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Love story: और इस तरह मैरी कॉम को हो गया इस शख्स से प्यार

Love story: और इस तरह मैरी कॉम को हो गया इस शख्स से प्यार

फाइल फोटो

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मेरी कॉम कहती हैं, ''मैं उसे पसंद करने लगी थी. जब रविवार को छुट्टी मिलती तो मैं ऑनलेर से मिलने चल देती, ये ऐसा समय होता था, जब मैं एकदम तनावरहित हो जाती थी, बहुत खुशी महसूस होती थी.''

    ये दिल्ली में वर्ष 2000 के आसपास का समय था. वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन और ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता मेंगटे चुंगनेइजंग मैरी कॉम दो साल से घर से दूर थीं. दिल्ली में बिल्कुल तन्हा. यहां वह बॉक्सिंग की कड़ी ट्रेनिंग ले रही थीं. न ढंग से हिन्दी आती थी और न अंग्रेजी. बहुत कम बोलती थीं. वह मणिपुर के जिस कॉम इलाके की रहने वाली थीं, वहां कोम भाषा प्रचलित थी. अकेलापन बहुत खराब लगता था. कई बार लगता था कि काश दिल्ली में कोई ऐसा हो जो उनकी मदद करे, मार्गदर्शक हो.

    एक दिन जब वह ट्रेनिंग ले रही थीं, तब किसी ने बताया कि कोई उनसे मिलने आया है. विश्वास ही नहीं हुआ कि उनसे मिलने भी आ सकता है. दिल्ली शहर में ये पहली बार था जब कोई उनसे मिलने आया था. ये दो युवक थे, जिसमें एक ऑनलेर थे. एक उनका साथी. मैरी कॉम दोनों में किसी को नहीं जानती थीं. हैरानी के भाव उनके चेहरे पर पसरे हुए थे.

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    उन्हें क्या पता था कि ये अनजानी सी मुलाकात आने वाले सालों में उनकी जिंदगी को बदलने वाली है. ऑनलेर दिल्ली में कॉम-रेम स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष थे. यूनियन दिल्ली में रहकर पढाई करने वाले नार्थईस्ट के छात्रों का ध्यान रखती थी, उनकी मदद करती थी. ऑनलेर इसी उद्देश्य से मेरी से भी मिलने आए थे कि कोम इलाके की इस लड़की को जब मदद की जरूरत पड़े, तो यूनियन उसे सहयोग कर सके.

    फाइल फोटो


    पहली बार वो भाई जैसा लगा था
    मैरी कॉम को उस समय ऑनलेर ज्यादा उम्र के नौजवान लगे थे. उन्हें वह अपने बड़े भाई सरीखे लगे, जो उन्हें लेकर फिक्रमंद था. चलते समय उन्होंने मेरी से कहा, जब भी कोई जरूरत हो तो बेहिचक फोन करें और संपर्क में रहें. मेरी को अच्छा लगा कि चलो अब दिल्ली में कोई तो है जो उनके अपने इलाके का है, उससे मदद ली जा सकती है. इसके बाद दोनों की बातें कभी कभार होने लगीं.

    इस बात ने की दोनों की दोस्ती को मजबूत
    जिस बात ने मेरी और ऑनलेर की दोस्ती को मजबूत किया, वह था उसी दौरान मैरी कॉम के पासपोर्ट का किसी ट्रेन यात्रा में खो जाना. कुछ महीने बाद ही उन्हें एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए पहली बार विदेश जाना था. वह बहुत परेशान हो गईं, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए. ऐसे समय में ऑनलेर ने बहुत मदद की.

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    मणिपुर में पासपोर्ट को दोबारा बनवाने संबंधी औपचारिकताओं से लेकर दिल्ली तक पहुंचाने में वह लगातार कोशिश में लगे रहे. पासपोर्ट हाथ में आने के बाद मेरी को लगा कि इस दुनिया में कोई है, जो उसका बहुत ख्याल रखता है, वह उससे अपनी बातों को बांट सकती है. दोनों में तमाम बातें होने लगीं.

    वो पसंद आने लगा
    वर्ष 2001में मैरी कॉम जब पेनसिल्वेनिया के पहले विदेशी दौरे पर रवाना हुईं तो ऑनलेर ने खूब सपोर्ट किया. जब वह वर्ल्ड चैंपियनशिप से रजत पदक जीतकर लौटी तो बहुत खुश थी. दोनों और करीब आ गए. भावनात्मक तौर पर भी. मेरी कहती हैं, ''मैं उसे पसंद करने लगी थी. मेरी जिंदगी टूर और ट्रेनिंग की व्यस्तताओं में कट रही थी. महिला बॉक्सिंग जितना लोकप्रिय होता जा रहा था, मैं उतनी व्यस्त. जब रविवार को छुट्टी मिलती तो मैं ऑनलेर से मिलने चल देती, ये ऐसा समय होता था, जब मैं एकदम तनावरहित हो जाती थी, बहुत खुशी महसूस होती थी.''

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    ''हमारी पृष्ठभूमि एक जैसी थी, भाषा एक थी. वह वाकई ऐसा शख्स था, जो मेरी सफलता चाहता था. तब ऑनलेर का किसी के साथ लंबे समय से चल रहा रिश्ता टूट गयाा था, उसने ये बात मुझको बताई थी, क्योंकि हम दोनों ही एक दूसरे से बहुत खुले हुए थे, उसी समय उसकी मां का भी निधन हो गया था. वह काफी दुखी था, वापस गांव में परिवार के पास लौटना चाहता था. मैने और उसके पिता ने कहा कि उसे अपनी एलएलबी की पढाई पूरी करनी चाहिए.''

