#MotivationalStory: ढेर सारा पैसा होने पर आप सुखी हो, जरूरी नहीं है

सिर्फ पैसा आपको बेहतर जीवन नहीं दिला सकता, इसके लिए बहुत सी दूसरी चीजों के बारे में विचार करना जरूरी है. ढेर सारा पैसा होने के बावजूद हो सकता है, आप दुखी हों.

News18Hindi
Updated: August 13, 2018, 6:13 PM IST
#MotivationalStory: ढेर सारा पैसा होने पर आप सुखी हो, जरूरी नहीं है
प्रेरक कथाएं
News18Hindi
Updated: August 13, 2018, 6:13 PM IST
किसी गांव में एक धनी सेठ रहता था. उसके बंगले के पास एक गरीब मोची की छोटी सी दुकान थी. वह मोची जब भी जूते सिलता तो भगवान के भजन गुनगुनाता, लेकिन सेठ ने कभी उसके भजनों की तरफ ध्यान नहीं दिया .

एक दिन सेठ काम के सिलसिले में विदेश गया और घर लौटते वक्त उसकी तबियत बहुत खराब हो गई. पैसे की कोई कमी तो थी नहीं, सो देश-विदेश से डॉक्टर, वैद्य, हकीमों को बुलाया गया लेकिन कोई भी सेठ की बीमारी का इलाज न कर सका. अब सेठ की तबियत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी. वह चल-फिर भी नहीं पाता था.
#MotivationalStory: भगवान कहीं और नहीं, आपके दिल में ही बसते हैं

एक दिन वह अपने बिस्तर पर लेटा था कि अचानक उसके कान में मोची के भजन की आवाज सुनाई दी. सेठ को आज मोची के भजन कुछ अच्छे लग रहे थे. कुछ ही देर में सेठ इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसे ऐसा लगा जैसे उसका साक्षात परमात्मा से मिलन कर रहा हो. मोची के भजन सेठ को उसकी बीमारी से दूर लेते जा रहे थे, कुछ देर के लिए सेठ भूल गया कि वह बीमार है.

कुछ दिन तक यही सिलसिला चलता रहा, अब धीरे धीरे सेठ के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा. एक दिन उसने मोची को बुलाया और कहा- “मेरी बीमारी का इलाज बड़े-बड़े डॉक्टर नहीं कर पाए लेकिन तुम्हारे भजन ने मेरा स्वास्थ्य सुधार दिया, ये लो 1000 रुपये इनाम.” मोची खुश होते हुए पैसे लेकर चला गया.

लेकिन उस रात मोची सो न सका. वो सारी रात यही सोचता रहा कि इतने सारे पैसों को कहां छुपा कर रखूं और इनसे क्या-क्या खरीद सकता हूं? इसी सोच की वजह से वो इतना परेशान हुआ कि अगले दिन काम पर भी नहीं जा पाया. अब भजन गाना तो जैसे वो भूल ही गया था, मन में खुशी थी तो सिर्फ पैसे की.

Motivational Story: मन की शांति के लिए मंत्र की जरूरत नहीं, आत्मचिंतन काफी है 

अब तो उसने काम पर जाना ही बंद कर दिया और धीरे धीरे उसकी दुकानदारी भी चौपट होने लगी . इधर उसेक काम पर न आने से सेठ की बीमारी फिर से बढ़ती जा रही थी .

एक दिन मोची सेठ के बंगले में आया और बोला सेठ जी आप अपने ये पैसे वापस रख लीजिए, इस धन की वजह से मेरा धंधा चौपट हो गया, मैं भजन गाना ही भूल गया. इस धन ने तो मेरा परमात्मा से नाता ही तुड़वा दिया. मोची पैसे वापस करके फिर से अपने काम में लग गया. कुछ दिन बाद वो फिर से दुकान पर काम करके पैसे कमाता और परमात्मा का ध्यान करता.

मन में ठान लिया जाए तो दुनिया में किसी को भी हराया जा सकता हैं

दोस्तों ये कहानी हमें सिखाती है कि किस तरह हम पैसों का लालच हमको अपनों से दूर ले जाता है. हम सब को भूल जाते हैं. यहां तक कि उस परमात्मा को भी जिसने हमें बनाया है. सिर्फ पैसा आपको बेहतर जीवन नहीं दिला सकता, इसके लिए बहुत सी दूसरी चीजों के बारे में विचार करना जरूरी है. ढेर सारा पैसा होने के बावजूद हो सकता है, आप दुखी हों.

बुद्धा उवाच, "जब तक आप न चाहें कोई आपका अपमान नहीं कर सकता"

क्या आप भी सोचते हैं कि ईश्वर है या नहीं, पढ़ें बुद्ध ने क्या कहा

अवसर हमेशा हमारे सामने से आते जाते रहते है पर हम उसे पहचान नहीं पाते
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर