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मां से बच्चे का संवाद उसे मजबूत बनाता है, सामाजिक विकास में भी करता है मदद - स्टडी

मां से बच्चे का संवाद उसे मजबूत बनाता है, सामाजिक विकास में भी करता है मदद - स्टडी

जब बच्चा अपनी मां के साथ खेलता है, तो उस दौरान मां और बच्चा दोनों एक दूसरे के संकेतों का सहज रूप से जवाब दे रहे होते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

जब बच्चा अपनी मां के साथ खेलता है, तो उस दौरान मां और बच्चा दोनों एक दूसरे के संकेतों का सहज रूप से जवाब दे रहे होते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Mother and Child Communication : अमेरिका की इलिनोइस यूनिवर्सिटी (Illinois University) की स्टडी के अनुसार, जब बच्चा अपनी मां के साथ खेलता है, तो उस दौरान मां और बच्चा दोनों एक दूसरे के संकेतों का सहज रूप से जवाब दे रहे होते हैं. ये सकारात्मक बातचीत बच्चे के हेल्दी सोशल और इमोश्नल डेवलपमेंट में हेल्प करती है. इस स्टडी में ये देखा गया कि मां और बच्चे के खेलने के दौरान किस प्रकार शारीरिक और व्यवहारिक प्रतिक्रियाएं (physical and behavioral responses) कोऑर्डिनेट होती हैं. इस स्टडी के नतीजे रिएक्टिव डायलॉग (reactive dialogue) यानी प्रतिक्रियात्मक संवाद के महत्व को उजागर करते हैं. ये निष्कर्ष माता-पिता, डॉक्टरों और रिसर्चर्स को परख (insights) प्रदान करने में मदद कर सकते हैं.

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    Mother and Child Communication : एक बच्चे का सबसे ज्यादा लगाव अपनी मां से होता है. वो केवल आहार (दूध) के लिए ही अपनी मां पर निर्भर नहीं होता है, बल्कि उसका इमोश्नल अटैचमेंट भी होता है. यही वजह से मां से बच्चे का संवाद उसके मानसिक और भावनात्मक व्यवहार (mental and emotional behaviour) को प्रभावित करता है. अमेरिका की इलिनोइस यूनिवर्सिटी (Illinois University) की स्टडी के अनुसार, जब बच्चा अपनी मां के साथ खेलता है, तो उस दौरान मां और बच्चा दोनों एक दूसरे के संकेतों का सहज रूप से जवाब दे रहे होते हैं. ये सकारात्मक बातचीत बच्चे के हेल्दी सोशल और इमोश्नल डेवलपमेंट में हेल्प करती है. इस स्टडी में ये देखा गया कि मां और बच्चे के खेलने के दौरान किस प्रकार शारीरिक और व्यवहारिक प्रतिक्रियाएं (physical and behavioral responses) कोऑर्डिनेट होती हैं. इस स्टडी के नतीजे रिएक्टिव डायलॉग (reactive dialogue) यानी प्रतिक्रियात्मक संवाद के महत्व को उजागर करते हैं. ये निष्कर्ष माता-पिता, डॉक्टरों और रिसर्चर्स को परख (insights) प्रदान करने में मदद कर सकते हैं.

    इस स्टडी की प्रमुख रिसर्चर यानान हू (Yannan Hu) का कहना है कि हमारी स्टडी माताओं और बच्चों के बीच रियल टाइम में होने वाले उस शारीरिक और व्यवहारिक समन्वय (physical and practical coordination) को मापती है, जब वे एक दूसरे से बातचीत कर रहे होते हैं.

    डायलॉग और कोऑर्डिनेशन का पॉजिटिव इफैक्ट
    शोधकर्ता, मां और बच्चे के बीच होने वाले संवाद को और इस दौरान होने वाली प्रतिक्रियाओं को उनके सामाजिक-भावनात्मक विकास के लिए फायदेमंद मानते हैं. निष्कर्ष बताते हैं कि जिन बच्चों और माताओं में व्यवहारिक समन्वय शानदार होता है. वहां माताएं आमतौर पर संवाद के दौरान शारीरिक प्रतिक्रियाओं में बदलाव करती हैं. यानान हू (Yannan Hu) का कहना है कि कुल मिलाकर जब माताएं और बच्चे व्यवहारिक स्तर पर समन्वित होते हैं तो वे एक साथ काम करते हैं, बारी बारी से काम करते हैं और इसका उन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. बच्चे की फिजिकल एक्टिविटी में बदलाव से मां की फिजिकल एक्टिविटी में भी परिवर्तन आता है.  

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    वायरलेस एलेक्ट्रोड का किया गया यूज
    इस स्टडी में 110 माताओं  (Mothers) और उनके 3 से 5 साल के बच्चों को शामिल किया गया. प्रतिभागी इंटरैक्टिव प्ले सत्र के लिए इलिनोइस यूनिवर्सिटी की व्यवहार प्रयोगशाला (Behavioral Laboratory) आए. इस दौरान उनसे एक थ्री डी पहेली पूछी गई. इसे हल करने के लिए मां और बच्चे ने एक साथ काम किया. फिर दूसरी तरह के खिलौने का रुख किया और 5 मिनट तक खेले. इस दौरान रिसर्चर्स ने माताओं और बच्चों को वायरलेस इलेक्ट्रोड (हाथ पर लगाने वाली मशीन) (wireless electrode) से लैस किया, ताकि उनकी हार्ट बीट में होने वाले हाई फ्रिक्वेंसी बदलावों के जरिए उनकी पैरासिम्टोपैथिक प्रतिक्रिया को मापा जा सके, जिसे आरएसए श्वसन साइनस अतालता (Respiratory sinus arrhythmia) के रूप में जाना जाता है.

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    RSA में इजाफे से मां के जुड़ाव का संकेत
    रिसर्चर्स का कहना है कि आरएसए में सकारात्मक बदलाव से संकेत मिलता है कि मां और बच्चे सामाजिक रूप से जुड़ रहे हैं और एक दूसरे के साथ समन्वित हैं. तनाव या समस्या का सामना करते समय आमतौर पर आरएसए में कमी देखी जाती है.

    Tags: Lifestyle, Parenting

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