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जानें- कौन थे लॉफिंग बुद्धा और लोग क्यों घर-दफ्तर में रखते हैं उनकी मूर्ति

लॉफिंग बुद्धा
लॉफिंग बुद्धा

चीनी वास्तुशास्त्र फेंगशुई में लॉफिंग बुद्धा का काफी महत्व है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2018, 9:52 AM IST
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चीनी वास्तुशास्त्र फेंगशुई में लॉफिंग बुद्धा का काफी महत्व है. हमारे देश में जो महत्व धन के देवता कुबेर और अन्य भगवानों का है चीन में लॉफिंग बुद्धा को लेकर लोगों के मन में उतनी ही श्रद्धा है. चीनी लोग ऐसा मानते हैं कि घर पर या ऑफिस में लॉफिंग बुद्धा की मूर्ती लगाना काफी फायदेमंद रहता है क्योंकि ऐसा करने से आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

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हालांकि भारत में भी अब घरों और दफ्तर में लॉफिंग बुद्धा की मूर्ती रखने का प्रचलन बढ़ रहा है. ऐसे में ये जिज्ञासा मन में उठाना स्वाभाविक है कि आखिरकार कौन थे लॉफिंग बुद्धा. आइए जानते हैं कि कौन थे लॉफिंग बुद्धा और क्यों हैं इतने प्रसिद्ध.



जापान के लोगों के अनुसार:
लॉफिंग बुद्धा भगवान बुद्ध के शिष्य थे. उनका वास्तविक नाम होतेई था. प्रचलित कथाओं के अनुसार, होतेई ने बौद्ध धर्म धारण किया था, कई सालों बाद जब उन्हें आत्मज्ञान मिला तो वो अचानक से बहुत तेज से हंसने लगे. इसके बाद वो जहां कहीं भी जाते लोगों को खुश रहने के तरीके बताते और खुश रहने की शिक्षा देते. जापानी लोगों ने इसी कारण होतेई को लॉफिंग बुद्धा का नाम दिया. तभी से होतेई लॉफिंग बुद्धा के नाम से धीरे-धीरे विश्व विख्यात हो गए.

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चीन के लोगों के अनुसार:

चीन में यह मान्यता है कि लॉफिंग बुद्धा दरअसल एक चीनी देवता हैं जिनका वास्तविक नाम पुताइ था. चीनियों का मानना है कि पुताइ एक बौद्ध भिक्षु थे जोकि एकदम चिन्तारहित जीवन जीते थे और हमेशा हंसी-ख़ुशी वाले मूड में रहते थे. पुताइ काफी मोटे थे और उनका पेट काफी निकला हुआ था. इस कारण वो जहां भी जाते अपना खुद का ही मजाक बनाते और जोर-जोर से ठहाके लगाते.

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उन्हें इस तरह से हंसता देखकर आसपास के लोग भी हंसने लगते थे. उनके इस खुशमिजाज स्वभाव के चलते लोग उनका काफी आदर-सत्कार करते थे और उन्हें किसी देवता की तरह मानने लगे. चीनी लोगों ने इसके बाद पुताइ की मूर्तियां रखनी भी आरम्भ कर दीं. आगे जाकर पुताइ ही लॉफिंग बुद्धा कहलाए.
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