डॉक्‍टर्स ने कहा कीमोथैरेपी कराओ, 91 साल की नोर्मा ने कहा नहीं, मैं घूमने जाऊंगी

मौत सबको आती है उन्हें भी आई. पर उनकी जिंदादिली जानने वालों की नजरों में वह हमेशा के लिए अमर हो गईं.

News18Hindi
Updated: December 14, 2017, 12:57 PM IST
डॉक्‍टर्स ने कहा कीमोथैरेपी कराओ, 91 साल की नोर्मा ने कहा नहीं, मैं घूमने जाऊंगी
नोर्मा (फाइल फोटो) (फेसबुक)
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Updated: December 14, 2017, 12:57 PM IST
1971 में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की अभिनीत फिल्म आई थी 'आनंद'. आनंद की भूमिका में थे राजेश खन्ना. आनंद का कैंसर आखिरी स्टेज में था. पता था कि उसकी जिंदगी में बस कुछ महीने बचे हैं लेकिन जिंदादिली ऐसी कि जैसे दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान वही हो.

कहते हैं न कि फिल्में समाज का आइना होती हैं. उनकी पटकथा समाज के इर्द-गिर्द बुनी जाती है. आनंद की तरह ही एक जिंदादिल अमेरिकी महिला महिला कैंसर से जूझ रही थी. उसने अपना इलाज कराने की बजाए पूरे अमेरिका की सैर पर जाने की ठानी. उसने सोचा कि जितने पैसे कैंसर ट्रीटमेंट में खर्च होंगे, उतने में तो अमेरिका के चक्कर लग जाएंगे.

निकल पड़ीं रोड ट्रिप पर 

नोर्मा जीन बॉसस्केमिड को गर्भाशय का कैंसर था. पिछले साल जब उन्हें पता चला कि दुनियाभर की रेडिएशन, कीमोथेरपी और सर्जरी के बाद भी इस कैंसर से बच पाने की उम्मीद बहुत कम है तो उन्होंने सोचा कि अब रोड ट्रिप पर चलते हैं. नोर्मा, बेटे और बहू और पेट डॉग रिंगो के साथ 24 अगस्त 2015 को रोड ट्रिप पर निकल पड़ीं. कैंसर से जूझते हुए भी उनकी जिंदादिली कमाल की रही. अपने साथ वालों को नोर्मा एहसास कराती रहीं कि जिंदगी का हर लम्हा कीमती है.

ड्राइविंग मिस नोर्मा नाम से चल रहे उनके ऑफिशियल रोड ट्रिप पेज की पोस्ट में लिखा गया कि ट्रिप में हमने जिंदगी को जीना सीखा. दौड़ना सीखा. बैलून पर सवार होकर आसमान को करीब से देखा तो  जिंदगी की गहराइयों को पार करना सीखा.

मौैत तो उन्हें भी आई लेकिन...

नोर्मा की कहानी सबके लिए प्रेरणा की तरह है. जिंदगी की छोटी-छोटी मुश्किलों के सामने हम हार मान लेते  हैं, परेशान हो जाते हैं, नोर्मा को पता था कि उनकी जिंदगी कम है लेकिन जिंदादिली नहीं छोड़ी. हर पल को जीती रहीं. मौत सबको आती है उन्हें भी आई. पर उनकी जिंदादिली जानने वालों की नजरों में वह हमेशा के लिए अमर हो गई.
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