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अगर गाजियाबाद में हैं तो लाला जी की चाट जरूर खाएं, मन सच में चटपटा हो जाएगा

बनारस से लेकर लखनऊ तक चाट के एक से एक प्रकार आपको मिलेंगे.
बनारस से लेकर लखनऊ तक चाट के एक से एक प्रकार आपको मिलेंगे.

Lala Ji Chaat: करीब 30 सालों से गाजियाबाद के तुराबनगर मार्केट में लाला जी की चाट का स्वाद लेने लोग यहां पहुंचते हैं. करारे आलू और उसमें दही के साथ चटनियां, आपको यह देखते ही खाने का मन करने लगेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 9:54 AM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

अगर आप नेशनल कैपिटल रीजन यानि एनसीआर के गाजियाबाद में हैं या फिर यहां से गुजर रहे हैं तो आपके लिए एक ठिकाना बहुत ही बेहतरीन है. वैसे तो यहां स्नैक्स ही मिलते हैं लेकिन वो इतने लजीज हैं कि आप भर पेट वही खा सकते हैं. साथ में खाना पचाने के लिए आपको वहां शानदार शिकंजी भी मिलेगी. जी मैं बात कर रहा हूं गाजियाबाद के मुख्य बाजार तुराब नगर के लाला जी चाट की. करीब 30 सालों से वे यहां चाट का स्वाद लोगों को चखा रहे हैं. करारे आलू और उसमें दही के साथ चटनियां, आपको यह देखते ही खाने का मन करने लगेगा. कई बार तो अगर आप इसे बनते हुए देखते हैं तो उसी समय आपके मुंह में पानी आ जाता है. मेरठ से आकर यहां पर लाला जी चाट की शुरुआत हुई थी. सबसे खास बात यह है कि यहां सबकुछ शुद्ध देसी घी में बनता है और लहसुन प्याज भी इसमें नहीं पड़ता है.

दुकान के संचालक का कहना था कि सबसे ज्यादा जिस चीज का वह ध्यान रखते हैं वो है शुद्धता. उनके अनुसार जो भी कच्चा माल वो लाते हैं उसका ध्यान रखते हैं. दही-चटनी आलू सब वैसा ही जैसा वो अपने परिजनों को खिलाना चाहें. लाला जी के यहां आलू फ्राई तो है ही मस्त, साथ ही आलू टिक्की की चाट आपको मस्त कर देती है. यहां अन्य कई वैरायटीज भी उपलब्ध हैं लेकिन मेरी पहली पसंद तो हमेशा एक पत्ता चाट ही होती है. दोपहर से पहले ही यह छोटा सा स्टॉल खुल जाता है और आपको भीड़ दिखनी शुरू हो जाती है. मशहूर जगहों की यह एक खासियत है कि आपको अपनी बारी का इंतजार करना ही होता है. कुछ भी रेडीमेड नहीं होता.



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चाट का इतिहास
चाट के इतिहास के बारे में बात की जाए तो यह उत्तर प्रदेश से निकला है. बनारस से लेकर लखनऊ तक चाट के एक से एक प्रकार आपको मिलेंगे. आलू टिक्की, मटर, पापड़ी, दही भल्ले और न जाने किस किस प्रकार के चाट यूपी के अलग-अलग शहरों में मिलते हैं. बनारस, लखनऊ और आगरा होते हुए ही यह चाट दिल्ली और फिर पूरे देश में फैली.

दरअसल, जब शहजहां ने राजधानी दिल्ली बनाने का मन बनाया तो राज हकीमों ने यहां के पानी को लेकर आगाह किया. वो जब नहीं माने तो रास्ता सुझाते हुए कहा गया कि देसी घी, चपटले मसाले और दही के सेवन से पानी के कुप्रभाव को कम किया जा सकता है. फिर, जब मामला ऐसा हो तो चाट से बेहतर क्या हो सकता है. इस प्रकार दिल्ली में शाही तरीके से पहुंची थी चाट. बहरहाल अगर आप चाट खाने के शौकीन हैं तो यह चाट एक बार खाइए, दोबारा आने का तो मन पक्का करेगा.
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