तिर्यक भुजंगासन, पूर्वोत्तानासन, मंडूकासन बॉडी को बनाएंगे लचीला, वजन करेंगे कम

योग एक्सपर्ट सविता यादव संग सीखें योग

योग एक्सपर्ट सविता यादव संग सीखें योग

Yoga Session By Savita Yadav- योग का अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. सविता यादव ने ग्रीवा शक्ति विकासक क्रिया, पश्चिमोत्तानासन, पूर्वोत्तानासन, शशकासन, उष्ट्रासन, मंडूकासन, मकरासन और तिर्यक भुजंगासन करना सिखाया.

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  • Last Updated: March 27, 2021, 9:55 AM IST
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Yoga Session By Savita Yadav- योग एक्सपर्ट सविता यादव ने लाइव योग सेशन (Live Yoga Session) में आज बॉडी को रिलैक्स करने वाले और हेल्दी रखने वाले कई योगासनों के बारे में बताया गया. इसके आलावा कुछ प्राणायाम भी बताए गए जो कमर दर्द में आराम तो दिलाते ही हैं साथ ही बॉडी को फिट और हेल्दी रखने में मदद भी करते हैं. इन अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग का अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. सविता यादव ने ग्रीवा शक्ति विकासक क्रिया, पश्चिमोत्तानासन,

पूर्वोत्तानासन, शशकासन, उष्ट्रासन, मंडूकासन, मकरासन और तिर्यक भुजंगासन करना सिखाया.

ग्रीवा शक्ति आसन:

इस योग क्रिया को करने के लिए अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. जो लोग खड़े होकर इस क्रिया को करने में असमर्थ हैं वे इसे बैठकर भी कर सकते हैं. जो जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. कंफर्टेबल पोजीशन में खड़े होकर हाथों को कमर पर टिकाएं. शरीर को ढीला रखें. कंधों को पूरी तरह से रिलैक्स रखें. सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर लेकर आएं. चिन को लॉक करने की कोशिश करें. जिन लोगों को सर्वाइकल या गर्दन में दर्द की समस्या हो वह गर्दन को ढीला छोड़ें चिन लॉक न करें. इसके बाद सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लेकर जाएं.
पश्चिमोत्तानासन:

पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.





पश्चिमोत्तानासन के फायदे

तनाव दूर करने में फायदेमंद

पेट की चर्बी दूर करने में मददगार

हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर

बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद

अनिद्रा की समस्या को दूर करता है

पूर्वोत्तानासन :

पूर्वोत्तानासन का नाम दो शब्दों के मेल से बना है पूर्व और उत्तान .ये आसन रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है है और कमर दर्द को दूर करने में सहायक है.

पूर्वोत्तानासन को करने का तरीका:

पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाते हुए बैठें, पैरों को साथ में रखें, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें. हथेलियों को जमीन पर रखें,कमर के पास या कन्धों के पास, उंगलियों के सिरे शरीर से दूर, बाजुओं को सीधा रखें. पीछे की ओर झुकें और हाथों से शरीर के वजन को सहारा दें. सांस भरें , पेट के निचले हिस्से हो ऊपर उठाएं, शरीर को सीधा रखें. घुटनो को सीधा रखें, पैर को जमीन पर टिकाएं, पंजो को जमीन पर रखें , याद रखें तलवा जमीन पर ही रहेगा,सिर को ज़मीन की ओर पीछे जाने . ऐसे ही सांस लेते रहें. सांस छोड़ें और वापस आएं.

शशकासन:

शशक का मतलब खरगोश. इस आसन में खरगोश की तरह बैठना होता है. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठा लें. कंधों को कानों से सटाएं. फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, श्वास बाहर निकालते हुए हथेलियां को भूमि पर टिका दें. फिर माथा भी भूमि पर टिका दें. कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर पुनः वज्रासन की स्थिति में आ जाइए. यदि आपके पेट और सिर में कोई गंभीर समस्या हो तो यह आसन नहीं करें.

फायदे: यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करता है. इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन भी दूर हो जाते हैं.

उष्ट्रासन:

उष्ट्र से तात्पर्य ऊंट से है. इस आसन को करने ले लिएअपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें.

घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आसमान की तरफ हो.

सांस लेते हुए मेरुदंड को खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है.

गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें

इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे.

सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं.

हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं.

मंडूकासन :

मंडूकासन में आपको अपने शरीर को ऊपर की ले जाते हुए मेंढक की मुद्रा में आना होता है. इसे करते वक्त लोगों को वज्रासन मुद्रा में बैठना होता है और फिर दोनों घुटनों को फैलाना होता है. फिर दायां हाथ उठाकर हथेली को बाएं कंधे के पीछे और बाएं हाथ उठाकर दाएं कंधे के पीछे लगाना होता है. इस तरह गर्दन व कमर को सीधा रखते हुए श्वांस को स्थिर रखकर ये योगासन किया जाता है. मंडूकासन को करने की कई अलग विधियां भी होती हैं.

मंडूकासन के फायदे

-मंडूकासन वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है.

-मंडूकासन कंधों और हाथों की ज्वाइंट्स को हेल्दी रखने में मदद करता है

-मंडूकासन कंधे और पेट की मांसपेशियों को टोन करने में मदद करता है.

-अगर आपको पेट में गैस, कब्ज और अपच है, तो मंडूकासन फादेमंद है.

मकरासन :

मकरासन करने के लिए पेट के बाल लेट जाएं. सिर और कंधों को ऊपर उठाएं और ठोड़ी को हथेलियों पर और कोहनियों को ज़मीन पर टिका लें. रीढ़ की हड्डी में अधिक मोड़ लाने के लिए कोहनियों को एक साथ रखें (ध्यान रहे ऐसा करने में दर्द ना हो). गर्दन पर अतिरिक्त दबाव हो तो कोहनियों को थोड़ा अलग करें. अगर कोहनियां ज़्यादा आगे होंगी तो गर्दन पर अधिक दबाव पड़ेगा, शरीर के करीब होंगी तो पीठ पर अधिक दबाव पड़ेगा. पूरे शरीर को हल्का छोड़ दें और आंखें बंद कर लें. इससे पेट ठीक होगा.

तिर्यक भुजंगासन:

पेट के बल लेटें और हाथों को कन्धों के पीछे फर्श पर रखें. पैर थोड़ी दूर हों और पंजे फर्श पर मुड़े हुए हों. ऐसाकरते हुए कूल्हों को फर्श की तरफ दबायें. धड़ को बाजुओं की सहायता से ऊपर उठायें. ऊपर देखें. धीरे-धीरे आसन करते हुए सिर को और धड़ को दाईं ओर घुमायें और दायें कंधे पर से बाईं एड़ी को देखें. ऐसा करते हुए पीठ को फिर बीच की ओर मोड़ें और ऊपर की ओर देखें. ऐसा करते हुए धीरे-धीरे शुरूआती स्थिति में वापस आ जाएं. ऐसा ही दूसरी तरफ भी करें.
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