मेड इन चाइना सेक्स डॉल है... कितना चलेगी ?

सेक्‍स डॉल आने से झंझट ही खत्‍म. फेमिनिज्‍म का ‘फ’ नहीं पता होगा. मेरा अधिकार, मेरा स्‍पेस, मेरी खुशी, मेरा जीवन, मेरा फैसला– वो ये सब नहीं बोलेगी. वो गोरी भी होगी, आज्ञाकारी भी होगी, सुंदर भी होगी, कानून भी नहीं पढ़ाएगी, नखरे भी नहीं दिखाएगी. सुबह भजन सुनाएगी और रात में सनी लिओनी हो जाएगी

Manisha Pandey
Updated: August 29, 2018, 6:01 PM IST
मेड इन चाइना सेक्स डॉल है... कितना चलेगी ?
चायनीज सेक्‍स डॉल
Manisha Pandey
Updated: August 29, 2018, 6:01 PM IST
चीनी कम्पनी डब्‍ल्यूएमडॉल सेक्स डॉल बनाती है. उसके डायरेक्‍टर दांग्यू यांग ने एक बार एक इंटरव्‍यू में कहा था, “ये सेक्‍स डॉल पत्‍नी और गर्लफ्रेंड की जगह ले सकती है. इसके बाद उनकी जरूरत नहीं रह जाएगी.” आप इस फैक्ट्री की तस्वीरें यहां देख सकते हैं.

वैसे औरतों से परेशान औऱ जलकुकड़े मर्दों की कमी नहीं है दुनिया में. कल ही ख़बर आई कि डेढ़ सौ मर्दों ने अपनी औरतों से मुक्ति पाने के लिए बनारस जाकर गंगा में डुबकी लगाई. उन्‍होंने ऐसा नारियों के नारीवाद से तंग आकर किया था. उनका नारा था- “नारीवाद के जहर से पुरुष और परिवार को बचाओ.”

ये मर्द तो बेचारे शरीफ थे. कुछ तो दिल टूटने और अपमानित महसूस करने पर चेहरों पर तेज़ाब भी फेंक देते हैं.

क्या अपनी बीवियों और औरतों से तंग ये मर्द इस चीनी गुड़िया के साथ खुश रहेंगे. वह सवाल करने और बराबरी का हक़ मांगने के अलावा वह सब करेगी, जो मर्द उसके साथ करना और करवाना चाहेंगे. ऐसे मर्दों का एक बड़ा मार्केट है. दुनिया भर में ऐसे ही मर्द इस चीनी कम्पनी के टारगेट ग्रुप हैं. ये चीनी गुड़िया दिखने में असली औरत जैसी लगती है. उसका चेहरा, बाल, नाखून, हाथ, पैर और चिकनी त्‍वचा है. वो फेमिनिस्‍ट भी नहीं है, न उसके नखरे उठाने हैं, न ही ताने सुनने हैं.



अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में एक फुली लोडेड सेक्स डॉल की कीमत तकरीबन 2 लाख रु. बताई जा रही है.

मर्दों के बीच ये डॉल कितनी पॉपुलर हुई? जवाब इन आंकड़ों में है. डब्‍ल्यूएमडॉल के मुताबिक दुनिया में सेक्‍स डॉल का बिजनेस 2.9 बिलियन डॉलर का है. कंपनी का दावा है कि 2020 तक ये बिजनेस 9.01 बिलियन डॉलर का हो जाएगा. कंपनी अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए बोलने वाली डॉल भी बना रही है. वो आपसे बात करेगी, “हे बेबी, आय लव यू.” हालांकि ये डॉल अभी अंग्रेजी और चायनीज में ही आय लव यू बोल रही है. अगर अपने मुल्क़ के बांके बहादुर चाहेंगे तो उनकी मादरी ज़ुबान भी वो सीख ही लेगी. वैसे ही कुछ को मंदारिन भी आने लगेगी और कुछ की अंग्रेजी बेहतर होने लगेगी.
हो सकता है, देश की मादा नागरिकों का देह उत्पीड़न, यौन शोषण और बलात्कार भी इस गुड़िया की बदौलत कम हो जाए. एक अदद सेक्‍स डॉल रातोंरात मर्दों की जिंदगी के सौ दुख दूर कर देगी. न्‍यायालयों में मुकदमों की संख्‍या कम हो जाएगी. 498 ए कानून ही खत्‍म हो जाएगा. मेरिटल रेप के सवाल पर दस साल से बहस हो रही है. कोर्ट भी आज तक तय नहीं कर पाया कि पति बिस्‍तर पर जबर्दस्‍ती करे तो रेप होता है कि नहीं होता है. कभी कहता है होता है, कभी कहता है नहीं होता है.

