फेसबुक के मुहल्ले में खुलती इश्क़ की अंधी गली

ये जो फिक्र है, ये बेकरारी, ये बेसब्री, ये उम्मीद, ये इंतजार. टिंडर पर ये सब नहीं है. वहां किसी ने किसी की ओर दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाया, न किसी को किसी का इंतजार है. वहां एक सेकेंड भी नहीं लगता राइट या लेफ्ट स्वाइप करने में.

Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: May 7, 2019, 11:29 AM IST
फेसबुक के मुहल्ले में खुलती इश्क़ की अंधी गली
दुनिया ऑनलाइन डेटिंग की
Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: May 7, 2019, 11:29 AM IST
इस वक्त, जब आप ये आर्टिकल पढ़ रहे हैं, पूरी दुनिया में 2.7 अरब लोग फेसबुक पर हैं और उसमें से 2.3 अरब लोग इस वक्त सक्रिय हैं.

कोई किसी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहा है, कोई अपने पसंदीदा लेख या म्यूजिक का लिंक पोस्ट कर रहा है, कोई किसी को इनबॉक्स में प्रपोज कर रहा है तो कोई अपने भेजे मैसेज के जवाब का इंतजार. किसी ने किसी की पोस्ट पर अभी-अभी दिल का निशान बनाया है तो कोई उस लड़की को ढूंढ रहा है, जो कभी स्कूल में साथ पढ़ती थी. दुनिया के 2.3 अरब लोग इस वक्त उस वर्चुअल दुनिया में अपने होने का अर्थ ढूंढ रहे हैं, जिसका नाम है ‘फेसबुक.’

और इस बीच फेसबुक नई तैयारियों में जुटा है. आपकी फ्रेंडलिस्ट फेसबुक के लिए काफी नहीं. उसे तलाश है आपके लिए उस खास साथी की, जो आपका सीक्रेट क्रश है.

इसके लिए फेसबुक ने एक नया फीचर बनाया है ‘सीक्रेट क्रश.’ फेसबुक का नया डेटिंग ऐप. अभी तक ये फीचर कोलंबिया, थाइलैंड, कनाडा, अर्जेंटीना और मैक्सिको में ही था. अब 14 और देशों में शुरू होने जा रहा है. भारत भी लिस्ट में है. जल्दी ही आएगा नंबर.

पूरी दुनिया में युवा लड़के-लड़कियों के लिए दोस्ती और मुहब्बत का नया ठिकाना है ऑनलाइन डेटिंग. टिंडर, हिंज, आइल, ट्रूली मैडली और हैपेन, ऐसे कई डेटिंग ऐप हैं, जहां रोज हजारों लड़के-लड़कियां एक-दूसरे को राइट और लेफ्ट स्वाइप कर रहे हैं. सेलेक्ट और रिजेक्ट कर रहे हैं, सेलेक्ट और रिजेक्ट हो रहे हैं. ऑफिशियल आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अगस्त में टिंडर के पास 23 करोड़ पेड यूजर्स थे. सिर्फ एक साल पहले 2017 के मुकाबले 81 फीसदी ज्यादा. ये टिंडर की प्रीमियम सर्विस है, जबकि अनपेड यूजर्स की संख्या इससे 19 गुना ज्यादा है. कल्पना कर सकते हैं कि कितने लोग ऑनलाइन डेटिंग में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इस समय अकेले भारत में टिंडर पर रोज 16 करोड़ लोग स्वाइप कर रहे हैं.
ऑनलाइन डेटिंग दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता बिजनेस है, जो 2020 तक 12 अरब डॉलर की इंडस्ट्री बन चुका होगा. फेसबुक के पास पहले ही 2.7 अरब यूजर्स हैं, जो फेसबुक पर सोशल नेटवर्किंग कर रहे हैं और टिंडर पर डेटिंग.

अगर फेसबुक पर ही डेटिंग होने लगे तो वो टिंडर पर क्यों जाएंगे?


लेकिन इसमें एक खतरा है और फेसबुक को इस खतरे का पहले से इलहाम भी. आप टिंडर पर तो हैं, लेकिन वहां आप अपने दफ्तर के सहकर्मियों, दोस्तों और दोस्तों के दोस्तों को राइट स्वाइप नहीं करते. आपके परिवार वालों को भी नहीं पता कि ऐसी किसी ऑनलाइन डेटिंग की दुनिया में आपकी भी आवाजाही है. फेसबुक पर तो सब दोस्त, दोस्तों के दोस्त और रिश्तेदार भी एक-दूसरे को देख रहे हैं. तो क्या आप अपने फेसबुक दोस्तों के साथ डेट पर जाने वाले हैं?

