कमर दर्द के लिए रामबाण है मार्जरी आसन, इन योगासनों की मदद से कमर को रखें फिट

कमर दर्द के लिए रामबाण है मार्जरी आसन, इन योगासनों की मदद से कमर को रखें फिट
योग प्रशिक्षिका सविता यादव

घंटो बैठकर काम करने वाले लोगों को अक्सर कमर (Waist) और पीठ दर्द (Back Pain) की परेशानी होती है. वहीं बैठकर काम करने से पेट की चर्बी भी तेजी से बढ़ती है. ऐसे में आपको कुछ खास योगासनों (Yoga) का अभ्यास करना चाहिए.

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  • Last Updated: September 14, 2020, 10:08 AM IST
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शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कमर (Waist) को लचीला बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. साथ ही पेट की चर्बी को भी कम करना पड़ता है. ऐसा करने से आपका शरीर ने केवल बाहर से सुंदर दिखता है बल्कि शरीर अंदर से भी हेल्दी रहता है. घंटो बैठकर काम करने वाले लोगों को अक्सर कमर और पीठ दर्द (Back Pain) की परेशानी होती है. वहीं बैठकर काम करने से पेट की चर्बी भी तेजी से बढ़ती है. ऐसे में आपको कुछ खास योगासनों (Yoga) का अभ्यास करना चाहिए. योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है और जीवन संतुलित बना रहता है. कमर दर्द को दूर करने के लिए किसी भी योगासन को करने से पहले मांसपेशियों को आराम देना बहुत जरूरी होता है. ऐसे में पहले बॉडी को रिलैक्स करें और उसके बाद योगासन का अभ्यास करें. कभी भी दर्द में योगासन करने की कोशिश न करें. इससे विपरीत परिणाम हो सकते हैं. निम्नलिखित योगासनों की मदद से अपना कमर दर्द दूर करें.

ताड़ासन
ताड़ासन योग पूरे शरीर को लचीला बनाता है. यह एक ऐसा योगासन है जो मांसपेशियों में काफी हद तक लचीलापन लाता है. यह शरीर को हल्का करता है और आराम देता है. इसके अलावा शरीर को सुडौल और खूबसूरती भी प्रदान करता है. शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघालता है और आपके पर्सनैलिटी में नई निखार लेकर आता है.

ताड़ासन करने का तरीका
इसके लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाएं और अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें. अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पूरे शरीर को खींचें. खिंचाव को पैर की उंगली से लेकर हाथ की उंगलियों तक महसूस करें. इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाए रखें ओर सांस ले सांस छोड़ें. फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ और शरीर को पहली अवस्था में लेकर आएं. इस तरह से एक चक्र पूरा होता है.



ताड़ासन के फायदे
वजन कम करता है
कमर दर्द में आराम
हाइट बढ़ाता है
पीठ के दर्द में लाभदायक
मांसपेशियों के दर्द में आराम
घुटने और पैरों के दर्द में राहत

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मकरासन
मकरासन संस्कृत का शब्द है जो मकर और आसन इन दो शब्दों से मिलकर बना है. यहां मकर का अर्थ मगरमच्छ (Crocodile) और आसन का अर्थ मुद्रा (Pose) है. नदी में मगरमच्छ के शांत अवस्था में लेटने की मुद्रा ही मकरासन कहलाती है. इस आसन का अभ्यास करते समय मगरमच्छ की आकृति में ही एकदम शांत मुद्रा में जमीन पर लेटना पड़ता है.

मकरासन के फायदे
दिमाग को एकाग्र रखने और तनाव की समस्या को दूर करने में फायदेमंद
कंधों और रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों में तनाव कम होता है
कूल्हों की मांसपेशियों को बेहतर बनाने में फायदेमंद
अस्थमा की बीमारी में लाभ
घुटनों में दर्द और फेफड़े से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा
स्पॉन्डिलाइटिस की बीमारी से निजात
साइटिका और स्लिप डिस्क की समस्या भी दूर होती है
कमर दर्द से छुटकारा
शरीर की थकान और दर्द से राहत
गर्दन की अकड़न को कम करने, पेट की मांसपेशियों को टोन करने और कब्ज की समस्या को दूर करने में मददगार


सेतु बंधासन
संस्कृत में पुल को सेतु कहा जाता है. सेतु या पुल किसी दुर्गम स्थान या नदी के किनारों को आपस में जोड़ता है. ये आसन भी हमारे मन और शरीर के बीच तालमेल बैठाने में मदद करता है. जैसे पुल का काम ट्रैफिक और दबाव को सहन करना है, ये आसन भी हमारे शरीर से टेंशन को निकालता और कम करने में मदद करता है. साथ ही कमर दर्द में आराम मिलता है.