    शादी के प्रस्ताव आने लगे
    बकौल मैरी कॉम, ''वर्ष 2003 में मुझको अर्जुन अवार्ड मिला. इसके बाद घर पर मेरी शादी के प्रस्ताव आने लगे. ढेरों प्रशंसक मुझसे मिलना चाहते थे. इससे अजीब सी स्थितियों में फंस गई. मैने ऑनलेर को इसके बारे में बताया. उसने तुरंत पूछा, मेरी तुम वास्तव में शादी करना चाहती हो? मैं कोई जवाब नहीं दे सकी. शादी मेरे एजेंडे में नहीं थी.

    वो क्या कहना चाहता था
    ऑनलेर को मेरे घर में विवाह के संबंध में आने वाले प्रस्तावों की जानकारी थी और कुछ जानकारियां उसे मिल रही थीं. वह मुझे केवल चिंतित ही नहीं दिखा बल्कि अपसेट भी. मुझे महसूस हुआ कि वह मुझको लेकर ज्यादा जज्बाती होने लगा था. उसे लगता था कि मेरे अभिभावक बिना मेरी मर्जी के कोई भी रिश्ता तय कर देंगे. एक दिन उसने मे्री को फोन किया. ऐसा लगा कि वो मेरी को लेकर फोन पर पसंदगी की बात करना चाहता हो लेकिन कह नहीं पा रहा था. लेकिन मेरी समझ गई कि वह क्या कहना चाहता था.
    ''अब उसकी इन भावनाओं को समझ कर मैं अजीब सी स्थिति में थी. समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं. मैं उससे दूर रहने की कोशिश करने लगी. लंबे समय तक उससे नहीं मिली. जब मुलाकात हुई तो अबकी ऑनलेर ने सीधे सीधे कह दिया कि वो मुझसे प्यार करता है.

    पहली बार की शादी की बात
    मेरी कहती हैं, 'एक दिन वह अकेले आया और कहा, मैं तुम्हारे पेरेंट्स से मिलना चाहता हूं, क्या वो मुझको पसंद करेंगे, अगर मैं उनसे शादी के लिए तुम्हारा हाथ मांगू तो क्या वो सहमत होंगे. निश्चत रूप से ऑनलेर ने शादी की मंशा जाहिर कर दी थी. मैं स्तब्ध रह गई. मैं बीस साल से ऊपर की थी. एक लंबा और सुनहरा करियर मेरे सामने था. क्या मैं शादी के लिए तैयार थी. लेकिन मैं ये भी जानती थी कि मुझे इस जिंदगी में आनलेर जैसा जीवनसाथी नहीं मिल सकता है. मुझको उसे एक जवाब देना था, ताकि वह फिर मेरे माता-पिता से बात कर सके.''

    फोटो- गेटी इमेज


    रिश्ते की राह में परिवारों की अड़चनें
    लेकिन न तो ऑनलेर के पिता इस रिश्ते के लिए तैयार थे और न ही मैरी कॉम के पिता. मेरी कहती हैं, ''मैं अपने पिता के गुस्से को जानती थी. डर रही थी कि कैसे उन्हें ये बात बताऊं. उन्हें ऑनलेर से मेरा रिश्ता सख्त नामंजूर था. आखिरकार वर्ष 2004 में मैं और ऑनलेर मणिपुर गए.''

    वह बताती हैं, ''मैं अपने घर चली गई और वह अपने घर. तय हुआ कि ऑनलेर मेरे पिता से मिलने आएगा. मेरे पिता से उसकी मुुलाकात अच्छी नहीं रही. वह उससे बहुत कड़े ढंग से पेश आए. पिता ने उससे धमकी दी कि वह मेरी की जिंदगी से दूर हो जाए, अन्यथ ठीक नहीं होगा. ऑनलेर ने उन्हें फिर ठंडे तरीके से समझाया. कोई फायदा नहीं हुआ.''

    मेरी के पिता ने किया अपमानित
    मैरी कॉम के पिता ने उसे अपमानित भी किया. घर से निकल दिया. अपने घर में ये ताकीद दी कि किसी भी तरह से ऑनलेर के परिवारवाले घर में घुसने नहीं पाएं. पिता के व्यवहार से मैरी कॉम इतनी आहत और नाराज हुईं कि वह घर से अपना सामान पैक करके इम्फाल में सीधे ऑनलेर के पास पहुंची और कहा-''मुझे अपने माता-पिता की परवाह नहीं, चलो हम शादी कर लेते हैं.''

    चाय पीकर रजामंदी
    ऑनलेर चाहते थे कि शादी परिवारों की सहमति से ही हो. बेटी से घर छोड़ जाने और गुस्से को समझते हुए मेरी के पिता ढीले पड़ने लगे. पहली बार मेरी ने तब सीधे पिता से बात की. आखिरकार वह रजामंद हो गए. अबकी बार जब ऑनलेर के परिवारवालों ने उनके घर आकर परंपरा के अनुसार रिश्ते के लिए उबलती हुई चाय मेरी के पिता को दी तो उन्होंने इसे पी लिया, यानि शादी के लिए सहमति. जबकि इससे पहले वह इससे मना कर चुके थे. ये रिवाज तीन बार होता है और तीनों बार लडक़ी के परिवारवालों को ये चाय पीनी होती है.

    परंपरागत तरीके से शादी
    तीनों बार मैरी कॉम के परिवार से सहमति मिलने के बाद आखिरकार परंपरागत ढंग से दोनों की शादी हुई. अब दोनों की प्यारभरी शादीशुदा जिंदगी में खुशियां ही खुशियां है. साथ में तीन प्यारे से बेटे.
    (मैरी कॉम से बातचीत और उनकी आत्मकथा ''अनब्रेकेबल'' पर आधारित)

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    Tags: Boxing, Love Story, Mary kom, Sports

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