पता नहीं, ये कब और कैसे हुआ कि प्यार और डेटिंग असल जिंदगी से बाहर वाली कोई चीज हो गई. रिअल फ्रेंड्स अलग हैं और डेटिंग फ्रेंड्स अलग. इसलिए फेसबुक ने वादा किया है कि न आपके फेसबुक के दोस्तों, न रिश्तेदारों, न मम्मी-पापा को पता चलेगा कि आप डेटिंग की दुनिया में क्या गुल खिला रहे हैं. दोनों अलग रहेंगे. रिअल लाइफ और डेटिंग लाइफ.

ये हमारी सीक्रेट डेटिंग लाइफ में फेसबुक का नया योगदान होगा.

फर्ज करिए कि ये डेटिंग एप एक बड़ा सा शहर है और उस शहर में ढेर सारे लड़के-लड़कियां, औरत-मर्द सब हैं. सबको तलाश है एक अदद साथी की. सिर्फ उन्हें ही नहीं, जो सिंगल हैं. उन्हें भी जो शादी में बंधकर या बिना बंधे ही किसी के साथ हैं. ये सारे लोग जीवन में कुछ और एडवेंचर ढूंढ रहे हैं. लड़के को जो लड़की पसंद आती है, वो उसे राइट स्वाइप करता है. अगर लड़की ने भी सैकड़ों प्रोफाइल से गुजरते हुए आपको पसंद किया और राइट स्वाइप किया तभी मैच होगा. वरना आपको पता भी नहीं चलेगा कि कितने लोगों ने इस वर्चुअल संसार में आपकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था. और कितने आपको रिजेक्ट करके चलते बने. जब आप 20 लोगों को राइट स्वाइप करते हैं और उसमें से सिर्फ एक ही मैच होता है, तभी जाकर कहीं ये पता चल पाता है कि 19 लोग आपको देखकर भी अनदेखा कर गए.

जिसने अनदेखा किया, उसका स्मृति में कोई ठीक-ठीक नाम और चेहरा भी नहीं, लेकिन कितने लोगों से मैच हुआ और कितने स्टार मिले, इससे आपका सेल्फ वर्थ तो तय हो ही रहा है.



2012 में टिंडर पहली बार भारत आया. गिनती के लोग हुआ करते थे तब. आज सात साल बाद भी अगर आप बलिया, आरा-छपरा और बेगूसराय में बैठे हैं तो भूल जाइए कि आपको टिंडर पर कोई लड़की मिलेगी. एक बार मैंने इलाहाबाद में इसे चलाने की कोशिश की. सिर्फ दो लड़कियां मिलीं और 73 लड़के. उन दो लड़कियों ने भी शायद ही उन 73 लड़कों में से किसी को राइट स्वाइप किया होगा या घरवालों से छिपकर उनसे मिलने गई होंगी. टिंडर इंडिया का पिछले साल का आंकड़ा कहता है कि उनके 92 फीसदी एक्टिव यूजर्स दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बैंगलुरू और पुणे में हैं.

अगर टिंडर का भविष्य महानगरों में रौशन है तो यहां के युवाओं की लव लाइफ भी जरूर उतनी ही रौशन होगी. लव लाइफ का तो पता नहीं, लेकिन सेक्स लाइफ पहले से कहीं ज्यादा आजाद हुई है. टैबू टूट रहे हैं, शादी की उम्र खिसक रही है. लोग हाथ में एक फोन लेकर हर वक्त दुनिया से कनेक्टेड हैं, लेकिन अपनी निजी जिंदगियों में बहुत अकेले. अकेले को एक साथी की तलाश थी तो ऑनलाइन डेटिंग ने साथी का पूरा बाजार ही दे दिया. इतने सारे हैं, कितने भी चुन लो. लोग चुन रहे हैं. लगातार स्वाइप कर रहे हैं, लगातार साथी बदल रहे हैं. वो दिल टूटने से डरते हैं, इसलिए किसी से दिल जोड़ते भी नहीं. सेक्स की मनाही थी अब तक. अब बहुत सारा उपलब्ध है. हम सदियों के भूखे, चाहते हैं कितना सारा खा लें. सब दौड़ रहे हैं. लेकिन थक-हारकर, घर लौटकर सबको यही लगता है कि उनमें से कोई नहीं कि जिसकी बांहों का तकिया बनाकर सोया जा सके.

