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मिनिमलिज़्म (Minimalism): कई देशों में प्रचलित है यह जीवन शैली, अपनाने के हैं चमत्कारिक फायदे

Pooja Prasad
Updated: February 2, 2020, 9:04 PM IST
मिनिमलिज़्म (Minimalism): कई देशों में प्रचलित है यह जीवन शैली, अपनाने के हैं चमत्कारिक फायदे
मिनिमलिज़्म (Minimalism) यानी, न्यूनतमवाद. और, आसान शब्दों में कहें तो कम से कम चीज़ों के साथ जीवन-यापन.

यह मजबूरी नहीं, चॉयस का मामला है. ऐसी चॉयस जिसमें आप खुद चुनते हैं कि सिर्फ़ अत्यंत आवश्यक वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे. इसके बावजूद कि आपके पास महंगी से महंगी और ज्यादा से ज्यादा वस्तुएं व सेवाएं हासिल करने की वित्तीय क्षमता हो, आप माइंडफुलनेस के साथ न्यूनतमवादी होने का फैसला लेते हैं.

  • Last Updated: February 2, 2020, 9:04 PM IST
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मिनिमलिज़्म (Minimalism) यानी, न्यूनतमवाद. और, आसान शब्दों में कहें तो कम से कम चीज़ों के साथ जीवन-यापन. यह एक जीवनशैली है जो कई मुल्कों में लोगों द्वारा अपनाई जा रही है. अब आप कहेंगे कि भारत जैसे देश में जहां सर्वाधिक आबादी कम से कम चीज़ों के साथ ही किसी तरह जी रही है, मिनिमलिज़्म का मतलब ही क्या है. मगर, गरीबी या जरूरत की वस्तुओं और सेवाओं की गैरमौजूदगी मिनिमलिज़्म नहीं है.

दरअसल, यह मजबूरी नहीं, चॉयस का मामला है. ऐसी चॉयस जिसमें आप खुद चुनते हैं कि सिर्फ़ अत्यंत आवश्यक वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे. इसके बावजूद कि आपके पास महंगी से महंगी और ज्यादा से ज्यादा वस्तुएं व सेवाएं हासिल करने की वित्तीय क्षमता हो, आप माइंडफुलनेस के साथ न्यूनतमवादी होने का फैसला लेते हैं. खुद पर लागू करते हैं कि आप कम से कम चीज़ों और सेवाओं का उपयोग व उपभोग करेंगे. माइंडफुलनेस से हमारा मतलब, उस आदत से है जिसमें आप सतर्कता के साथ चीजों, आदतों, पैटर्न और व्यवहार को ऑब्जर्व करते हैं और जरूरी बदलाव करते हैं.

आज के डिजिटल प्राइम टाइम में हम आपको जो जादुई जानकारी देने जा रहे हैं, हो सकता है वह आपके रहने-सहने और जीने का अंदाज ही नहीं, बल्कि आपकी पूरी सोच को ही बेहतरी के लिए बदल कर रख दे. संभव है कि आपने इसके बारे में पहले सुन-पढ़ रखा हो और पहली ही नज़र में इसे इस या उस कारण से खारिज कर दिया हो. वैसे भी यह मिनिमलिज़्म भारतीय पुरातन परंपराओं के काफी नज़दीक भी है. भारतीय संस्कृति, जोकि कहती भी है, कम से कम भौतिक वस्तुओं के साथ जीवन यापन करना. लेकिन, रुकिए हम आपको साधुवाद की ओर नहीं धकेलने वाले. कहते हैं न, गुड़ का स्वाद गूंगा नहीं बता सकता, इसलिए जब तक इस जीवनशैली को अपनाया नहीं जाता, इसके फायदों की चमत्कारिक शक्ति से रूबरू नहीं हुआ जा सकता...

मिनिमलिज़्म (Minimalism) के फायदे...

