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कम नींद से पहचानने की क्षमता में आती है कमी, हो सकता है अल्जाइमर का अलर्ट: रिसर्च

कम नींद से पहचानने की क्षमता में आती है कमी, हो सकता है अल्जाइमर का अलर्ट: रिसर्च

वह बुजुर्ग जो कम या लंबी नींद लेते हैं, उनमें अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण देखे जा सकते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

वह बुजुर्ग जो कम या लंबी नींद लेते हैं, उनमें अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण देखे जा सकते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Sleep, Alzheimer's & Ability to Recognize : रिसर्च में अल्जाइमर से संबंधित प्रोटीनों और नींद के दौरान दिमाग की गतिविधियों को माप कर पता चला कि नींद, अल्जाइमर्स और पहचाननने की क्षमता का आपस में सीधा संबंध है.

    Sleep, Alzheimer’s & Ability to Recognize : आमतौर पर बुजुर्गों को होने वाली भूलने की बीमारी अल्जाइमर (Alzheimer) को लेकर एक नई स्टडी में पता चला है कि नींद, अल्जाइमर और पहचानने की क्षमता का आपस में संबंध हैं. दैनिक जागरण अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक. कम नींद और अल्जाइमर का गहरा रिश्ता है. जिसके कारण संज्ञान (cognition) यानी पहचानने की क्षमता में कमी आती है. इन दोनों के एक-दूसरे पर प्रभाव को अलग करना चुनौतीपूर्ण है. बुजुर्गो के बड़े ग्रुप का कई सालों तक उनकी पहचानने की क्षमता की स्टडी करने के बाद पाया गया कि वह बुजुर्ग जो कम या लंबी नींद लेते हैं, उनमें अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण देखे जा सकते हैं. जबकि मध्यम नींद लेने वालों में ऐसी कोई परेशानी नहीं होती है और उनकी पहचानने और याद रखने की क्षमता प्रभावित नहीं होती है.

    ऑक्सफोर्ड एकेडमी के जर्नल ‘ब्रेन (Brain)’में प्रकाशित इस रिसर्च में अल्जाइमर से संबंधित प्रोटीनों और नींद के दौरान दिमाग की गतिविधियों को माप कर पता चला कि नींद, अल्जाइमर और पहचाननने की क्षमता का आपस में सीधा संबंध है.

    क्या कहते हैं जानकार
    वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्लीप मेडिसिन सेंटर (Sleep Medicine Center) के निदेशक और न्यूरोलाजी की एसोसिएट प्रोफेसर ब्रेनडेन लूसी (Brendan P Lucey) ने कहा कि यह स्थापित करना कठिन है कि नींद और अल्जाइमर के विभिन्न चरण आपस में कैसे जुड़े हुए हैं, लेकिन यह एक-दूसरे को प्रभावित कैसे करते हैं, यह स्पष्ट होने लगा है.

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    लूसी ने बताया कि शोध में सुझाव दिया गया है कि मध्यम रेंज या मीठी नींद के उपक्रम में पहचानने की क्षमता लंबे समय तक स्थिर (स्टेबल) रहती है. पर्याप्त नींद पूरी नहीं होने के कारण हाई रिस्क अल्जाइमर के जेनेटिक वैरिएंट एपीओई4 (Genetic variant APOE4) के टेस्ट के लिए ब्लड के सैंपल की जांच की जाती है. इससे सालाना क्लिनिकल ट्रीटमेंट होता है और पहचानने की क्षमता का मूल्यांकन होता है.

    क्या है अल्जाइमर
    अल्जाइमर की बीमारी सामान्यतया याददाश्त में कमी से शुरू होती है. धीरे-धीरे इसमें लोगों को भूलने की आदत लग जाती और समय के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है. बोलते हुए किसी का नाम भूल जाना या कोई तथ्य भूल जाना, इसके शुरुआती लक्षण हैं. बाद में यह आदत बन जाती है और इसमें जबर्दस्त मूड स्विंग करने लगता है.

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    आमतौर पर यह बीमारी बुजुर्गों में होती है लेकिन इसके लक्षण बहुत पहले से ही देखने को मिलने लगते हैं. चिंता, अवसाद, स्ट्रेस जैसी स्थिति में कम उम्र के लोगों में भी भूलने की समस्या हो जाती है. आजकल कोरोना के खौफ ने लोगों के अंदर काफी स्ट्रेस भर दिया है, इससे कई लोगों में मेमोरी की समस्या होने लगी है.

    Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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