एक युवा औसतन दिन में 45 मिनट टिंडर पर बिता रहा है. जेंडर का अनुपात तो ऐसा है कि 68 फीसदी लड़के और सिर्फ 32 फीसदी लड़कियां हैं. अनुपात ही इतना गड़बड़ है कि लड़का तकरीबन हर दूसरी लड़की को राइट स्वाइप कर रहा है और लड़की दस में से आठ लड़कों को लेफ्ट स्वाइप. टिंडर पर होने वाले 70 फीसदी मैच हाय-हलो से आगे नहीं बढ़ते. 40 फीसदी मैच एक मुलाकात में बदलते हैं और वहीं खत्म. कुछ मैच चार-छह मुलाकातों में खत्म हो सकते हैं, लेकिन उससे आगे नहीं. टिंडर पर एक साल से ज्यादा समय से सक्रिय दो फीसदी लोग भी ऐसे नहीं हैं, जिनकी जिंदगी में कोई ऐसा दोस्त या पार्टनर हो, जो उन्हें टिंडर पर मिला.

यहां कोई टिकने के लिए आया भी नहीं है. हालांकि जिंदगी में कहीं जाकर टिकना सब चाहते हैं, लेकिन विकल्प इतने सारे हैं कि उन्हें लगता है कि क्या पता, अगले चौराहे पर इससे बेहतर कुछ उनका इंतजार कर रहा हो. आज शाम टिंडर डेट से लौटा एक लड़का या लड़की जब रात में दोबारा टिंडर खोलते हैं तो एक नया इंटरेस्टिंग प्रोफाइल उनका इंतजार कर रहा होता है. चीज आपके सामने हैं और बिलकुल फ्री. आप अपनी किस्मत आजमाने से खुद को रोक नहीं पाते और राइट स्वाइप कर बैठते हैं.



कभी ऐसा भी हो सकता है कि किसी ठिकाने पर किसी एक का मन टिक जाए तो जरूरी नहीं कि दूसरे का भी टिके ही. लड़का दुखी है कि पिछली रात वो जिस लड़की से मिला था, वो उसे अच्छी लगी. आज रात फिर वो उसी के साथ क्यों नहीं हो सकता. लेकिन लड़की तब तक दूसरे ऑप्शंस की तरफ बढ़ चुकी है. लड़की जिस लड़के से दोबारा मिलना चाहती थी, वो दो नई लड़कियों के साथ अगले वीकेंड की डेट फिक्स करके बैठा है.

ऑनलाइन डेटिंग की इस दुनिया में जितने लोगों ने हमें प्यार, दोस्ती, सेक्स, के लिए चुना, उससे ज्यादा ने रिजेक्ट किया. हमने भी यही किया. अगले ऑप्शन की तलाश में पिछले वाले को रिजेक्ट. हम एक साथ रिजेक्ट करते और होते रहे. पिछले 40 सालों से सिर्फ रिजेक्शन पर रिसर्च कर रहे अमेरिकन साइकॉलजिस्ट रॉय एफ. बॉमिस्टर के मुताबिक रिजेक्शन हमारे दिमाग और शरीर की कोशिकाओं को डैमेज करता है. इसके नतीजे खतरनाक भी हो सकते हैं. मेडिकल साइंस की डीटेल्स में नहीं जाऊंगी. उसके लिए रिजेक्शन पर अलग से पढि़ए. बस इतना समझना काफी है कि हमें कितनों ने स्वीकारा और कितनों ने छोड़ दिया, हमारी खुशी, आत्मविश्वास, भरोसा और हमारा मानवीय व्यवहार इससे काफी हद तक तय होता है. यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सस की एक रिपोर्ट भी कहती है कि टिंडर इस्तेमाल करने वाले युवाओं में डिप्रेशन का अनुपात अन्य लोगों के मुकाबले 19 फीसदी ज्यादा है. वे अपने लुक को लेकर काफी परेशान रहते हैं.