1- आप न सिर्फ धन बचाते हैं. बल्कि अपना समय भी बचाते हैं. शानदार बात यह है कि चूंकि यह 'कम खर्च' आप पर थोपा हुआ नहीं होता, बल्कि स्वयं अपनाया हुआ होता है, यह आपको किसी प्रकार की कुंठा या दुख में नहीं डुबोता, बल्कि लाइटर फील करवाता है.

2- आप Quantity पर नहीं, Quality पर भरोसा करते हैं. कितने जोड़ी कपड़े हैं, कितने डिनर सेट हैं और कितने रूम्स में कितने टीवी हैं, से फोकस हटाते हैं और 'एक' सामान प्राप्त करते हैं, इसका नतीज़ा यह निकलता है कि आपकी खुद की जिन्दगी  गुणवत्तापूर्ण होने लगती है. एक सामान से मतलब एक जैसे काम की चीजों की डुप्लिकेसी और मल्टीप्लीकेशन्स का अभाव...

3- जब आप de-cluttering प्रॉसेस शुरू करते हैं, यानी गैर-जरूरी चीजों व सेवाओं को जीवन से हटाते हैं. तब आप अपने दिमाग और मन की भी डी-क्लटरिंग कर रहे होते हैं. क्लीनिंग दरअसल एक ऐसा प्रॉसेस है जो बाहर से करने पर अंत:करण की भी साफ सफाई करता है. एक साफ दिमाग, सुंदर दिमाग होता है, जहां सकारात्मक और स्वस्थ्य विचार जन्म लेते हैं.4- न सिर्फ आपके लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी आपका मिनिमलिस्ट (Minimalist) होना काफी फायदे का सौदा है. जब आप पर्यावरण से कुछ भी अतिरिक्त नहीं लेते हैं, तब आप अपने कार्बन फुटप्रिंट्स भी कम से कम छोड़ते हैं. प्लास्टिक वेस्ट कम पैदा करते हैं और कभी न खत्म होने वाले कबाड़ में से आपका कंट्रीब्यूशन कम होता जाता है. क्या आपको यह बात आत्मसंतुष्टि नहीं देगी?

5- एक बात हम निश्चित रूप से कह सकते हैं, मिनिमलिस्ट होने की प्रक्रिया में आप तनाव रहित होने लगते हैं. आपकी लाइफ जब आपके हाथ में होती है (काफी हद तक) तब आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है और जीवन में स्पष्टता भी आने लगती है. यह जीवनशैली आपको राइट टु चूज़ भी देती है क्योंकि अब आप बाजार के हाथों नहीं खेल रहे होते. बल्कि, अपनी जरूरतों के आधार पर खर्चे कर रहे होते हैं. हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप ट्रिप और टूर्स पर न जाएं, क्योंकि यह भी आपके दिमागी स्वास्थ्य के लिए जरूरी है और इसे फिज़ूलखर्च से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. अब फिज़ूलखर्ची हर व्यक्ति के लिए अलग प्रकार की हो सकती है, इसके लिए खुद में झांके और पाएं कि क्या ऐसा है जो मिनिमलिस्ट होने की प्रक्रिया में बाधक है.

जीवनशैली जो जीवन बदल कर रख देती है...
जीवनशैली जो जीवन बदल कर रख देती है...


क्या आप भी मिनिमलिस्ट (Minimalist) बनना चाहेंगे?

यदि इस सवाल का जवाब आप हां में देते हैं या फिर इसे एक ट्राई देना चाहते हैं तो हम इसमें आपकी मदद कर सकते हैं. सबसे पहले आसपास की जगह खाली करें. इस वक्त जिस कुर्सी पर बैठकर आप यह पढ़ रहे हैं, उसके आसपास देखें और भांपे, कितनी ही चीजें हैं जो 'हटाई' जा सकती हैं. अपने घर में गहरे तक झांककर ऐसी चीजों की सूची बनाएं जिनका उपयोग आपने 6 महीने या 1 साल से नहीं किया है. अब या तो इनका उपयोग करना शुरू करें या फिर इन्हें हटा दें. हटाने का मतलब है कि या तो किसी को दे दें, या फेंक दें या बेच दें, जो भी आप कर सकते हों. कई जोड़ी कुशनकवर्स, कई प्रकार के लैंपशेड्स, महंगे शो पीस, रैक्स, पुराने अखबार, सहेज कर रखी हुईं मैगजीन्स, कभी न देखें जाने वाली स्लिप्स-रसीदें (इन्हें तो आप स्कैन करने के बाद फेंक ही दें, स्कैन करके मेल/क्लाउड में रख लें).

