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क्या बच्चों के लिए है फ़ायदेमंद न्यूक्लियर फ़ैमिली का आइडिया?

News18Hindi
Updated: December 8, 2017, 12:51 PM IST
क्या बच्चों के लिए है फ़ायदेमंद न्यूक्लियर फ़ैमिली का आइडिया?
अगर नौकरी या किसी अन्य कारण से आप अपने परिवार से दूर रहते हैं तो भी अपने बच्चों को समय-समय पर ऐसी जगहों पर ले जाया करें जहां सोशल गेदरिंग होती हो.
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Updated: December 8, 2017, 12:51 PM IST
बदलते वक्त में बहुत तेजी से परिवार की परिभाषा बदल रही है. अब परिवार का मतलब पूरा कुनबा नहीं बल्कि पति-पत्नी और बच्चे हो गए हैं. इसे वक्त का असर कहें या ज़रूरत लेकिन अब बड़े परिवार धीरे-धीरे टूट रहे हैं. जानिए,एकल परिवारों के बड़े नुकसान जिनका असर आपके बच्चों पर भी पड़ता है

अकेले रह जाते हैं बच्चे
छोटे परिवारों में पल रहे बच्चे अक्सर लोगों से घुल-मिल नहीं पाते वहीं इसके उलट जो बच्चे संयुक्त परिवार में पलते हैं उनके लिए अकेले रहना बहुत मुश्किल होता है.

रिश्ते बनने लगते हैं बोझ

घर में कोई मेहमान आ जाए तो बच्चों झुंझलाने लगते हैं. उन्हें लगता है कि उनके घर में घुसपैठिए आ गए हैं जबकि संयुक्त परिवारों में ये आम बात है.

कमजोर होने लगती है रिश्तों की डोर 
वे बहुत खुशनसीब लोग हैं जिनका बचपन संयुक्त परिवारों में बीता है. दादी के किस्से, नानी की कहानियां कितनी सूझ-बूझ वाली होती थीं. समाज में निकलने से पहले बच्चों की सोशल स्कूलिंग तो पहले ही हो जाती थी.

आभासी दुनिया के दुष्प्रभाव
आभासी दुनिया के बहुत नुकसान भी हैं. मोबाइल एप, ऑनलाइन गेम्स और टीवी ने बचपन छीनने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है.

कैसे बनाए रखें बच्चों को सामाजिक?
अगर नौकरी या किसी अन्य कारण से आप अपने परिवार से दूर रहते हैं तो भी अपने बच्चों को समय-समय पर ऐसी जगहों पर ले जाया करें जहां सोशल गेदरिंग होती हो. जैसे जहां आपके दोस्त रहते हों, या कोई रिश्तेदार रहता हो. ऐसा करने से न केवल आपके बच्चे न केवल खुश रहेंगे बल्कि उनमें रिश्तों की समझ भी विकसित होगी.
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