लाइव टीवी

MahalakshmiVrat2019:आज शाम इतने बजे के पहले निपटा लें महालक्ष्मी व्रत की पूजा

News18Hindi
Updated: September 21, 2019, 2:31 PM IST
MahalakshmiVrat2019:आज शाम इतने बजे के पहले निपटा लें महालक्ष्मी व्रत की पूजा
इस व्रत में 16 नंबर का फैक्टर इतना मायने रखता है कि पूजा में ज्यादातर चीजें 16 रखी जाती हैं. जैसे- दो सूप के साथ 16 मिट्टी का दिया, फूल माला, सफेद बर्फी, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 गांठ वाला लाल धागा और 16 सुहाग का सामान आदि

इस व्रत में 16 नंबर का फैक्टर इतना मायने रखता है कि पूजा में ज्यादातर चीजें 16 रखी जाती हैं. जैसे- दो सूप के साथ 16 मिट्टी का दिया, फूल माला, सफेद बर्फी, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 गांठ वाला लाल धागा और 16 सुहाग का सामान आदि

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2019, 2:31 PM IST
  • Share this:
MahalakshmiVrat2019/महालक्ष्मी व्रत 2019: वैसे तो पितृ पक्ष में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, यहां तक की नए कपड़े खरीदना भी, लेकिन इसी बीच पड़ने वाला अष्टमी का दिन काफी शुभ माना जाता है. 16 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष में अष्टमी का दिन सबसे शुभ होता है. इस दिन हाथी पर सवार हुई मां लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा की जाती है. महालक्ष्मी का यह व्रत 16 दिनों तक चलता है. व्रत के आखिरी यानी 16वें दिन इसका समापन किया जाता है. इस बार यह 21 सितंबर को समाप्त हो रहा है. ऐसे में व्रती 21 सितंबर की शाम 08:21 मिनट से पहले तक पूजा पाठ निपटा लें.

इस व्रत में 16 नंबर का फैक्टर इतना मायने रखता है कि पूजा में ज्यादातर चीजें 16 रखी जाती हैं. जैसे- दो सूप के साथ 16 मिट्टी का दिया, फूल माला, सफेद बर्फी, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 गांठ वाला लाल धागा और 16 सुहाग का सामान आदि.

कैसे की जाती है महालक्ष्मी व्रत की पूजा

माना जाता है कि जो भी महिलाएं महालक्ष्मी का व्रत करती हैं उनकी सभी मनोकामनां पूर्ण होती है. परिवार में सुख-शांति, धन व पुत्र की प्राप्ति होती है.

- इस दिन व्रती महिलाएं अपने पूजा घर में एक चौकी की स्थापना करें. उस पर लाल कपड़ा बिछा लें. चौकी पर चंदन से अष्टदल बनाएं और चावल रखकर कलश स्थापित करें.

- मिट्टी से बना हुए हाथी को कपड़े और मालाओं से सजा लें

- अगर आप संपन्न हों तो चांदी का हाथी भी खरीद सकते हैं. इस दिन चांदी के हाथी का विशेष महत्व होता है.
Loading...

- अब वहीं लक्ष्मी की मूर्ति भी रखें. फिर कमल के फूल, माला, सिंदूर आदि से उनकी पूजा करें.

कैसे शुरू हुई महालक्ष्मी व्रत करने की परंपरा?

माना जाता है कि इस व्रत की परंपरा महाभारत काल से चली आ रही है. महर्षि व्यास ने राजरानी गंधारी को यह व्रत रखने के लिए कहा था. तभी से ये परंपरा चली आ रही है. वहीं शास्त्रों में बताया गया है कि द्वापर युग में महारानी कुंती ने अपने बेटे भीम के माध्यम से राजा मंदिर के यहां से ऐरावत हाथी मंगवाकर लक्ष्मी का पूजन किया था.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लाइफ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 21, 2019, 2:31 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...