Menstrual Cups कितने प्रकार के होते हैं और इन्‍हें कैसे यूज करते हैं, जानें

Menstrual Cups कितने प्रकार के होते हैं और इन्‍हें कैसे यूज करते हैं, जानें
मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन से बने मेंस्ट्रुअल कप्स बहुत ज्यादा फ्लेक्सिबल होते हैं.

सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin) के मुकाबले मेंस्ट्रुअल कप्स (Menstrual Cups) ज्‍यादा सुरक्षित और आरामदेह माने जाते हैं. इसकी वजह यह भी है कि सैनिटरी नैपकिन में लगा ब्लड लंबे समय तक वजाइना (Vagina) के आप-पास लगा रहता है. हालांकि मेंस्ट्रुअल कप्स में ऐसा नहीं होता, क्‍योंकि इसमें ब्लड कप में इकठ्ठा होता जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 11:10 AM IST
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लंबे समय से महंगे सैनिटरी नैपकिंस (Sanitary Napkins) का इस्तेमाल किया जाता रहा है. मगर इसके बाद मेंस्ट्रुअल कप्स (Menstrual Cups) का इस्तेमाल का चलन बढ़ने लगा है. मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन से बने मेंस्ट्रुअल कप्स बहुत ज्यादा फ्लेक्सिबल होते हैं. यही वजह है कि इन्‍हें बड़े आराम से वजाइना (Vagina) में इंसर्ट करना आसान होता है. हालांकि अब भी बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिन्‍हें इसके बारे में कुछ खास जानकारी नहीं है और न ही वे जानती हैं कि इसका इस्‍तेमाल वे किस तरह कर सकती हैं. आज हम आपको मेंस्ट्रुअल कप्स के बारे में बताने जा रहे हैं.

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मेंस्ट्रुअल कप्स का ऐसे करें इस्तेमाल
इसका चुनाव करते समय कुछ खास बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेंस्ट्रुअल कप्स अपने शरीर के मुताबिक सही आकार के मुताबिक ही लें. वहीं इस बात का भी ख्‍याल रखें कि यह साफ होने के साथ ही सूखा भी हो. मेंस्ट्रुअल कप्स को इस्‍तेमाल करते समय पहले इसे सी-शेप में फोल्ड कर लें. इसके बाद इसे वजाइना में इंसर्ट करें. इसके लिए पहले कप को मोड़ें और फिर अपनी वैजाइना में डालें. अंदर जाकर कप खुद खुल जाएगा और लीकेज नहीं होने देगा. वहीं जब इसे बाहर निकालना हो तो कप को नीचे से दबाएं और फिर नीचे की ओर खीच लें. इसके अंदर जो ब्‍लड जमा हो गया हो, उसे टॉयलेट में जाकर खाली कर लें.
इसे कम से कम 12 घंटे तक बदलने की जरूरत नहीं होती. इसके बाद इसे अच्‍छी तरह धोकर साफ करके रख लें. यह ध्‍यान रखना जरूरी है कि इसे हर बार पीरियड्स में इस्तेमाल होने के बाद उबालें जरूर. ताकि इसमें किसी तरह की गंदगी न रह जाए और इंफेक्‍शन का खतरा न रहे.



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इसे इस्‍तेमाल करना ज्‍यादा सुरक्षित
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैनिटरी नैपकिन के मुकाबले इसे ज्‍यादा सुरक्षित और आरामदेह माना जाने लगा है. इसकी वजह यह भी है कि सैनिटरी नैपकिन में लगा ब्लड लंबे समय तक वजाइना के आप-पास लगा रहता है. हालांकि मेंस्ट्रुअल कप्स में ऐसा नहीं होता, क्‍योंकि इसमें ब्लड कप में इकठ्ठा होता जाता है. ऐसे में टीटीएस (टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम), जो कि एक यर बैक्टिरियल बीमारी है, इसके होने का खतरा नहीं रहता, क्‍योंकि नैपकिन की तरह यह लंबे समय तक गीला नहीं रहता.
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