फेसबुक भी अब इस काम में अपनी हिस्सेदारी के लिए तैयार है.

9 साल पहले जब टिंडर नहीं था, डेविड फिंचर ने एक फिल्म बनाई थी- ‘द सोशल नेटवर्क.’ मार्क जुकरबर्ग और फेसबुक की कहानी. ये फिल्म का आखिरी दृश्य है. मार्क फेसबुक के दफ्तर में अपना पेज खोलकर बैठा है और एक लड़की का प्रोफाइल देख रहा है. ये वही लड़की है, जो हार्वर्ड में उसकी गर्लफ्रेंड थी. काफी सोचने के बाद उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजता है और बेसब्र सा स्क्रीन की ओर देखता रहता है.
मार्क को इंतजार है, अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट होने का.

ये जो फिक्र है, ये बेकरारी, ये बेसब्री, ये उम्मीद, ये इंतजार. टिंडर पर ये सब नहीं है. वहां किसी ने किसी की ओर दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाया, न किसी ने किसी का इंतजार किया. वहां एक सेकेंड भी नहीं लगता राइट या लेफ्ट स्वाइप करने में. कोई इतना नहीं सोचता. उसे ये भरोसा भी नहीं कि जिसे अभी-अभी चुना है, वो हमें चुनेगा या नहीं. इसलिए हम अगले और दस लोगों को राइट स्वाइप करते चलते हैं, जो भी पलटकर हमें चुन ले.

न हमने भरोसा दिया, न मांगा. न हाथ बढ़ाया, न थामा. हमने जो साथ बांटा, उसके लिए एक ही वाक्य कहा, "वी हैड ग्रेट टाइम." और घर आकर अनमैच कर दिया. कभी अनमैच होकर उदास हुए, कभी अनमैच करके किसी को उदास किया.

फिर अगला राइट स्वाइप. अगले वीकेंड नई डेट. लेकिन सबकुछ के अंत में हुआ यही कि सब उदास हैं क्योंकि सैकड़ों राइट स्वाइप के बाद भी हर किसी को एक ही चीज का इंतजार है- एक पहचाना हुआ हाथ, एक पहचाना हुआ स्पर्श. सिर्फ एक रात बिताने के लिए नहीं, बल्कि उससे ज्यादा कुछ साथ बांटने के लिए- प्यार, भरोसा, दोस्ती और आश्वस्ति.

ये भी पढ़ें -
आंटी! उसकी टांगें तो खूबसूरत हैं, आपके पास क्‍या है दिखाने को ?
इसे धोखाधड़ी होना चाहिए या बलात्कार?
'पांव छुओ इनके रोहित, पिता हैं ये तुम्हारे!'
देह के बंधन से मुक्ति की चाह कहीं देह के जाल में ही तो नहीं फंस गई ?
स्‍मार्टफोन वाली मुहब्‍बत और इंटरनेट की अंधेरी दुनिया
कितनी मजबूरी में बोलनी पड़ती हैं बेचारे मर्दों को इस तरह की बातें
मर्द की 4 शादियां और 40 इश्‍क माफ हैं, औरत का एक तलाक और एक प्रेमी भी नहीं
'वर्जिन लड़की सीलबंद कोल्ड ड्रिंक की बोतल जैसी'- प्रोफेसर के बयान पर पढ़ें महिला का जवाब
सहमति से बने शारीरिक संबंध लिव-इन टूटने पर बलात्‍कार नहीं हो जाते
इसलिए नहीं करना चाहिए हिंदुस्‍तानी लड़कियों को मास्‍टरबेट
क्‍या होता है, जब कोई अपनी सेक्सुएलिटी को खुलकर अभिव्यक्त नहीं कर पाता?
ड्राइविंग सीट पर औरत और जिंदगी के सबक
'वीर जवानों, अलबेलों-मस्तानों के देश' में सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं महिलाएं
दिल्ली आने वाली लड़कियों! तुम्हारे नाम एक खुली चिट्ठी...
'Lust Stories' के बहाने मन और देह के निषिद्ध कोनों की पड़ताल
मेड इन चाइना सेक्स डॉल है... कितना चलेगी ?
फेसबुक से हमारे दोस्त बढ़े हैं.. फिर हम इतने अकेले क्यों हैं?

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पाससब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...