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अब पुरुष बांझपन का जल्दी चलेगा पता, इलाज होगा आसान


Updated: November 15, 2019, 2:52 PM IST
अब पुरुष बांझपन का जल्दी चलेगा पता, इलाज होगा आसान
पुरुष स्पर्म में डेंगू, लासा बुखार, रिफ्ट वैली बुखार और चिकनगुनिया वायरस सहित कुल 27 प्रकार के वायरस पाए जाते हैं.

वैज्ञानिकों ने पुरुष बांझपन मालूम करने का आसान तरीका खोज (Simpler Technique to diagnose male infertility) लिया है. इससे बांझपन के शिकार मरीज का इलाज करना भी आसान हो सकेगा.

  • Last Updated: November 15, 2019, 2:52 PM IST
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वॉशिंगटन. पुरुषों में बांझपन का पता (Male Infertility Diagnosis) लगाने के लिए अब एक साल या उससे अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. वैज्ञानिकों ने पुरुष बांझपन मालूम करने का आसान तरीका खोज (Simpler Technique to diagnose male infertility) लिया है. इससे बांझपन के शिकार मरीज का इलाज करना भी आसान हो सकेगा.

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रजनन जीवविज्ञानी माइकल स्किनर और उनके सहयोगियों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने यह अध्ययन किया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने एक ऐसे कारक को ढ़ूढ़ लिया है जिसके स्पर्म डीएनए में होने या न होने से बांझपन की बीमारी का पता आसान से लगाया जा सकता है.

वैज्ञानिकों ने बांझ रोगियों में ऐसे एपिजेनेटिक बायोमार्कर की भी पहचान की जिनमें हॉरमोन थेरेपी के प्रति रिस्पॉन्स मिला. इसके जरिए इनका इलाज संभव है.

शोध डॉक्टरों को बांझपन के लिए पुरुषों की जांच करने का एक विश्वसनीय तरीका प्रदान कर सकता है. यह पता लगा सकता है कि उनके रोगियों के लिए कौन सा उपचार विकल्प सबसे अच्छा काम करेगा.

इस खोज से अब उन दंपत्तियों का जीवन आसान हो जाएगा जो प्राकृतिक रूप से माता-पिता बन पाने में अक्षम हैं. ऐसे दंपत्ति अब समय रहते बच्चे को जन्म देने के बॉयोलॉजिकल तरीके का विकल्प चुन सकते हैं.

वर्तमान में, पुरुष बांझपन के निदान के लिए प्राथमिक विधि शुक्राणु की मात्रा और गतिशीलता का आकलन करना है. इस तकनीक की अपनी बाध्यताएं हैं. लंबा समय लगने के साथ साथ इसके जरिए दंपत्तियों के धैर्य की भी कड़ी परीक्षा होती थी.

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लगभग 20 प्रतिशत पुरुषों को बच्चे पैदा करने के लिए इनविट्रो फर्टिलाइजेशन की आवश्यकता होती है.

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स्किनर और उनके सहयोगियों के शोध पर एक रिपोर्ट नेचर: साइंटिफिक रिपोर्टे में छापी गई है. अपने शोध पर स्किनर ने कहा कि पुरुष बांझपन की समस्या पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रही है. यह बीमारी प्रजनन करने की क्षमता पर असर डाल रही है. अब पुरुष बांझपन का पता लगाना और इसका इलाज करना दोनो आसान हो चुका है.

लगभग 20 प्रतिशत पुरुषों को बच्चे पैदा करने के लिए इनविट्रो फर्टिलाइजेशन की आवश्यकता होती है. इनमें भी इनफर्टिलिटी की समस्या होती है लेकिन इसके कारण से वह अंजान रहते हैं. इन पुरुषों को आमतौर पर आईवीएफ के लिए सिफारिश किए जाने से पहले एक साल या उससे अधिक समय के लिए अपने साथी के साथ बच्चा पैदा करने की कोशिश करने के लिए एक आहार पर रखा जाता है.

स्किनर और उनके सहयोगी यह देखना चाहते थे कि अनिश्चितता के इस दौर से छुटकारा पाने के लिए क्या उन्हें सही उपचार मिल गया है. वैज्ञानिकों के पास कुछ जीनों को नियंत्रित करने वाले गुणों के कारको की जानकारी थी. इनमें से एक शुक्राणु के डीएनए से जुड़े मिथाइल मॉलिक्यूल के समूह भी होते हैं. इन्हीं से पुरुष बांझपन और उनके सामान्य होने का अंतर पैदा होता है.

उन्होंने पाया कि अध्ययन में सभी बांझ पुरुषों के पास एक विशिष्ट बायोमार्कर था जो उपजाऊ पुरुषों में नहीं था. वैज्ञानिकों ने बांझ रोगियों के बीच एक और बायोमार्कर की पहचान की. इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है कि हार्मोन थेरेपी उपचार से किन रोगियों का इला संभव है.

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First published: November 15, 2019, 2:52 PM IST
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