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एसिड अटैक ने छीनी आंखों की रोशनी, हॉस्पिटल में मिला जीवन साथी

Farha Fatima | News18Hindi
Updated: November 9, 2017, 4:00 PM IST
एसिड अटैक ने छीनी आंखों की रोशनी, हॉस्पिटल में मिला जीवन साथी
प्रामोदिनी रॉल और सरोज साहू
Farha Fatima | News18Hindi
Updated: November 9, 2017, 4:00 PM IST
इश्क चेहरे से नहीं होता. इस अफसाने को प्रामोदिनी रॉल और सरोज साहू ने उदाहरण में बदल दिया है. 15 साल की उम्र में प्रामोदिनी को एक पैरामिलिट्री सोल्जर ने शादी के लिए प्रपोज किया. उन्होंने इनकार किया तो उनपर तेज़ाब फेंक दिया. इस हादसे में ओडिशा की प्रामोदिनी का चेहरा पूरा जल गया और वे दोनों आंखों की रोशनी खो बैठीं. प्रामोदिनी ने hindi.news18.com से बात की.

बकौल प्रामोदिनी, एसिड अटैक के बाद मैं चार सालों तक हॉस्पिटल के बेड पर, 9 महीने तक ICU में रही. वह मेरी ज़िंदगी का सबसे दर्द भरा दौर था. शादी और प्यार का मुझे कभी ख़्याल तक नहीं आया था.

सरोज से मुलाक़ात के बाद मैंने जाना प्यार के लिए चेहरे की बनावट और शरीर का चिकना होना मायने नहीं रखता. मैंने प्यार का मतलब शारीरिक जरुरत जाना था, पर सरोज के साथ ने बताया प्यार आत्मा से होता है, चेहरे से नहीं.

बकौल प्रामोदिनी, मैं से ये कहना चाहती हूं कि प्यार करो तो आत्मा से, मन से करो. चेहरे से नहीं.

प्रामोदिनी 2016 से एक कैफे में काम करती थी. फिलहाल वे दिल्ली के स्टॉप एसिड अटैक कैंपेन के तहत मैनेजमेंट और डायरेक्टर का कम सीख रही हैं. उनकी एक महीने की कमाई 15000 रुपए है. सरोज ओडिशा में मेडिकल फील्ड में वर्किंग हैं. वे उनसे मिलने दिल्ली आते रहते हैं.

सरोज की एक सबसे प्यारी बात शेयर करने पर प्रामोदिनी खिलखिला के हंसकर कहती हैं, उनकी एक बात बताने के लिए तो सोचना पड़ेगा, क्योंकि उनकी हर नई बात पिछली वाली से ज्यादा प्यारी होती है. वे कहती हैं, सरोज की मौजूदगी में कुछ ऐसा है कि मैं ही नहीं मेरी सहकर्मी भी उसके साथ महफ़ूज़ महसूस करती हैं. वह सबसे दुलार भरा बर्ताव करते हैं.



प्रादोमिनी कहती हैं, मैं एक खुशी की बात बताना चाहती हूं. ओडिशा समेत भारत के तमाम बड़े हॉस्पिटल्स में दिखाने के बाद भी आंखों में बीनाई की कोई किरण नज़र नहीं आई. फिर 1 जुलाई 2017 को कैंपेन के ज़रिए उनकी बाईं आंख के तीन और ऑपरेशन हुए. जो सुहब से शाम तक चले, उस दौरान बाईं आंख का ट्रांसप्लांट हुआ. उसके बाद आंख में 20% रौशनी आई. वे उस बीनाई से सारा संसार देखती हैं.

प्रादोमिनी कहती हैं, मैं ऑपरेशन से पहले काफी डरी हुई थी. मैंने अपने कैंपेन के डायरेक्टर आलोक दीक्षित से अपना डर शेयर किया. उन्होंने कहा, ये क्यों सोचते हो कि रौशनी नहीं आएगी. अच्छा सोचोगे तो अच्छा होगा. अपनी आंखो से फिर से दुनिया देख पाना मेरे लिए सबसे बड़ा ख़्वाब था, जो अब हकीकत बन चुका है.

हादसे के बाद
प्रादोमिनी के चेहरे की सर्जरी शुरू हुई. डॉक्टर्स ने ग्राफ्टिंग (ट्रीटमेंट) के लिए उनकी टांग से स्किन ली, लेकिन इंफेक्शन की वजह से टांग का ट्रीटमेंट हुए बगैर ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.

इन्फेक्टेड टांग के ट्रीटमेंट के दौरान हॉस्पिटल में ही वह अपनी नर्स के एक दोस्त सरोज कुमार साहू से मिलीं. डॉक्टर्स ने प्रामोदिनी की मां को बताया कि उन्हें फिर से चल सकनेमें कम से कम चार साल लगेंगे. सरोज ने उनकी मां को देखा तो वे रो-रोकर अपना आपा खो चुकी थीं. उन्होंने प्रामोदिनी की मां को सांतवना दी और मदद करने की इजाजत मांगी.



सरोज और प्रामोदिनी के बीच शुरुआत में कोई बातचीत नहीं हुई. फिर वे रोज़ाना हॉस्पिटल जाकर उन्हें हिम्मत देते. आखिरकार, सरोज ने अपनी नौकरी छोड़ी और लगातार 8-8 घंटों तक प्रामोदिनी की देखभाल करने लगे. दोनों ने साथ में खूब सारा वक्त बिताना शरू किया तो प्यार हुआ.



प्रामोदिनी के मन में रिलेशनशिप में जाने को लेकर झिझक थी. फिर सरोज ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया. प्रामोदिनी का मन उनसे कह चुकी था कि सरोज के सूकून भरे साथ के अलावा इस जहां में कोई ऐसा कोना नहीं था जहां वे रह सकतीं है.

प्रामोदिनी जैसी हैं, सरोज उन्हें उसी रूप में चाहते हैं. वे उन्हें हर दिन ज़िंदगी को ख़ुशी से जीने की प्रेरणा देते है. सरोज, प्रामोदिनी का ही हिस्सा बन गए. वे कहती हैं, अगर वह मेरी ज़िंदगी का हिस्सा न हो तो मैं दुनिया नहीं देख पाऊंगी.

प्रामोदिनी नई दिल्ली में, सरोज ओडिशा में रहते हैं. वे शादी करने के लिए प्लान कर रहे हैं. शादी से पहले कुछ और सर्जरीज के इंतजार में हैं. कानून प्रोमोदिनी को न्याय देने में असफल रहा लेकिन उन्होंने अपने प्रेमी के साछ उजले भविष्य का चैप्टर लिख लिया है.

प्रामोदिनी का निक नेम रानी है और वे कहती हैं सरोज हर लम्हा उन्हें परीयों जैसा महसूस कराते हैं. प्रामोदिनी फेसबुक पर Rani Rituparna Saa के नाम से हैं. 



 

प्रामोदिनी-सरोज ने अपनी कहानी एक अंग्रेजी अखबार के साथ भी शेयर की है. उनकी तस्वीरें फोटोग्राफर नीरज गेरा ने (अंग्रेजी अखबार के लिए) ली हैं. ये तस्वीरें Ranya City / شاری ڕانیه‎  नाम के फेसबुक पेज पर भी शेयर की गई हैं.
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