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98 साल से पुरानी दिल्ली की इस दुकान में मिलते हैं लाजवाब मटर समोसे और गुलाब जामुन, आपने खाया क्या?

पुरानी दिल्ली की इस दुकान पर 98 साल से समोसा (Samosa) और गुलाब जामुन (Gulab Jamun) बेचा जा रहा है. उनके आकार-प्रकार में तो बदलाव हुआ है, लेकिन स्वाद आज भी पुराने वाला ही है.

पुरानी दिल्ली की इस दुकान पर 98 साल से समोसा (Samosa) और गुलाब जामुन (Gulab Jamun) बेचा जा रहा है. उनके आकार-प्रकार में तो बदलाव हुआ है, लेकिन स्वाद आज भी पुराने वाला ही है.

पुरानी दिल्ली की इस दुकान पर 98 साल से समोसा (Samosa) और गुलाब जामुन (Gulab Jamun) बेचा जा रहा है. उनके आकार-प्रकार में तो बदलाव हुआ है, लेकिन स्वाद आज भी पुराने वाला ही है.

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    (डॉ. रामेश्वर दयाल)

    ये तो आप जानते ही हैं कि खाने-खिलाने के मामले में पुरानी दिल्ली (Old Delhi) का अपना एक रुतबा है. बदलते वक्त के साथ-साथ पुरानी दिल्ली के खानपान में बदलाव आया है, लेकिन कुछ व्यंजन ऐसे हैं जो सालों से यहां पर चलन में हैं और उनका स्वाद भी गजब है. आज एक ऐसी ही दुकान पर हम आपको लिए चलते हैं जहां 98 साल से समोसा (Samosa) और गुलाब जामुन (Gulab Jamun) बेचा जा रहा है. उनके आकार-प्रकार में तो बदलाव हुआ है, लेकिन स्वाद आज भी पुराने वाला ही है. वजह यही है कि उसमें अभी भी वही मसाले डाले जा रहे हैं जो सालों पहले मिलाए जाते थे. मजे की बात यह है कि ये मसाले इलाके के एक पुराने पंसारी से ही सालों से खरीदे जा रहे हैं.

    शानदार मसालों का स्टफ समोसे को बनाता है जानदार
    पुरानी दिल्ली स्थित किनारी बाजार क्षेत्र में है यह सालों पुरानी दुकान. इलाके के सभी लोगों को पता है कि इस दुकान पर लगातार समोसे और गुलाब जामुन बनते रहते हैं, इसलिए वे ताजा माल खाने और पैक कराने के लिए आते रहते हैं. अब पहले मटर समोसे और गुलाब जामुन की बात कर लेते हैं. समोसा बनाने के लिए जो मसाला खरीदा जाता है, वह इलाके का पुराना पंसारी है. उससे लौंग, दालचीनी, नौबहार चटनी मसाला व अन्य सामान खरीदा जाता है. फिर उसे बारीक कूटकर उबली मटर में मिलाया जाता है. ये स्टफ के समोसे जब तले जाते हैं, तो आप समझ लीजिए लोग दुकान पर खींचे चले आते हैं. जब धनिए वाली हरी चटनी के साथ कुरकरे और अंदर से गर्माहट लिए इन समोसों का लुत्फ लिया जाता है तो वाकई लगता है कुछ असली माल खाया जा रहा है.

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    लंबा गुलाब जामुन मुंह में रखते ही घुलने लगता है
    दुकान के लंबे गुलाब जामुन भी खासा नाम कमा रहे हैं. शुद्ध खोए में बनकर वे तले जाते हैं और फिर गाढ़ी चाशनी में तैरते हैं तो उन्हें देखने में ही आनंद की अनुभूति होती है. खास तरह की मिठास और बेहद मुलायम ये गुलाब जामुन मुंह में डालते ही घुलकर अलग स्वाद बनाते नजर आते हैं. मटर समोसे की कीमत 17 रुपये है तो गुलाब जामुन भी 17 रुपये में बेचा जाता है. सुबह इस दुकान पर जाएंगे तो वहां पुरानी दिल्ली का मशहूर नाश्ता बेड़मी-सब्जी व नागौरी हलवा भी हाजिर है. इलाके के लोग सुबह नाश्ता इसी दुकान पर आकर निपटा जाते हैं और फिर काम पर लग जाते हैं.



    आगरा के हलवाई परिवार ने 1919 में शुरू की थी यह दुकान
    इस डिश को बेचने वाले आगरा के खानदानी हलवाई हैं. सालों पहले वे पुरानी दिल्ली के धर्मपुरा (मस्जिद खजूर) में रहने आ गए थे. वर्ष 1919 में लाला बंसीलाल ने दुकान शुरू की थी. उस वक्त उन्होंने दूध-दही के कारोबार के साथ समोसे, पेढ़ा और दालबीजी बेचना शुरू किया था. उसके बाद उनके बेटे सोहनपाल ने दुकान संभाली. फिर दुकान की कमान उनके बेटे राधेलाल हलवाई के पास आ गई. आज उनके साथ उनके दो बेटे अजय व दीपक भी माल बना रहे हैं. इस दुकान पर सीजनल मिठाई भी बेची जाती है जैसे सावन के महीने में घेवर, श्राद्ध के दिनों में इमरती और होली के दौरान गूंझे मिलते हैं. इनकी खोए की बर्फी भी खूब बिकती है जो 400 रुपये किलो है. लेकिन मटर समोसे और गुलाब जामुन 12 महीने बेचे जाते हैं. आसपास के बाजारों के दुकानदार यहां से खरीदकर खाते हैं, साथ ही घर के लिए भी पैक करवाकर ले जाते हैं. दुकान सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक खुली रहती है.

    नजदीकी मेट्रो स्टेशन: लाल किला

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