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अब आप अपने आलस का दोष आसानी से दूसरों पर मढ़ सकते हैं


Updated: October 23, 2019, 1:09 PM IST
अब आप अपने आलस का दोष आसानी से दूसरों पर मढ़ सकते हैं
मानो यह घोड़ा, अपने आलसी दोस्त से कह रहा हो- अब उठ भी जाओ...

इस शोध का चिकित्सकीय इस्तेमाल ऑटिस्म (Autism) और स्किजोफ्रीनिया (Schizophrenia) जैसे मानसिक विकारों के इलाज में किया जाना है.

  • Last Updated: October 23, 2019, 1:09 PM IST
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पैरिस. आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। यानी आलस (Laziness) ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, जो उसके ही शरीर में बसता है. हमारे आलस से जुड़े इस तरह की कई श्लोक, लोकोत्तियां और मुहावरे प्रचलित हैं. आपने भी कभी-न-कभी आलसी होने के ताने सुने होंगे. समय पर काम न होने पर आपको आलसी करार दिया गया होगा. यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो यह खबर आपके लिए ही है. अब आप ऐसा ताना मारने वालों को करारा जवाब दे सकते हैं. इस जवाब के समर्थन में अब आपके पास एक वैज्ञानिक शोध (Scientific Research) का निष्कर्ष होगा.

जी हां, एक वैज्ञानिक शोध में यह पाया गया है कि आलस आपके अंदर से नहीं बल्कि आसपास के माहौल से आता है. ब्रेन एण्ड स्पाइन इंस्टीट्यूट, पैरिस (Brain and Spine Institute Paris) के वैज्ञानिकों ने यह शोध किया है. शोध में पाया गया कि आलस का आपके अंदर जैनेटिकली नहीं बल्कि संक्रमण से आता है. पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंसेस कम्पयुटेशनल बायोलॉजी डिपार्टमेन्ट (Public Library of Sciences Computational Biology Department) में छपे इस शोध की माने तो आपके आसपास के लोगों का व्यवहार आपको प्रभावित करता है.

मुख्य शोधकर्ता जीन डॉनजिउ (Jean Daunzeaus) ने बताया कि यह आम धारणा के विपरित है. माना यह जाता है कि मूलतः आलसी लोग अपने जीन्स या नैसर्गिक तौर पर ही ऐसे होते हैं. जबकि शोध में यह पाया गया है कि आप अपने आसपास लोगों की व्यवहार की नकल करते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोगों में अपने आप को वहां मौजूद समूह या व्यक्तियों जैसा ही दिखाने की चाहत होती है.

वैज्ञानिकों ने इस शोध के अंदर लोगों को अलग अलग सूमहों में रखा. इन समूहों को तेज, आलस और धीरज से काम करने वालों में बांटा गया. शोध के जो नतीजे निकले उन्होंने वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया. वैज्ञानिकों ने शोध में भाग लेने वालों पर 56 तरह के व्यक्तित्व परिक्षण किए. यह सारे परिक्षण किसी काम को करने में रिस्क लेने और उसे टालने से जुड़े हुए थे.

शोध का निष्कर्ष इस वैज्ञानिक मान्यता को ध्वस्त करता है जिसमें किसी व्यक्ति के व्यवहार के लिए उसके जीन्स को जिम्मेदार माना जाता था. इससे सामाजिक या अपनों के दवाब में व्यक्ति व्यवहार बदलाव मुश्किल से होने की थ्योरी को भी नकार दिया. इस शोध का चिकित्सकीय इस्तेमाल ऑटिस्म और स्किजोफ्रीनिया जैसे मानसिक विकारों के इलाज में किया जाना है.

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First published: October 23, 2019, 1:02 PM IST
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