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Love Story: इंदिरा गांधी जैसी है महबूबा मुफ्ती की प्रेम कहानी

महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो)

महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो)

महबूबा मुफ्ती की जिंदगी पर कुछ छाया फिरोज गांधी की तरह पड़ा और कुछ इंदिरा गांधी की तरह. कुछ वैसी ही है उनकी प्रेम कहानी और फिर संबंधों में बिखराव और फिर कुछ वैसी ही उनकी जिंदगी....

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(न्यूज़18 हिन्दी हर हफ्ते किसी जान-मानी हस्ती की प्रेम कहानी से रू-ब-रू कराता है. इस बार Love Story की इस कड़ी में पेश है जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की कहानी...)

महबूबा मुफ्ती की जिंदगी पर कुछ छाया फिरोज गांधी की तरह पड़ी और कुछ इंदिरा गांधी की तरह. कुछ वैसी ही है उनकी प्रेम कहानी और फिर संबंधों में बिखराव और फिर कुछ वैसी ही उनकी जिंदगी...

महबूबा मुफ्ती की प्रेम कहानी, शादी, परिवार और राजनीति के साथ ऐसी गडमड्ड होकर आगे बढ़ी कि उन्होंने आगे की जिंदगी के रास्तों में खुद को पति से अलग पाया. प्रेम बिखरकर कटुता में बदल गया, जिसकी परिणति तलाक के रूप में हुई. लेकिन महबूबा खुद को समेटती हुई आगे बढ़कर मुकाम बनाती रहीं. फिर अपने राज्य में सबसे ताकतवर नेता बनीं और उस कुर्सी तक पहुंची, जिस पर घाटी में पहली बार कोई महिला पहुंची थी. राजनीति के रास्ते भी उनके लिए चुनौतियों वाले ही रहे. हालांकि गठबंधन के धागे टूट गए और अब फिर से सबकुछ परीक्षा लेने वाला है.

तब पहली बार चर्चाओं में आईं
महबूबा मुफ्ती वर्ष 1989 में तब पहली बार चर्चा में आईं थीं, जब उनकी छोटी बहन रुबैया सईद का अपहरण कर लिया गया. रुबैया उस समय श्रीनगर के अस्पताल में मेडिकल इंटर्न थीं. पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद को वीपी सिंह सरकार में गृहमंत्री बने मुश्किल से पांच दिन हुए थे. तब महबूबा ही मीडिया से लगातार रूबरू हो रही थीं. तब तक उनकी शादी हो चुकी थी, लेकिन वो लो-प्रोफाइल रहना पसंद करती थीं.



पिता के कजिन से हुई शादी
महबूबा की शादी 1984 में रिश्ते में अंकल लगने वाले जावेद इकबाल शाह से हुई थी. हालांकि वो अपनी बेगम से सात साल छोटे थे. रिश्ते में मरहूम मुफ्ती मोहम्मद, इकबाल शाह के फर्स्ट कजिन थे. महबूबा उस समय श्रीनगर यूनिवर्सिटी में एलएलबी पूरा करने वाली थीं, वहीं शाह नए-नए यूनिवर्सिटी में पहुंचे थे. दोनों में प्यार हो गया. शाह ने दो साल पहले कोलकाता के अंग्रेजी दैनिक द टेलिग्राफ से बातचीत में बताया था, 'प्यार की ये पहल मेहबूबा की ही ओर से हुई. उन्होंने मुझे प्रोपोज किया'. हालांकि आईप्वाइस ब्लॉगस्पाट डॉट कॉम में बताया गया कि महबूबा इस शादी के लिए बहुत इच्छुक नहीं थीं.



निकाह जोर-शोर से हुआ
इसके बाद जब मुफ्ती साहब को इसके बारे में मालूम हुआ तो शादी में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. दोनों परिवार एक दूसरे से जुड़े हुए थे. दोनों परिवारों को लगा कि दोनों की निकाह का ख्याल अच्छा ही रहेगा. निकाह जोर-शोर से हुआ. हर कोई खुश था. शादी के बाद दोनों दिल्ली आकर रहने लगे. बताया जाता है कि इस दौरान मियां-बीवी बीच खूब कलह होती थी और उनके बीच की दूरियां बढ़ने लगीं.