सेतु बंधासन करने का तरीका
योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं. सांसो की गति सामान्य रखें.
इसके बाद हाथों को बगल में रख लें.
अब धीरे-धीरे अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर हिप्स के पास ले आएं.
हिप्स को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ उठाएं. हाथ जमीन पर ही रखें.
कुछ देर के लिए सांस को रोककर रखें.
इसके बाद सांस छोड़ते हुए वापस जमीन पर आएं. पैरों को सीधा करें और विश्राम करें.
10-15 सेकंड तक ​आराम करने के बाद फिर से शुरू करें.

सेतु बंधासन के फायदे
सीने, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव पैदा करता है
पाचन और मेटाबॉलिज्म सुधारता है
एंग्जाइटी, थकान, कमर दर्द, सिरदर्द और इंसोम्निया में फायदेमंद
रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाता है
दिमाग को शांत करता है
फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और थायरॉयड की समस्या में फायदेमंद
रक्त संचार सुधारता है।

भुजंगासन
भुजंगासन, सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से 8वां है. भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है. इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है. ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है.

भुजंगासन के फायदे
-रीढ़ की हड्डी में मजबूती और लचीलापन
-पेट के निचले हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ती है
-पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं और यौन शक्ति बढ़ती है
-मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन कम करने में मदद मिलती है
-कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है
-फेफड़ों, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिलता है
-डिप्रेशन में भी इससे फायदा मिलता है
-अस्थमा में भी राहत

शलभासन
शलभासन एक संस्कृत भाषा का शब्द है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें पहले शब्द शलभ का अर्थ टिड्डे या कीट (Locust ) और दूसरा शब्द आसन का अर्थ होता है मुद्रा अर्थात शलभासन का अर्थ है टिड्डे के समान मुद्रा होना. इस आसन को अंग्रेजी में ग्रासहोपर पोज बोलते हैं. इससे आपकी रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है.

शलभासन करने का तरीका
शलभासन करने लिए सबसे पहले आप किसी साफ स्थान पर चटाई बिछा कर उलटे पेट के बल लेट जाएं यानि आपकी पीठ ऊपर की ओर रहे और पेट नीचे जमीन पर रहे. अपने दोनों पैरो को सीधा रखें और अपने पैर के पंजे को सीधे तथा ऊपर की ओर रखें. अपने दोनों हाथों को सीधा करें और उनको जांघों के नीचे दबा लें यानी अपना दायां हाथ दायीं जांघ के नीचे और बायां हाथ बायीं जांघ के नीचे दबा लें. अपने सिर और मुंह को सीधा रखें. फिर अपने को सामान्य रखें और एक गहरी सांस अंदर की ओर लें. अपने दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें, जितना हो सकता हैं उतना अपनी अधिकतम ऊंचाई तक पैरों को ऊपर करें.

अगर आप योग अभ्यास में नए हैं, तो आप पैरों को ऊपर करने के लिए अपने हाथों का सहारा ले सकते हैं, इसके लिए आप अपने दोनों हाथों को जमीन पर टिका के अपने पैरों को ऊपर कर सकते हैं. आप इस मुद्रा में कम से कम 20 सेकंड तक रहने की कोशिश करें, इसे आप अपने क्षमता के अनुसार कम ज्यादा कर सकते हैं. इसके बाद आप धीरे धीरे अपनी सांस को बाहर छोड़ते हुए पैरों को नीचे करते जाएं. दोबारा अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं. इस अभ्यास को 3-4 बार दोहराएं.

शलभासन के फायदे
शलभासन वजन को कम करने के लिए एक अच्छी योग मुद्रा मानी जाती है. यह शरीर में चर्बी को खत्म करने में मदद करती है. शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए शलभासन एक अच्छी मुद्रा है. यह शरीर के हाथों, जांघों, पैरों और पिंडरी को मजबूत करता है, इसके साथ यह पेट की चर्बी को कम करके उसे सुंदर बनाता है. रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए शलभासन एक अच्छा योग है. शलभासन से अनेक प्रकार की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है. यह हमारे पेट के पाचन तंत्र को ठीक करता करता है, जिससे पेट संबंधी बीमारियां नहीं होती हैं, इसके साथ यह कब्ज को ठीक करता है, शरीर में अम्ल और क्षार के संतुलन को बनाए रखता है.

मार्जरी आसन
मार्जरी आसन को अंग्रेजी में कैट पोज (Cat pose) के नाम से बुलाया जाता है. इसे कैट खिंचाव मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है. इस आसन को करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है. मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं. यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है. इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है.

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मार्जरी आसन के फायदे
रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनने में मदद करता है
पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करती है
रक्त परिसंचरण में सुधार करती है
पेट से अनावश्यक वसा को कम करने में मदद करता है
पेट को टोन करने में मदद करता है
तनाव को दूर करने में बहुत मदद करता है
मन को शांत करके मानसिक शांति प्रदान करता है
कंधे और कलाई दोनों को मजबूत बनाता है
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