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ऑफिस में लंच के बाद आती है सुस्ती, आपकी मदद करेंगे ये टिप्स

ऑफिस में लंच के बाद आती है सुस्ती, आपकी मदद करेंगे ये टिप्स

ऑफिस में लंच के बाद जम्हाई (Yawn) आने लगती है, पलकें झपकने लगती हैं और काम में मन नहीं लगता. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

ऑफिस में लंच के बाद जम्हाई (Yawn) आने लगती है, पलकें झपकने लगती हैं और काम में मन नहीं लगता. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Tips to beat the afternoon Lethargy : दोपहर का खाना खाने के बाद अचानक से बदन में सुस्ती (lethargy) आने लगती है. काफी देर तक शरीर काम पर दोबारा लौटने की गवाही नहीं देता. अगर मुश्किल से आप वर्क स्टेशन (Work Station) पर थोड़ी देर सिर नीचे करके बैठ भी जाते हैं, तो भी सुस्ती आपका पीछा नहीं छोड़ती तो आपको बताते हैं कुछ आसान टिप्स जो दोपहर की सुस्ती को मात देने के लिए उपयोगी है.

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    Tips to beat the afternoon Lethargy : वैसे तो ऑफिस में काम का लोड अपने आप में हमें अलर्ट रखता है, लेकिन दोपहर का खाना खाने के बाद अचानक से बदन में सुस्ती (lethargy) आने लगती है. काफी देर तक तो शरीर काम पर दोबारा लौटने की गवाही नहीं देता. अगर मुश्किल से आप वर्क स्टेशन (Work Station) पर थोड़ी देर सिर नीचे करके बैठ भी जाते हैं, तो भी सुस्ती आपका पीछा नहीं छोड़ती. लगातार जम्हाई (Yawn) आने लगती है, पलकें झपकने लगती हैं और काम में मन नहीं लगता. बस ऐसा लगता है कि थोड़ी देर सो जाएं. लेकिन काम भी तो करना है? ऊपर से ऑफिस के दौरान अगर सुस्ती तोड़ते पाए गए, तो अलग से लेने के देने पड़ जाएंगे. अब इस दोपहर की सुस्ती को दूर करने के लिए भला क्या किया जाए? तो आपको बताते हैं कुछ आसान टिप्स जो दोपहर की सुस्ती को मात देने के लिए उपयोगी है.

    दरअसल दोपहर में लंच के बाद बॉडी में भारीपन लगता है. पेट भरा होने की वजह से सुस्ती आती है. इसलिए ये जरूरी है कि खाने को पचने के लिए समय दें. अगर आप फिजिकली एक्टिव रहेंगे तो नींद अपने आप ही नहीं आएगी. इसके लिए आपको क्या करना है ये जानिए.

    फिजिकल एक्टिविटी करें
    लंच के बाद फिजिकल एक्टिविटी आपके शरीर को खाना पचाने में मदद करती है. ये ब्लड शुगर को स्टेबल करके बॉडी में कुछ ऐसे हार्मोन रिलीज करती है, जो सुस्ती या नींद कम करने में मदद करते हैं. टहलना या स्ट्रेचिंग करना दोपहर की सुस्ती को मात देने का एक इफैक्टिव तरीका है. इससे बॉडी में ब्लड फ्लो बना रहता है और एनर्जी मिलती रहती है.

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    अगर आप बाहर नहीं जा सकते तो डेस्क पर ही स्ट्रेच जैसे फुट पंप, आर्म सर्कल, नेक रोल और सीटेड स्पाइनल ट्विस्ट कर सकते हैं. स्ट्रेचिंग हमारी मांसपेशियों को लचीला और मजबूत रखती है, जो बदले में हमारी गतिशीलता (mobility) और ओवरऑल हेल्थ को बनाए रखने में हेल्प करती है.

    टहलना भी है लाभदायक
    दोपहर में अगर आपको काम के दौरान सुस्ती महसूस हो, तो बीच-बीच में टहल लें. कुछ एक्सपर्ट्स अपनी स्टडी में हर घंटे लगभग 15 मिनट खड़े रहने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि काम के बीच में थोड़ी-थोड़ी देर पर पैदल चलना या खड़े होकर काम करना, हार्ट स्पीड को बढ़ाता है, जो थकान का मुकाबला करने में अधिक शक्तिशाली होता है. तो अगली बार जब भी सुस्ती सताए, आसपास थोड़ा टहल लें.

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    सूरज की रोशनी में जाएं
    कई रिसर्च से पता चला है कि सूरज की रोशनी हमारे सेरोटोनिन (serotonin) के लेवल को बढ़ाती है, जो हमें अधिक एनर्जेटिक, शांत, पॉजिटिव और सेंट्रिक बनाती है. इसलिए अपनी डेस्क से चलकर टहलने के लिए बाहर जाएं और ताजी हवा में सांस लें. खुली हवा में एक छोटी-सी चहलकदमी भी आपके मूड में सुधार कर सकती है और क्रिएटिविटी बढ़ा सकती है.

    Tags: Health, Health News, Lifestyle

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