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याददाश्त सुधारना है, तो नई भाषा सीखिए, डिमेंशिया का रिस्क भी होगा कम-रिसर्च

याददाश्त सुधारना है, तो नई भाषा सीखिए, डिमेंशिया का रिस्क भी होगा कम-रिसर्च

रिसर्चर का कहना है कि बुजुर्गो में इस प्रकार की एक्टिविटी से संज्ञानात्मक सुधार आता है. (प्रतीकात्मक फोटो- shutterstock.com)

रिसर्चर का कहना है कि बुजुर्गो में इस प्रकार की एक्टिविटी से संज्ञानात्मक सुधार आता है. (प्रतीकात्मक फोटो- shutterstock.com)

Learning a new language improves Memory : कनाडा के बायक्रेस्ट सेंटर (Baycrest Centre) और यॉर्क यूनिवर्सिटी (York University) के रिसर्चर्स द्वारा की गई नई स्टडी में पता चला है कि कोई दूसरी नई भाषा सीखना ब्रेन की हेल्थ में सुधार लाने का एक सुखद तरीका है और इससे याददाश्त बढ़ती है. नई स्टडी में पाया है कि जिन बुजुर्गो ने नई भाषा (स्पैनिश) का अध्ययन किया, उनमें कुछ खास संज्ञानात्मक कौशल (सीखने की क्षमता) में वैसा ही सुधार आया, जैसा कि उस कौशल में निखार लाने के लिए ब्रेन ट्रेनिंग (Brain Training) एक्टिविटीज से आता है. इस स्टडी के नतीजे एजिंग न्यूरोसाइकोलाजी एंड कॉग्निशन (Aging, Neuropsychology, and Cognition) नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

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    Learning a new language improves Memory : वैसे तो मेमोरी (Memory) बढ़ाने के लिए कई उपाय और एक्सपेरिमेंट होते रहे हैं. इसी फेहरिस्त में कनाडा के बायक्रेस्ट सेंटर (Baycrest Centre) और यॉर्क यूनिवर्सिटी (York University) के शोधकर्ताओं द्वारा की गई नई स्टडी में पता चला है कि कोई दूसरी नई भाषा सीखना ब्रेन की हेल्थ में सुधार लाने का एक सुखद तरीका है और इससे याददाश्त बढ़ती है. दैनिक जागरण अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्चर्स ने अपनी इस नई स्टडी में पाया है कि जिन बुजुर्गो ने नई भाषा (स्पैनिश) का अध्ययन किया, उनमें कुछ खास संज्ञानात्मक कौशल (सीखने की क्षमता) में वैसा ही सुधार आया, जैसा कि उस कौशल में निखार लाने के लिए ब्रेन ट्रेनिंग (Brain Training) एक्टिविटीज से आता है. इस स्टडी के नतीजे एजिंग न्यूरोसाइकोलाजी एंड कॉग्निशन (Aging, Neuropsychology, and Cognition) नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

    स्टडी के नतीजे इस मायने में महत्वपूर्ण है कि याददाश्त सुधारने के लिए ब्रेन ट्रेनिंग पर तो जोर दिया जाता है, लेकिन उसके लिए दूसरी भाषा सीखने जैसे उपाय को महत्व नहीं दिया जाता है. जबकि यह पाया गया है कि भाषा सीखना ब्रेन ट्रेनिंग (Brain Training) से ज्यादा सुखद अनुभव देने वाला होता है.

    रिसर्चर्स का क्या कहना है
    इस स्टडी के प्रमुख लेखक जेड मेल्टजर (Jade Meltzer) ने बताया कि यह निष्कर्ष काफी उत्साहवर्धक (encouraging) है, क्योंकि इसमें इस बात का संकेत मिलता है कि बुजुर्गो में इस प्रकार की एक्टिविटी से संज्ञानात्मक सुधार आता है और वे इन गतिविधियों में खुशी-खुशी हिस्सा भी लेते हैं. स्टडी में इसका भी सबूत मिला है, कि द्विभाषी (bilingual) होना एक प्रकार से ब्रेन की हेल्थ लिए सुरक्षात्मक प्रभाव पैदा करता है और एक भाषा जानने वालों की तुलना में उनमें बाद में डिमेंशिया (Dementia) जैसी बीमारी का खतरा होता है. हालांकि पूरी तरह से द्विभाषी हुए बगैर दूसरी भाषा सीखने की प्रक्रिया में संज्ञानात्मक प्रभाव के बारे में फिलहाल काफी कम जानकारी है.