दरकने लगा रिश्ता
एक ओर दोनों के रिश्तों में खालीपन आ रहा था, तो दूसरी ओर मुफ्ती मोहम्मद सईद अपनी बड़ी बेटी को अपने सियासी वारिस के रूप में देख रहे थे. क्योंकि मुफ्ती के बेटे को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी. मुफ्ती ने महबूबा को तैयार करना शुरू किया. वहीं इकबाल को कतई पसंद नहीं था कि उनकी बीवी राजनीति में कदम रखे. इस बात ने आग में घी का काम किया. जिस तरह महबूबा सियासत में आगे बढ़ीं, दांपत्य रिश्ता टूटता चला गया. आखिरकार वो शौहर का घर छोड़कर वालिद के पास आ गईं. फिर इस रिश्ते में जो कुछ बाकी बचा था, वो अदालत के चौखटे पर पहुंचकर खत्म हो गया.

महबूबा की बेटियां
इस शादी से दोनों को दो बेटियांं हुईं- इर्तिका और इल्तिज़ा. अब दोनों बड़ी हो चुकी हैं. पिता के साथ दोनों बेटियों के संबंधों में भी ठंडापन ही है. बड़ी बेटी इर्तिका लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में काम करती हैं तो दूसरी बॉलीवुड फिल्मोद्योग से जुड़ी हैं. महबूबा के भाई मुफ्ती तस्दीक बॉलीवुड में जाने माने सिनेमेटोग्राफर हैं. निर्देशक विशाल भारद्वाज की फिल्म ओंकारा में उनके काम की काफी तारीफ भी हुई थी.



बेटियों को मां पर फख्र है
जब महबूबा मुख्यमंत्री बनीं तो उनकी बेटियों ने जमकर अपनी मां की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि उन्हें अपनी मां पर गर्व है कि उन्होंने अकेले ही उन दोनों को पिता की तरह पाला. उन्होंने अपनी मां को महिलाओं का रोलमॉडल भी बताया. बेटी इर्तिका ने कहा था कि उनकी मां कभी दबाव में नहीं आती.

इकबाल ने क्या कहा
इकबाल शाह ने महबूबा मुफ्ती के साथ रिश्तों को लेकर 'द टेलीग्राफ' को दिए इंटरव्यू में कहा था, मैं तब बहुत कमउम्र था, उस समय हो रही बहुत सी बातों को मैं समझ भी नहीं पाया. लेकिन ये तय था कि पॉलिटिक्स ने दरार की शुरुआत कर दी थी. मैं इस सबसे सहज महसूस नहीं कर रहा था.'

शाह आज भी मुफ्ती परिवार के घोर आलोचक हैं और उसे घाटी में खराब हालत, आतंकवाद और अस्थिरता के लिए दोषी ठहराते हैं.

अदालत में तलाक
शाह ने टेलीग्राफ से कहा, 'मुफ्ती खानदान के तौर-तरीके अजीबोगरीब है. मेरे लिए ये सबकुछ बहुत अपसेट करने वाला था. इसी के चलते उनका महबूबा से अलगाव हो गया. वो कहते हैं कि ये एक लंबी कहानी है. लेकिन दोनों का अलगाव बहुत कटुतापूर्ण तरीके से हुआ. बाद में ये मामला अदालत में पहुंचा और तलाक के रूप में खत्म हुआ. शाह को घाटी में एनिमल एक्टिविस्ट के तौर पर जाना जाता है.

इकबाल पूर्व बीवी की विरोधी पार्टी में भी गए
जम्मू-कश्मीर के पिछले विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2008 में इकबाल शाह ने महबूबा मुफ्ती की पीडीपी के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली. उन्होंने चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा. लेकिन इसके जल्द बाद ही वह नेशनल कांफ्रेंस से भी अलग हो गए. वहीं महबूबा अपने पिता के निधन के बाद पीडीपी की बॉस हैं और मुफ्ती खानदान की राजनीतिक वारिस...

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