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भारत में 6.5% लोग गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित: रिपोर्ट

News18Hindi
Updated: October 10, 2019, 4:15 PM IST
भारत में 6.5% लोग गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित: रिपोर्ट
तनाव का प्रभाव न केवल किसी के मानसिक स्वास्थ्य पर दिखाता है बल्कि शारीरिक विकास पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

काम से जुड़ा स्ट्रेस, रिलेशनशिप का स्ट्रेस, पैसों से जुड़ा तनाव, इमोशन से जुड़ा तनाव, ऐंग्जाइटी, डिप्रेशन, बेचैनी ऐसे कई कारण हैं जो इंसान को मानसिक रूप से बीमार बनाते हैं.

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  • Last Updated: October 10, 2019, 4:15 PM IST
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मानसिक बीमारी से पीड़ित होने की कोई विशिष्ट उम्र नहीं है और यही कारण है कि भारतीयों में अवसाद, चिंता और तनाव एक बड़ी समस्या बन गया है. काम से जुड़ा स्ट्रेस, रिलेशनशिप का स्ट्रेस, पैसों से जुड़ा तनाव, इमोशन से जुड़ा तनाव, ऐंग्जाइटी, डिप्रेशन, बेचैनी ऐसे कई कारण हैं जो इंसान को मानसिक रूप से बीमार बनाते हैं. यही सारी चीजें भारत को दुनिया के सबसे डिप्रेस्ड देशों में से एक बना रहा है.  हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कोलंबिया एशिया अस्पताल के क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ श्वेता शर्मा ने कहा कि कुल भारतीय जनसंख्या के 6.5 प्रतिशत लोग किसी न किसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं. यह दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य एक व्यापक बीमारी के रूप में उभर रहा है. गंभीर मुद्दा यह है कि इसके लिए कोई विशेष आयु की जरूरत नहीं है, यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है.

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2030 तक तनाव दुनिया में बीमार होने का सबसे बड़ा कारण होगा

डॉ. श्वेता ने मानसिक बीमारियों के उपचार के साथ-साथ आम लोगों को सुझाव भी दिया. उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर सामान्य मानसिक बीमारियों के प्रभावी उपचार की उपलब्धता और पहुंच को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माताओं (Policy Makers) को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के आधार पर, 2030 तक अवसाद या तनाव दुनिया में बीमार होने का एकमात्र सबसे बड़ा कारण होगा. आत्महत्या के मामलों की बढ़ती संख्या, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी), गेमिंग की लत और युवाओं में स्ट्रेस काफी तेजी से बढ़ रहा है.

मानसिक रोगियों के प्रति समर्थन की आवश्यकता

तनाव का प्रभाव न केवल किसी के मानसिक स्वास्थ्य पर दिखाता है बल्कि शारीरिक विकास पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. आपको बता दें कि मानसिक और भावनात्मक अशांति धीरे-धीरे शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर अपना बुरा असर दिखाना शुरू कर सकती है. श्रुता वेलनेस के संस्थापक, प्रवर
गौड़ ने इस पर जोर दिया और कहा कि जागरूकता फैलाने, सहानुभूति विकसित करने और आवश्यकता को संबोधित करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाना जरूरी है. वहीं मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों के प्रति समर्थन की तत्काल आवश्यकता है.
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बच्चों में मानसिक बीमारी का पता लगाना मुश्किल

हालांकि माता-पिता या वयस्कों में किसी भी मानसिक बीमारी का पता लगाना आसान है लेकिन बच्चे को किसी तरह का तनाव, चिंता या अवसाद है या नहीं इसका पता लगा पाना मुश्किल होता है. पारस अस्पताल की क्लिनिकल साइकोलॉजी और मनोचिकित्सा विभागक की डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि उनके अनुभव में, 10 में से 9 माता-पिता को इस बात की जानकारी नहीं होती कि उनका बच्चा इस आत्मघाती घटना को अंजाम दे रहा है.

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First published: October 10, 2019, 4:06 PM IST
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