परिवार के लोग मिलकर, दोस्त मिलकर या फिर अकेले ही, जब मौका लगे, समय हो, सीख और खुद ही प्रॉडक्ट्स बनाने की कोशिश कर सकते हैं. साबुन, डिटरजेंट, क्लीनर, कपड़ों की सिलाई.. हालांकि ये सब आसान नहीं है और आप ये सारी चीजें एक साथ पहले ही महीने में करना शुरू नहीं कर सकते, यह प्रैक्टिकली पॉसिबल ही नहीं है. लेकिन, चूंकि मिनिमलिस्ट बनने की प्रक्रिया में आप केवल जरूरी खर्च पर भी फोकस करेंगे, तो यह किया जा सकता है.

सेल्फ-लव बेहद जरूरी चीज है लेकिन इसका मतलब खुद पर अंधाधुध खर्च नहीं. खुद के लिए अधिकाधिक खर्च नहीं. ब्लकि खुद को गुणवत्तापूर्ण चीजों और सेवाओं से नवाजना है. रोग भगाना, निरोग होना, स्वस्थ्य होने की दिशा में सादे मगर पौष्टिक भोजन पर खर्च करें. जंक को न कहें.. घर के बने खाने को तरजीह दें, बचे भोजन का रीयूज करें. खाना वेस्ट न करें. होटलों में खाना पीना बुरा नहीं, लेकिन अधिकता न सिर्फ जेब पर असर डालती है बल्कि आपके मिनिमलिस्ट होने के टारगेट को भी प्रभावित करेगी. महंगे कॉस्मेटिक्स और महंगे कपड़ों में कटौती करें. कुदरती चीजों का लाभ उठाएं. हवा पानी धूप.. ये न सिर्फ रोग बीमारी पर आपका खर्च करेंगी बल्कि आपके मन और दिमाग को उपजाऊ बनाएंगी.

घर के फर्नीचर, ऑफिस या वर्कप्लेस की एक्सेसरीज, आपके बैग (कैरी बैग) के भीतर का सामान, आपकी ईमेल से लेकर आपके फोन... हर जगह का स्पेस फ्री करें. आम बोलचाल में कहते हैं न, हवा आने दे. :) तो बस, अपने जीवन के ठसाठस भरे हुए हिस्सों में थोड़ी हवा आने दें. रिश्तों में भी स्पेस दें, यह भी डीक्लटरिंग और मिनिमलिज्म की प्रक्रिया का हिस्सा है.

हर किसी के लिए इस जीवनशैली को अपनाने का रास्ता शुरू में कुछ अलग हो सकता है. लेकिन मंजिल एक ही है. जब भी कोई सामान खरीदें तब अपने आप से पूछें कि क्या वाकई आपको फलां चीज की जरूरत है. फलां चीज केवल अस्थायी टेंपटेशन तो नहीं है. यह सवाल खुद से पूछने की आदत डाल लें.

जैसा कि हमने शुरू में बताया, कि यह कोई ism या वाद नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है. इसलिए, जब आप इस पर चलना शुरू करेंगे तो पाएंगे कि अपने जीवन को लेकर आपको एक के बाद एक आइडिया आ रहे हैं जिनका इस्तेमाल करके आप जीवन सरल और सुंदर बना सकते हैं. गूगल की मदद लीजिए और ऐसे ढेरों टिप्स आपको वहां भी मिल जाएंगे. इस दिशा में एकदम शुरुआती वेबसाइट है  https://zenhabits.net/. ऐसी कुछ और साइट्स आपको मदद करेंगी.