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    यॉर्क यूनिवर्सिटी (York University) में मनोविज्ञान विभाग की रिसर्चर प्रोफेसर डॉक्टर एलेन बेलस्टाक (Ellen Belstack) ने बताया कि हमारी स्टडी के प्रतिभागियों में यह देखा गया कि धाराप्रवाह (Fluent) स्पैनिश (spanish) बोलने में सक्षम होने से पहले ही उनमें उल्लेखनीय संज्ञानात्मक सुधार (cognitive improvement) हुआ.

    रिसर्च प्रोसेस
    भाषा सीखने वालों और ब्रेन ट्रेनिंग लेने वालों को 16 सप्ताह तक उनके टास्क दिए गए. इन दौरान प्रति सप्ताह पांच दिन 30-30 मिनट में उनसे निर्धारित एक्टिविटी कराई गईं. स्पैनिश (Spanish) भाषा सीखने वालों को ऑनलाइन एप के जरिये भाषा सीखने का काम दिया गया. इसी प्रकार ब्रेन ट्रेनिंग के तहत विशिष्ट तकनीक से ट्रेनिंग दी गई.

    स्टडी का स्वरूप
    अपनी इस स्टडी में रिसर्चर्स ने 65-75 वर्ष उम्र वाले 76 लोगों को शामिल किया. सभी प्रतिभागी सिर्फ एक भाषा बोलते थे और वे संज्ञानात्मक तौर (cognitively) पर हेल्दी थे. उन्होंने पहले न तो कभी स्पैनिश सीखी थी और न ही पिछले 10 सालों में कोई दूसरी भाषा पढ़ी थी. इन सभी प्रतिभागियों को बिना किसी मानक या आधार पर तीन ग्रुप्स में बांटा गया- पहले ग्रुप में भाषा सीखने वालों को रखा गया, दूसरे ग्रुप में वे थे, जिन्हें ब्रेन ट्रेनिंग दी जानी थी. तीसरे ग्रुप (कंट्रोल ग्रुप) के लोगों को न तो भाषा सिखाना था और न ही ब्रेन ट्रेनिंग दी जानी थी.

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    स्टडी का निष्कर्ष
    रिसर्चर्स ने 16 हफ्ते के बाद दोनों ग्रुप्स के लोगों का टेस्ट किया. जिसमें पाया कि जिन लोगों ने भाषा सीखी उनमें संज्ञानात्मक सुधार का स्तर यानी सीखने की क्षमता का केवल ब्रेन ट्रेनिंग लेने वालों के बराबर ही था. इसमें प्रतिभागियों में टास्क को लेकर प्रतिबद्धता और उनके सुखद अहसास के लेवल का भी आकलन किया गया. दोनों ही ग्रुप्स के प्रतिभागियों में क्रियाशील स्मृति (वर्किग मेमोरी) और  एग्जीक्यूटिव फंक्शन (जैसे कि विरोधाभासी सूचनाओं को मैनेज करना, किसी विषय पर केंद्रित रहना व ध्यान भटकने नहीं देना) में सुधार एक जैसा था.

    हालांकि, ब्रेन ट्रेनिंग लेने वाले समूह के प्रतिभागियों में प्रोसेसिंग स्पीड तुलनात्मक रूप से ज्यादा थी, जो अपेक्षित ही था क्योंकि प्रशिक्षण में कौशल विकास को निखारने पर ही जोर होता है. दूसरी ओर, भाषा सीखने वालों पर चूंकि कोई दबाव नहीं था, इसलिए उनमें खुशी या सुखद अहसास का स्तर ज्यादा था.

    Tags: Health, Health News, Mental health

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