जब नेता वोट मांग रहे थे तो वो औरतों के बारे में क्या कह रहे थे?

Lok sabha election 2019: आप औरत हैं. आप इस वक्‍त ये पढ़ रही हैं. आप उस दिन वोट डालने भी गई थीं. लेकिन आपको ये पता होना चाहिए कि आपके बारे में किसी ने बात नहीं की थी...

Bhagya Shri Singh | News18Hindi
Updated: May 22, 2019, 11:05 AM IST
जब नेता वोट मांग रहे थे तो वो औरतों के बारे में क्या कह रहे थे?
जब नेता वोट मांग रहे थे तो वो औरतों के बारे में क्या कह रहे थे?
Bhagya Shri Singh | News18Hindi
Updated: May 22, 2019, 11:05 AM IST
Lok sabha election 2019: इस रविवार को मतदान के आखिरी चरण के साथ भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्‍सव समाप्‍त हो गया. अब गुरुवार को नतीजों का इंतजार है. पिछले साल के मुकाबले इस साल महिला वोटरों की संख्‍या में बढ़ोत्‍तरी तो हुई, लेकिन अभी भी ये आंकड़ा बराबरी पर नहीं पहुंचा है. अंतिम आंकड़े आने बाकी हैं. चुनाव में वोट देने वाली महिलाओं की संख्‍या तो मर्दों के बराबर नहीं हुई, चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्‍या भी मर्दों के बराबर नहीं थी. सिर्फ 11.2 फीसदी महिला उम्‍मीदवार चुनाव मैदान में थीं. आप एक औरत हैं. आपकी नौकरी, बराबर काम की बराबर तंख्‍वाह, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा, आपकी जिंदगी से जुड़े बहुत बुनियादी सवाल हैं. अगर आपने डेढ़ महीने से ज्‍यादा चले इस पूरी चुनावी कदमताल पर गौर करें हो तो क्‍या याद आता है? नेता जब अपनी चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे थे तो उन्‍होंने कितनी बार आपकी शिक्षा, सुरक्षा, नौकरी की बात की? कितनी बार उन्‍होंने कहा कि महिलाओं की जिंदगी के सवाल इस चुनाव के सवाल हैं? कितनी बार घोषणापत्रों और भाषणों में आपका जिक्र हुआ? कुछ याद आता है? नहीं न, क्‍योंकि किसी भी नेता ने आपके बारे में बात नहीं की. चुनाव शुरू होने से पहले एकमात्र राज्‍य उड़ीसा ने औरतों की बात की और कहा कि हम 33 फीसदी सीटों पर महिला उम्‍मीदवार खड़े करेंगे. बाकी कोई नहीं बोला. बिहार की चुनावी सभाओं में किसी ने मुजफ्फरपुर के शेल्‍टर होम में लड़कियों के साथ हुए रेप और हत्‍या की घटना का जिक्र तक नहीं किया.

क्‍या ये सुनकर आपको ऐसा लग रहा है कि नेता आपके बारे में कुछ बोले ही नहीं. नहीं, ये सच नहीं है. औरतों के बारे में वो बोल तो लगातार रहे थे. केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि मायावती को अब शादी कर लेनी चाहिए. बिना शादी किए उन्‍हें कैसे पता होगा कि घर-परिवार क्‍या होता है. पति को कैसे संभालते हैं. स्‍मृति ईरानी, प्रियंका गांधी के लिए बोलीं कि वो तो अपने पति से ज्‍यादा मेरा नाम लेती हैं. जाहिर था, चुनाव के मैदान में अपने पति का नाम थोड़े न जपती फिरेंगी. मर्दों का औरतों पर बोलना यहीं नहीं रुका. दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी की उम्‍मीदवार अतिशी मार्लेना पर बोले तो सिर्फ चरित्र की बात. उनके काम पर एक शब्‍द नहीं. आजम खान बोले तो जया प्रदा के अंडरवियर का रंग बताने लगे.

लब्‍बोलुआब ये कि जिस देश में चुनाव हो रहा था, उस देश की 49 फीसदी आबादी औरतें हैं. यूएन की सूची में महिला सुरक्षा और जेंडर बराबरी के मामले में भारत का नंबर दुनिया के 120 देशों के बाद आता है. एनसीआरबी के सरकारी आंकड़े का ग्राफ बता रहा है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा में इजाफा हुआ है. जेंडर पे गैप बढ़ रहा है. नौकरी में औरतों की हिस्‍सेदारी वक्‍त के साथ बढ़ने की बजाय कम हुई है. लेकिन इनमें से कोई भी मुद्दा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्‍सव का सबसे बड़ा तो छोडि़ए, सबसे छोटा मुद्दा भी नहीं था. आप औरत हैं. आप इस वक्‍त ये पढ़ रही हैं. आप उस दिन वोट डालने भी गई थीं. लेकिन आपको ये पता होना चाहिए कि आपके बारे में किसी ने बात नहीं की थी.

ये सूरत कैसे बदलेगी, वो अलग लेख का विषय है. लेकिन अभी तो सबसे बड़ा सवाल ये है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.

ये भी पढ़ें -

कपड़े उतारे मर्द, शर्मिंदा हों औरतें
Domestic violence: इसलिए महिलाएं रोज मारपीट, गाली-गलौज को करती रहती हैं बर्दाश्त
Loading...

प्यार की तलाश में हैं लोग! क्या शादी से उठ गया है विश्वास?
मर्दाना कमज़ोरी की निशानी है औरत को 'स्लट' कहना
अरे भई, आप इंसान हैं या फेसबुक पोस्ट ?
फेसबुक के मुहल्ले में खुलती इश्क़ की अंधी गली
आंटी! उसकी टांगें तो खूबसूरत हैं, आपके पास क्‍या है दिखाने को ?
इसे धोखाधड़ी होना चाहिए या बलात्कार?
'पांव छुओ इनके रोहित, पिता हैं ये तुम्हारे!'
देह के बंधन से मुक्ति की चाह कहीं देह के जाल में ही तो नहीं फंस गई ?
स्‍मार्टफोन वाली मुहब्‍बत और इंटरनेट की अंधेरी दुनिया
कितनी मजबूरी में बोलनी पड़ती हैं बेचारे मर्दों को इस तरह की बातें
मर्द की 4 शादियां और 40 इश्‍क माफ हैं, औरत का एक तलाक और एक प्रेमी भी नहीं
'वर्जिन लड़की सीलबंद कोल्ड ड्रिंक की बोतल जैसी'- प्रोफेसर के बयान पर पढ़ें महिला का जवाब
इसलिए नहीं करना चाहिए हिंदुस्‍तानी लड़कियों को मास्‍टरबेट
क्‍या होता है, जब कोई अपनी सेक्सुएलिटी को खुलकर अभिव्यक्त नहीं कर पाता?
ड्राइविंग सीट पर औरत और जिंदगी के सबक

'वीर जवानों, अलबेलों-मस्तानों के देश' में सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं महिलाएं
दिल्ली आने वाली लड़कियों! तुम्हारे नाम एक खुली चिट्ठी...
मेड इन चाइना सेक्स डॉल है... कितना चलेगी ?
फेसबुक से हमारे दोस्त बढ़े हैं.. फिर हम इतने अकेले क्यों हैं?


लाइफस्टाइल, खानपान, रिश्ते और धर्म से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए ट्रेंड्स से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: May 22, 2019, 7:20 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...