अब के बिछड़े क्या जानिए उस से कब मिलेंगे, पढ़ें मीर हसन की इश्क भरी शायरी

अब के बिछड़े क्या जानिए उस से कब मिलेंगे, पढ़ें मीर हसन की इश्क भरी शायरी
मीर हसन की शायरी

मीर हसन की शायरी (Meer Hasan Shayari) : आराम 'हसन' तभी तो होगा, उस लब से जब अपने लब मिलेंगे ...

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मीर हसन की शायरी (Meer Hasan Shayari) : मीर हसन एक ऐसे नामचीन घराने से थे जिसे उर्दू अदब के लिए जाना जाता था. मीर हसन ने ग़ज़ल में नहीं बल्कि मसनवी में हाथ आजमाया और उसे बुलंदियों तक पहुंचाया. मीर हसन ने शायरी और ग़ज़ल से इतर इसे इतना ज्यादा समृद्ध कर दिया जोकि मिसाल बन गया. मीर हसन की कुछ प्रमुख रचनाएं हैं- सह्र-उल-बयान, गुलज़ार-ए-इरम और रमूज़-उल-आरफ़ीन. इसके अलावा भी ख़्वान-ए-नेअमत, रमूज़-उल-आरफ़ीन, सह्र-उल-बयान भी उनकी चुनिन्दा मसनवियों में से एक हैं. आज हम रेख्ता डॉट कॉम के साभार से लाए हैं आपके लिए मीर हसन के चुनिन्दा शेर....

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आज दिल बे-क़रार है क्या है ....
आज दिल बे-क़रार है क्या है



दर्द है इंतिज़ार है क्या है

जिस से जलता है दिल जिगर वो आह

शोला है या शरार है क्या है

ये जो खटके है दिल में काँटा सा

मिज़ा है नोक-ए-ख़ार है क्या है

चश्म-ए-बद-दूर तेरी आँखों में

नश्शा है या ख़ुमार है क्या है

मेरे ही नाम से ख़ुदा जाने

नंग है उस को आर है क्या है

जिस ने मारा है दाम दिल पे मिरे

ख़त है या ज़ुल्फ़-ए-यार है क्या है

क्यूँ गरेबान तेरा आज 'हसन'

इस तरह तार-तार है क्या है .

दिलबर से हम अपने जब मिलेंगे ...
दिलबर से हम अपने जब मिलेंगे

इस गुम-शुदा दिल से तब मिलेंगे

ये किस को ख़बर है अब के बिछड़े

क्या जानिए उस से कब मिलेंगे

जान-ओ-दिल-ओ-होश-ओ-सब्र-ओ-ताक़त

इक मिलने से उस के सब मिलेंगे

दुनिया है सँभल के दिल लगाना

याँ लोग अजब अजब मिलेंगे

ज़ाहिर में तो ढब नहीं है कोई

हम यार से किस सबब मिलेंगे

होगा कभी वो भी दौर जो हम

दिलदार से रोज़-ओ-शब मिलेंगे

आराम 'हसन' तभी तो होगा

उस लब से जब अपने लब मिलेंगे .
आज दिल बे-क़रार है क्या है ...

आज दिल बे-क़रार है क्या है

दर्द है इंतिज़ार है क्या है

जिस से जलता है दिल जिगर वो आह

शोला है या शरार है क्या है

ये जो खटके है दिल में काँटा सा

मिज़ा है नोक-ए-ख़ार है क्या है

चश्म-ए-बद-दूर तेरी आँखों में

नश्शा है या ख़ुमार है क्या है

मेरे ही नाम से ख़ुदा जाने

नंग है उस को आर है क्या है

जिस ने मारा है दाम दिल पे मिरे

ख़त है या ज़ुल्फ़-ए-यार है क्या है

क्यूँ गरेबान तेरा आज 'हसन'

इस तरह तार-तार है क्या है .
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