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मोदी सरकार ने माना बढ़ रही हैं बीमारियां, जिम्मेदार आपकी लाइफस्टाइल


Updated: December 3, 2019, 9:53 AM IST
मोदी सरकार ने माना बढ़ रही हैं बीमारियां, जिम्मेदार आपकी लाइफस्टाइल
देवास में शादी कार्यक्रम में खाना खाने से 100 से ज्यादा लोग हुए फूड पॉइजनिंग के शिकार (सांकेतिक तस्वीर)

मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोग (Cardio Vascular Disease) के मामले बढ़े हैं. हृदय रोग नागरिकों की मौत का सबसे बड़ा कराण बन गया है जो कि एक लाइफस्टाइल जनित रोग (Lifestyle Disease) है.

  • Last Updated: December 3, 2019, 9:53 AM IST
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नईदिल्ली. मोदी सरकार (Modi Government) ने माना है कि भारतीयों की बिगड़ती जीवनशैली (Indian Lifestyle) से देश में बीमारियां बढ़ रहीं है. लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विन चौबे (Minister of State for Health and Family welfare) ने कहा कि 1990 से 2016 के बीच इकट्ठे किए गए आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं. खासकर मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोग (Cardio Vascular Disease) के मामले बढ़े हैं. हृदय रोग नागरिकों की मौत का सबसे बड़ा कराण बन गया है जो कि एक लाइफस्टाइल जनित रोग (Lifestyle Disease) है.

एक प्रश्न का जवाब देते हुए चौबे ने कहा कि डायबिटीज के लिए जिम्मेदार बॉडी मास इण्डेक्स, लो फिजिकल एक्टिविटी और खानपान में लापरवाही में भी इजाफा दर्ज किया गया है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ में डायबिटीज की दर सबसे अधिक 13.6 प्रतिशत है जबकि मणिपुर में हायपरटेंशन की दर सबसे अधिक 30.8 फीसदी दर्ज गई गई है.

दो अन्य सर्वे के आंकड़ों की माने तो शहरी पूरुषों में डायबिटीज की संभावना 28 फीसदी से अधिक है जबकि ग्रामीण इलाकों में यह केवल 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई. इसी प्रकार शहर महिलाओं में भी ग्रामीण महिलाओं के मुकाबले डायबिटीज की संभावना लगभग 16 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई.

सबसे चिंताजनक बात यह कि शहरी के साथ साथ ग्रामीण इलाकों में भी बच्चों के अंदर मोटापे की बीमारी तेजी से पैर पसार रही है. हालांकि ग्रामीण इलाकों में कुपोषण अभी भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है.

केन्द्रीय मंत्री ने संसद में कहा कि सरकार के उपक्रम स्वास्थवर्धक खानपान के लिए लगातार जागरुकत अभियान चल रहे हैं. सरकार अपने ईट राइट इंडिया कार्यक्रम के तहत इस बात पर जोर दे रही है कि लोग अधिक वसा, नमक और चीनी खाने से बचें.

यही नहीं एनसीआरटी कि खाने की अच्छी आदतें और बेहतर पोषण को स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की भी अनुशंशा आसीएमआर की ओर से की गई है. इसके अलावा स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ उनके पोषण पर भी भूरपूर ध्यान दिया जा रहा है.

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First published: December 3, 2019, 9:53 AM IST
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