सड़क पर लड़कियों का चलना और घर पर मां-बाप का अपना ब्लड प्रेशर बढ़ाना कम होगा.



सेक्‍स डॉल आने से झंझट ही खत्‍म क्‍योंकि वो कभी ना तो करेगी नहीं. बस बैटरी चार्ज होनी चाहिए. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अपने हाथ में है. वो वही कहेगी जो हम उससे कहलवाएंगे. चाहेंगे तो वह गुड़िया भारतीय भाषाएं जल्दी ही सीख लेगी क्योंकि वह आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस और कम्पयूटर से चलती है, और उसके लिए संस्कृत सबसे मुफीद कही जाती रही है.

उसको फेमिनिज्‍म का ‘फ’ नहीं पता होगा. मेरा अधिकार, मेरा स्‍पेस, मेरी खुशी, मेरा जीवन, मेरा फैसला– वो ये सब नहीं बोलेगी. वो सिर्फ आय लव यू बेबी, यू आर सो गुड, आह-ऊह, डू इट मोर, यही सब बोलेगी. गोरी भी होगी, आज्ञाकारी भी होगी, सुंदर भी होगी, कानून भी नहीं पढ़ाएगी, नखरे भी नहीं दिखाएगी. सुबह भजन सुनाएगी और रात में सनी लिओनी हो जाएगी.

वैसे दांग्यू यांग इतने में बाज नहीं आ रहा. फजीता तो अब खड़ा होगा, जब उनकी कम्पनी औरतों के लिए सेक्स गुड्डे बनाने वाली है. हालांकि पिछले इंटरव्‍यू की तरह उन्‍होंने ये नहीं कहा कि ये पुरुष डॉल पति और ब्‍वॉयफ्रेंड की जगह लेने के लिए है. मर्दों की जगह कौन ले सकता है भला. उनकी जगह हर जगह सुरक्षित है. जाहिर है, इस तरह की बात से भारत समेत कई देशों की इज्ज़त और आबरू और मर्दानगी को ख़तरा पैदा होगा. जब किन्से नाम के वैज्ञानिक ने अमरीका में दुनिया का पहला साइंटिफिक सेक्स सर्वे किया तो उसका व्यापक स्‍तर पर स्वागत हुआ और समर्थन भी किया गया. पर जब वह सर्वे अमेरिका की औरतों के सेक्सुअल बिहेवियर को लेकर हुआ तो वहां के सामाजिक ठेकेदारों और चर्च को बहुत मिर्च लगी.



भारत तो अमेरिका से काफी ज्यादा संस्कार वाला देश है. हम तो टच को लेकर इतने टची हैं कि भारतीय पेटेंट ऑफिस ने औरतों के लिए बनाए गए एक अदने से वाइब्रेटर तक को अनुमति देने से इनकार कर दिया. औरतों के क्लिटॉरिस से लेकर उनकी वेजाइना और उसे खुशी देने के लिए बनाया गया औजार तक अनैतिक है. औरतें अपने आप में ही अनैतिक हैं.

कैरेक्टर बचाना जरूरी है. हालांकि बाकी माल की तरह ये डॉल भी चीनी है, पता नहीं कितना चलेगी. पर शायद उसके बहाने ही आदमी और औरत उस बगीचे में सांप और इच्छा के सेब को किनारे रख सकेंगे. हम मशीनों में मनुष्य की कल्पना कर सकेंगे और उनसे अंतरंग रिश्ते बना सकेंगें. जैसे पांच ऑस्‍कर के लिए नॉमिनेट हो चुकी फिल्म 'हर' में उस हीरो का दिल तब टूटकर बिखर जाता है, जब उसे पता चलता है कि जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाली समांथा से वह फोन पर अंतरंग हो रहा है, वह उसी समय करीब 36000 मर्दों का दिल बहला रही है.

विज्ञान की बदौलत ये मुमकिन हो पाएगा कि हमारे संबंध एक से हों, हम प्यार किसी और से करें और बच्चा कहीं और पैदा करें. दुनिया में ख़ालिस घी की तरह वासना मुक्त प्रेम का पदार्पण होगा. और नई तरह के प्रेम गीत लिखे जाने लगेंगे, शुगर फ्री मिठाइयों की तरह.
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