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आपकी हंसी बता सकती है आपकी सांस्कृतिक पहचान- स्टडी

आपकी हंसी बता सकती है आपकी सांस्कृतिक पहचान- स्टडी

हंसी एक मजबूत सांकेतिक अभिव्यक्ति (symbolic expression) है, जो सहयोग और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का सिग्नल माना जाता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock)

हंसी एक मजबूत सांकेतिक अभिव्यक्ति (symbolic expression) है, जो सहयोग और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का सिग्नल माना जाता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock)

Laughter and cultural identity: यूनिवर्सिटी ऑफ एम्सटर्डम (University of Amsterdam) के रिसर्चर्स ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ की एक नई स्टडी में बताया है कि हमारी हंसी हमें और लोगों से अलग कर देती है. इस स्टडी का निष्कर्ष ‘फिलोसॉफिकल ट्रांजैक्शंस बी (Philosophical Transactions B)’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इस स्टडी में डच और जापानी लोग शामिल थे. इसमें पाया गया कि सुनने वाले व्यक्ति हंसी सुनकर ही यह पता कर लेते थे कि उक्त व्यक्ति उसकी अपनी संस्कृति वाला है. हंसी एक मजबूत सांकेतिक अभिव्यक्ति (symbolic expression) है, जो सहयोग और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का सिग्नल माना जाता है. लेकिन सहज हंसी (spontaneous laughter) और ऐच्छिक हंसी (voluntary laughter) में अंतर होता है.

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    Laughter can tell the cultural Identity: क्या आप सोच सकते हैं कि किसी इंसान की हंसी से उसकी सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) की जा सकती है? जी हां, ऐसा संभव है. यूनिवर्सिटी ऑफ एम्सटर्डम (University of Amsterdam) के रिसर्चर्स ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ की एक नई स्टडी में बताया है कि हमारी हंसी हमें और लोगों से अलग कर देती है. इस स्टडी का निष्कर्ष ‘फिलोसॉफिकल ट्रांजैक्शंस बी (Philosophical Transactions B)’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इस स्टडी में डच और जापानी लोग शामिल थे. इसमें पाया गया कि सुनने वाले व्यक्ति हंसी सुनकर ही यह पता कर लेते थे कि उक्त व्यक्ति उसकी अपनी संस्कृति वाला है, या किसी और ग्रुप से है. स्वत: स्फूर्त (spontaneous) मतलब सहज या अपने आप आने वाली हंसी को दोनों ग्रुप्स ने सबसे अधिक पॉजिटिव माना. हंसी एक मजबूत सांकेतिक अभिव्यक्ति (symbolic expression) है, जो सहयोग और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का सिग्नल माना जाता है. लेकिन सहज हंसी (spontaneous laughter) और ऐच्छिक हंसी (voluntary laughter) में अंतर होता है.

    सहज या अपने आप आने वाली हंसी विशुद्ध रूप से अनियंत्रित प्रतिक्रिया होती है. जैसे कि खुशी देने वाले किसी चुटकले को सुनकर आती है. इस हंसी में ध्वनिक विशेषताएं (acoustic characteristics) भी शामिल होती हैं. जबकि ऐच्छिक हंसी किसी उद्देश्य से वोकल एक्सप्रेशन के लिए मॉडुलेट की हुई होती है.

    ये ताजा रिसर्च बताती है कि हम सहज या अपने आप आने वाली हंसी (spontaneous laughter) के बजाय ऐच्छिक हंसी (voluntary laughter) के माध्यम से ज्यादा पहचान कर पाते हैं. ऐच्छिक हंसी में वोकल कंट्रोल ज्यादा होता है, जिसमें हंसने वाले व्यक्ति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं पता चलती है. जबकि भावनात्मक अभिव्यक्ति की हंसी व्यवस्थित रूप से सांस्कृतिक समूहों में अलग-अलग होती है. इस अंतर के आधार पर सुनने वाला व्यक्ति भावनाओं को ज्यादा सटीक ढंग से समझ पाता है और अपने सांस्कृतिक समूह वाले व्यक्ति की अन्य समूह के लोगों से स्पष्ट तौर पर कर पाता है.

    कैसे हुई स्टडी?
    इस स्टडी के दौरान रिसर्चर्स ने इस बात की भी पड़ताल की कि क्या हंसी के जरिये सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर किसी की पहचान हो सकती है या फिर ग्रुप्स के साथ भी ऐसा हो सकता है. इस स्टडी के लिए डच और जापानी लोगों के सहज और अपने आप आने वाली हंसी और ऐच्छिक हंसी वाले लाफ्टर क्लिप का इस्तेमाल किया गया.

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    इसमें 273 डच लोगों ने और 131 जापानी लोगों ने गैर-संदर्भित हंसी (non-referential laughter) के क्लिप सुने. इसके आधार पर यह पता किया कि
    -क्या जो हंसी उन्होंने सुनी है, वह उनके अपने सांस्कृतिक समूह वाले लोगों की है, या किसी अन्य समूह के लोगों की?
    -हंसी सहज थी या ऐच्छिक?
    -हंसी के हर क्लिप को पाजिटिविटी के आधार पर रेट भी किया?

    क्या निकला निष्कर्ष?
    डाटा का विश्लेषण करने पर रिसर्चर्स  ने पाया कि सुनने वाले व्यक्ति ने अपने ग्रुप के सदस्यों की सहज और ऐच्छिक दोनों प्रकार की हंसी की बराबर पहचान की. सहज या अपने अपने आप आने वाली हंसी को ज्यादा पॉजिटिव रेट किया और दूसरे समूह के लोगों की तुलना में भी यही बात रही.

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    उन्होंने बताया कि हमारी रिसर्च के निष्कर्ष में दिखा कि थोड़ी सी भी हंसी सुनकर लोगों ने बड़ी सटीकता से यह पहचान कर ली कि वह उनके अपने सांस्कृतिक समूह वाले हैं या किसी अन्य समूह से. ये निष्कर्ष इस बात के संकेत हैं कि हंसी एक समृद्ध मुखर संकेत है, जिससे अन्य व्यक्तियों के बारे में व्यापक अनुमान लगाया जा सकता है.

    Tags: Lifestyle, New Study

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