मिनिमलिज़्म कई मायनों में फायदेमंद
मिनिमलिज़्म कई मायनों में फायदेमंद, बस शुरुआती दिक्कतों से एक बार उबर जाएं तो


इस राह में आने वाली दिक्कतें...

1- एक बात अच्छी तरह से समझ लें, यह ओवरनाइट प्रॉसेस नहीं है. यह आप धीरे धीरे शुरू करते हैं और नतीजा धीरे धीरे ही प्राप्त करते हैं. इसलिए, इस बात से परेशान न हों कि अब क्या क्या हटाएं और फेंके. आपको केवल गैर जरूरी, या डुप्लिकेट या बैकअप के नाम पर अत्याधिक संग्रह, लग्जरी के सामान को घर के बाहर का रास्ता दिखाना है.

2- जब आप इस राह पर चलने लगेंगे तो शुरुआत में यह उलझाऊ, पकाऊ और अनमना लगेगा. ऐसा लगेगा कि सब फिज़ूल है. सोचेंगे- दुनिया क्या मूरख है जो चीजों का संग्रह करती है. आप महज 4 टीशर्ट हर हफ्ते रिपीट करके कॉलेज जाएंगे या फिर ऑफिस जाएंगे तो लोग टोक सकते हैं, यह आपको बुरा लग सकता है, लगेगा कि जलील होने से अच्छा है सामान्य रहना लेकिन यहां आप याद करें- मार्क जकरबर्ग, जिनका सेम और सॉफ्ट स्टाइल है. लेकिन लोग उन्हें उनके एक से रंगों वाले कपड़ों की वजह से खारिज तो नहीं करते! तो इस बारे में सच तो यह है कि एकाध बार के बाद यदि आप चीजों को दिल पर नहीं लेंगे और खुद के जीवन में इन बदलावों के चलते आने वाले फायदों पर फोकस करेंगे, तो आप इस तरह की शुरुआती बाधाओं को पार कर जाएंगे.

3- यह बात आखिर में बता रही हूं लेकिन यह महत्वपूर्ण है. अति न करें. फाइनेंशल बैकअप रखें, ऐसा नहीं कि निवेश जैसे गंभीर मामलों में सब बांट दें या खर्च कर दें. मॉडरेट रहें, इसे ऐसे समझें जैसे जब आप रनिंग शुरू करते हैं तब पहले हफ्ते में वॉक और ब्रिस्क वॉक करते हैं, उसके बाद मिक्स्ड वॉक और प्रॉपर रनिंग तक आते आते आपको लगभग महीना या 20 दिन का समय लगता है. इसी तरह मिनिमलिज्म को लेकर भी यही नीति अपनाएं.

मुझे याद है बीबीसी अर्थ टीवी चैनल पर करीब तीन साल पहले देखी गई एक सीरीज़ Where the Wild Men Are with Ben Fogle. बेन फोकल इसके हरेक एपिसोड में ऐसे आदमी- औरत/कपल से मिलते थे जिन्होंने पूंजीवादी/अतिभौतिकतावाद, लक्ज़री लाइफ से खुद को अचानक दूर करने का फैसला लिया और बेहद अलग तरह का जीवन यापन करने का फैसला लिया. मेरे लिए हैरानी की बात यह थी कि यह अलग तरह का जीवन यापन इतना अधिक ऑर्डनरी था कि इसे खुद पर लागू करने के ख्याल से ही हम पसोपेश में आ सकते हैं! लेकिन, निश्चित तौर पर लोगों ने इसे अपनाया और इसे जारी रखा. हालांकि मिनिमलिस्ट व्यक्ति अपनी वर्तमान जीवनचर्या को त्यागता नहीं बल्कि उसमें जरूरी संशोधन करता है. ट्राई करिए और फर्क देखिए

शुभकामनाएं :)

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First published: February 2, 2020, 9:04 PM IST
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