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ज्यादा साफ-सफाई से करें परहेज, बच्चे हो सकते हैं अस्थमा का शिकार: शोध


Updated: February 19, 2020, 8:16 AM IST
ज्यादा साफ-सफाई से करें परहेज, बच्चे हो सकते हैं अस्थमा का शिकार: शोध
बहुत ज्यादा साफ-सफाई करने से बच्चों में अस्थमा की समस्या बढ़ रही है.

शोधकर्ताओं के अनुसार साफ-सफाई में उपयोग किए जाने वाले रसायनों के संपर्क में रहने वाले बच्चों की सांस की नली को नुकसान पहुंचता है. इससे श्वसन तंत्र में सूजन पैदा हो जाती है.

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कई लोगों की आदत होती है कि दिन भर घर की साफ -सफाई में ही लगे रहते हैं. घर के किसी भी कोने में गन्दगी हो तो वो तुरंत साफ-सफाई में जुट जाते हैं. वैसे घर में साफ-सफाई रखना एक अच्छी आदत है क्योंकि इससे घर में बीमारियां नहीं पनपती हैं. लेकिन हाल में ही यह बात सामने आई है कि घर की बहुत ज्यादा साफ-सफाई करने से बच्चों में अस्थमा की समस्या बढ़ रही है.

क्लीनिंग केमिकल हैं वजह:
एक शोध के अनुसार घर की साफ-सफाई में इस्तेमाल किए जा रहे उत्पादों व रसायनों और बच्चों को हो रहे अस्थमा के बीच गहरा कनेक्शन पाया गया है. शोधकर्ताओं ने इसके लिए 2000 नवजात बच्चों पर शोध किया. शोध में पाया गया कि जिन बच्चों के माता-पिता घर में लगातार डिशवॉश डिटर्जेंट, कपड़े धोने के डिटर्जेंट और जमीन को साफ करने वाले रसायनों को इस्तेमाल करते हैं उसमें अस्थमा की संभावना पाई जाती है. इससे बच्चों में तीन साल की उम्र में अस्थमा होने का खतरा 37 फीसदी तक बढ़ जाता है.

बच्चों में तीन साल की उम्र में अस्थमा होने का खतरा 37 फीसदी तक बढ़ जाता है.
बच्चों में तीन साल की उम्र में अस्थमा होने का खतरा 37 फीसदी तक बढ़ जाता है.




सांस की नली से पहुंचते हैं हानिकारक केमिकल:
शोधकर्ताओं के अनुसार साफ-सफाई में उपयोग किए जाने वाले रसायनों के संपर्क में रहने वाले बच्चों की सांस की नली को नुकसान पहुंचता है. इससे श्वसन तंत्र में सूजन पैदा हो जाती है. वैज्ञानिकों की माने तो गाड़ियों और उद्योगों की वजह से घर के बाहर हो रहे प्रदूषण के बाद अब घर के अंदर हो रहे प्रदूषण चिंता का विषय हैं.

अस्थमा के मरीजों को इन चीजों से बचना चाहिए:

1.अस्थमा के मरीजों को धूल, मिट्टी और पॉल्यूशन से बचना चाहिए. आप चाहें तो इसके लिए पॉल्यूशन मास्क का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

2.अस्थमा के मरीजों को दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.

 साफ-सफाई में उपयोग किए जाने वाले रसायनों के संपर्क में रहने वाले बच्चों की सांस की नली को नुकसान पहुंचता है.
साफ-सफाई में उपयोग किए जाने वाले रसायनों के संपर्क में रहने वाले बच्चों की सांस की नली को नुकसान पहुंचता है.


3.घरेलू नुस्खे के तौर पर अस्थमा के मरीजों को तुलसी के पत्तों में शहद और काली मिर्च भिगोकर खाना चाहिए. इससे उन्हें काफी आराम मिलता है.

4.दमा के रोगियों को रोजाना कम 10 से 12 गिलास पानी पीना चाहिए. दमा के रोगियों को समय-समय पर डॉक्टर का परामर्श लेते रहना चाहिए.

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First published: February 19, 2020, 8:03 AM IST
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