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मूड स्विंग कब बन जाता है खतरनाक बीमारी, जानें इसे कैसे पहचानें


कई मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां मूड में गंभीर बदलाव का कारण बन सकती हैं.
कई मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां मूड में गंभीर बदलाव का कारण बन सकती हैं.

Rapid Mood Swings: मूड स्विंग्स को अमूमन लोग बेहद हल्के तौर पर भी लेते हैं. लेकिन कई बार मूड स्विंग्स खतरनाक भी साबित हो सकते हैं. कई बाद मूड स्विंग्स की वजह से कई लोगों के मन में आत्महत्या जैसे घातक विचार भी आते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 11:37 AM IST
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मूड स्विंग (Rapid Mood Swings) बायोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है, जिसकी वजह से दिमाग में एक प्रकार का रासायनिक असंतुलन हो सकता है. मूड स्विंग होने पर कभी व्यक्ति बेहद खुश और कभी बहुत उदास हो जाता है. हालांकि बार-बार मूड बदलने का कारण खून में मौजूद कार्टिसोल नामक स्ट्रेस का बढ़ना या थाइरॉयड असंतुलन भी हो सकता है. यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है.

मूड स्विंग्स को अमूमन लोग बेहद हल्के तौर पर भी लेते हैं. लेकिन कई बार मूड स्विंग्स खतरनाक भी साबित हो सकते हैं. कई बाद मूड स्विंग्स की वजह से कई लोगों के मन में आत्महत्या जैसे घातक विचार भी आते हैं. मूड स्विंग्स कुछ दिनों से लेकर बहुत लंबे समय तक के लिए भी हो सकता है. कई बार मूड स्विंग्स की वजह से लोग जरूरत से ज्यादा खरीददारी, लोगों से बेवजह उलझने जैसी चीजों में भी अनचाहे ही शामिल हो जाते हैं. अगर आपके साथ वर्तमान में ऐसी ही कोई समस्या है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें.

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या यदि आप वर्तमान में किसी ऐसी ही पशोपेश में हैं, या या आत्महत्या पर विचार कर रहे हैं, तो आप राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम लाइफलाइन के नंबर पर 1-800-273-8255 पर कॉल कर अपनी समस्या बता सकते हैं. यहां आपको उचित परामर्श मिलेगा. राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम लाइफलाइन 24/7 खुली रहती है.
मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां:
कई मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां मूड में गंभीर बदलाव का कारण बन सकती हैं. इन्हें अक्सर मूड डिसऑर्डर के रूप में जाना जाता है. आइए heathline वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के आधार पर जानते हैं इनके बारे में :

बाईपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder): यदि आपको बाईपोलर डिसऑर्डर है, तो कई बार अचानक आप एकदम से खुश या एकदम से अफ़सोस में आ सकते हैं. लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़े मूड स्विंग्स आम तौर पर साल में कुछ ही बार होता है, यहां तक ​​कि रैपिड-साइकलिंग बाइपोलर डिसऑर्डर में भी ऐसा ही है.

साइक्लोथैमिक डिसऑर्डर (Cyclothymic disorder):

साइक्लोथिमिक डिसऑर्डर या साइक्लोथाइमिया, बाईपोलर डिसऑर्डर की तरह यह भी एक हल्का, सामान्य सा मूड स्विंग ही है. इसमें, कई बार लोगों के इमोशन ऊपर-नीचे होते हैं लेकिन यह समस्या बाईपोलर डिसऑर्डर की तुलना में कम गंभीर है.

मेजर डिप्रेसिव बाईपोलर डिसऑर्डर (Major depressive disorder, MDD)

एमडीडी से पीड़ित लोग लंबे समय तक बहुत ज्यादा दुख का अनुभव करते हैं. एमडीडी को कभी-कभी क्लिनिकल डिप्रेशन भी कहा जाता है.

डिस्टीमिया (Dysthymia)

डिस्टीमिया, जिसे अब लगातार अवसादग्रस्तता विकार (पीडीडी) कहा जाता है, अवसाद का एक गंभीर रूप है.

पर्सनालिटी डिसऑर्डर: कुछ पर्सनालिटी डिसऑर्डर में, कम समय में तेजी से मूड स्विंग्स होते हैं.

विघटनकारी मनोदशा विकृति विकार (Disruptive mood dysregulation disorder, DMDD)

DMDD का आमतौर पर केवल बच्चों में ही देखा जाता है. इससे पीड़ित बढ़ती उम्र के बच्चों में विकास काफी धीमे होता है.

हार्मोनल बदलाव:
हार्मोन भी मूड में बदलाव का कारण बन सकते हैं. किशोर और महिलाएं जो गर्भवती हैं या मीनोपॉज से गुजर रही हैं, वे अपने शरीर के विकास के इस चरण से जुड़े हार्मोनल परिवर्तनों के कारण मूड स्विंग्स का अनुभव करते हैं.

इसके अलावा तनाव, जिंदगी में कुछ अनचाहे बदलाव, आपकी डाइट, आपके सोने की आदत और दवाएं भी मूड स्विंग्स का कारण बन सकती हैं. ऐसे में बेहद जरूरी है कि आप शेड्यूल बनाएं और उसे फॉलो करें. एक्सरसाइज करें, खूब पानी पिएं और अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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