के एक अनुभव से प्रेरित होकर लिखा था. हालांकि अपने इस एसे में रबेका ने मैंसप्लेनिंग शब्द का इस्तेमाल नहीं किया,लेकिन उन्होंने इस बिहेवियर को "कुछ जो हर औरत जानती है" के रूप में बताया है. रेबेका का यह टर्म यहीं नहीं रूका उनके एसे के एक महीने बाद यह शब्द सोशल नेटवर्क लाइव जर्नल पर एक कमेंट में दिखाई दिया और जल्द ही मेनस्ट्रीम समीक्षा में आने से पहले ये शब्द फेमनिस्ट ब्लॉगर्स के बीच मशहूर हो गया. इस शब्द को 2010 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने वर्ड ऑप दि ईयर के खिताब से नवाजा तो साल 2012 में अमेरिकन डायलेक्ट सोसाइटी ने इसे साल के सबसे रचनात्मक शब्द" सम्मान के लिए नामांकित किया और ये यहीं नही रूका साल 2014 में ऑनलाइन ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में इसे जोड़ा लिया गया.



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क्या था रेबेका अनुभवः

अपनी बुक 'मेन एक्सप्लैन थिंग्स टू मी' एसे में रेबेका ने पार्टी के एक किस्से को आधार बनाया है .इस पार्टी में एक आदमी को पता चला कि रेबेका की लेटेस्ट बुक ब्रिटिश फोटोग्राफर एडवर्ड मायब्रिज (Eadweard Muybridge) पर आई हैं. उस आदमी से बातचीत के दौरान जब वह उसे अपनी बुक के बारे में बताने लगी तो उसने बीच में ही उनकी बात बुरी तरह से काटकर उन्हें किसी धर्म गुरु की तरह उसी फोटोग्राफर पर लिखी एक अहम बुक पढ़ने की सलाह दे डाली जो बुक खुद रेबेका ने लिखी थी. एक तरह से वह आदमी उनकी योग्यता पर सवाल खड़े कर रहा था. वह सदियों से चली आ रही मानसिकता की वजह से यह मानने को तैयार नहीं था कि वह उस तरह की बुक लिखने की काबिलियत रखती हैं. रेबेका ने इस बुक में हर औरत के कभी न कभी इस तरह के बिहेवियर के सामना करने की बात कही है.

मैंसप्लेनिंग का मतलबः 

मैंसप्लेनिंग एक ऐसा टर्म हैं, जिसका मतलब है बहुत ही साधारण तरीके से और जबरन अनुग्रह कर, अति आत्मविश्वास के साथ स्पेशली किसी औरत को गलत या नीचा दिखाते हुए उस पर कमेंट करना या उसे समझाना. फिर चाहे आपको यह पता हो या न हो कि जिस सबजेक्ट या विषय विशेष पर आप उस औरत को सलाह दे रहे हैं, उसे कमतर साबित कर रहे हैं वह उस सबजेक्ट की एक्सपर्ट है. इस तरह का बिहेवियर सदियों से चली आ रही पुरुष की उस काल्पनिक सोच का नतीजा है जहां वह सोचते हैं कि महिलाएं कम जानकारी रखती हैं. हम इसमें पुरुषों को भी दोष नहीं दे सकते क्योंकि समाज में यह सोच गहरी बैठा दी गई है, न चाहते हुए भी किसी भी काम को बेहतर करने में पुरुषों को ही तरजीह दी जाती है. अगर कोई महिला किसी काम में बेहतर कर भी ले तो उसे अजूबे की तरह लिया जाता है.

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अस्तिव में हैः  

कोई ये कह दे कि मैंसप्लेनिंग शोशेबाजी से अधिक कुछ नहीं तो ऐसा नहीं है. 17 वीं सदी से ही इस पर बातें होने लगी थी हो सकता है उस वक्त इस तरह के बिहेवियर के लिए कोई सटीक शब्द न मिल पाया हो. यहां यह बात भी गौर करने लायक है कि जब से समाज बना है तभी से ये आस्तिव में हैं. आए दिन होने वाली घटनाएं यह बताने के लिए काफी है कि मैंसप्लेनिंग अस्तिव में है. अब इस घटना को ही लें जिसमें फॉरमर नासा साइंटिस्ट अनिता सेनगुप्ता ट्विटर पर भारतीय पुरुषों की मैंसप्लेनिंग की शिकार हुई. उन्होंने चंद्रयान दो मिशन पर पृथ्वी के अलावा अन्य जगहों में रोबोट लैंडिंग के ओवरऑल साइंस बारे में जानकारी दी थी. इसके तुरंत बाद ही 20 साल की इस अनुभवी साइंटिस्ट की बात को काटते हुए इंडियन पुरुष ट्विटर पर अपना ज्ञान बघारने लगें. इसके तुंरत बाद इस साइंटिस्ट ने ट्विटर पर इन पुरुषों को आड़े हाथों लेते हुए मैंसप्लेनिंग का फ्लो चार्ट शेयर किया था. आपने अगर एमटीवी का कैटरीना कैफ और रणवीर कपूर का इंटरव्यू देखा होगा तो आपको समझ आ गया होगा कि किस तरह से रणवीर कैटरीना के क्वेशचन्स को मैंसप्लेन कर रहे थे. साल 2009 का वीडियो म्यूजिक अवार्ड (VMAs) आपको याद होगा जब टेलर स्विफ्ट को कान्ये वेस्ट से मंच पर जाकर लगभग उनके हाथ से माइक छीनते हुए उन्हें बीच में ही बोलने से रोक दिया था. इस पर बहुत कंट्रोवर्सी भी हुई थी और यह वीडियो क्लिप 23 मिलियन बार देखी गई थी.

नेगेटिव इफेक्ट्सः

जब कोई व्यक्ति मैन्सप्लेन करना शुरू करता है तो यह आपको फंसा हुआ महसूस करवा सकता है. इससे बचने के दो विकल्प हैं: या तो आप उसे डपट पाएं या फिर निराश बुरा महसूस करने के लिए तैयार रहें. मैंसप्लेनिंग झुंझलाहट और निराशा की भावनाओं को ट्रिगर कर सकता है. यह आपकी हार्ट रेट बढ़ा सकता है. इस वजह से आपकी बॉडी के हार्मोनल रिस्पांस के तरीके में भी बदलाव आ सकता है. अड्रीनल ग्लैंड किडनी के ठीक ऊपर होती हैं, तनाव होने पर यह अड्रेनलिन, टेस्टोस्टेरोन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन निकालती है.मैंसप्लेनिंग फेसियल एक्सप्रेशन में चेंज की वजह भी है. यह आपके करियर को खराब कर सकती हैं. मेंटल और साइकोलॉजिकल हेल्थ को प्रभावित करती हैं.

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स्टडीज बताती हैं होती रही है मैंसप्लेनिंग 

लैंग्वेज और सोशल साइकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक पेपर के मुताबिक, बातचीत या मीटिंग के दौरान महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक बार इंटरेप्ट किया जाता है.

प्रोफेशनल मीटिंग के दौरान पुरुष बातचीत पर हावी होते हैं. 2012 में ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी और प्रिंसटन के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन से पता चला है कि महिलाएं प्रोफेशनल मीटिंग्स में केवल 25 फीसदी बोलीं जबकि पुरुषों ने मीटिंग के औसतन 75 फीसदी हिस्से में बातचीत की.
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