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कोरोना के बाद डॉक्‍टरों के प्रति कैसा है लोगों का रवैया, बता रहे हैं डॉ. विनय

कोरोना के बाद डॉक्‍टरों के प्रति कैसा है लोगों का रवैया, बता रहे हैं डॉ. विनय

कोरोना के बाद डॉक्‍टरों के प्रति लोगों का रवैया बदल गया है.

कोरोना के बाद डॉक्‍टरों के प्रति लोगों का रवैया बदल गया है.

National Doctor's Day 2022: कोरोना के बाद पहली बार हुआ है कि अब स्‍वास्‍थ्य पब्लिक प्‍लेटफार्म का बड़ा मुद्दा बन गया है. आम लोगों ने ऑनलाइन प्‍लेटफार्म का इस्‍तेमाल करके बीमारियों और स्‍वास्‍थ्‍यगत उपायों को लेकर अपनी जानकारी बढ़ाई है. यहां लोगों ने डॉक्‍टरों से, विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया है. बीमारियों को समझा है. बीमारियों से बचाव के उपाया और हेल्‍थ सिस्‍टम को और अधिक अच्‍छा बनाने के उपाय भी सीखे हैं.

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National Doctor’s Day 2022: हमारे देश में चिकित्‍सकों या डॉक्‍टरों को हमेशा से ही भगवान का दूसरा रूप माना जाता है. गंभीर और असाध्‍य रोगों से जूझ रहे मरीजों को नई जिंदगी देने वाले डॉक्‍टरों के प्रति पहले से ही यहां सम्‍मान की भावना रही है लेकिन पिछले दो सालों में कोरोना महामारी में डॉक्‍टर एक अलग ही भूमिका में सामने आए हैं. कोरोना महामारी में जहां हजारों लोगों ने अपनों को खो दिया वहीं लाखों लोग ऐसे भी हैं जिन्‍होंने डॉक्‍टरोंं की वजह से खुद को और अपने परिजनों को मौत के मुंह से वापस आते देखा. ऐसी स्थिति में डॉक्‍टरों के प्रति भी लोगों का व्‍यवहार काफी बदल गया है. खुद डॉक्‍टरों की मानें तो डॉक्‍टर चाहे सरकारी या प्राइवेट है, ऐलोपैथी, होम्‍योपैथी या आयुर्वेद किसी से भी जुड़ा रहा है, कोविड के बाद इनके प्रति लोगों का रवैया बदल गया है.

अपोलो अस्‍पताल बंगलुरू के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. विनय डी कहते हैं कि कोरोना के बाद से डॉक्‍टरों के रोगों की पहचान और इजाज करने की योग्‍यता पर लोगों को भरोसा बढ़ा है. इस गूगल सेवी पीढ़ी में जबकि लोग खुद ही ऑनलाइन पढ़ के अपनी गंभीर से गंभीर बीमारियों की भी पहचान करने की कोशिश करते हैं, कोरोना के बाद से उन्‍हें सेल्‍फ डायग्‍नोसिस के नुकसान पता चले हैं और हेल्‍थ केयर से जुड़े लोगों के पास सही इलाज के लिए बिना किसी झिझक के जाने का चलन बढ़ा है.

एलोपैथी, होम्‍योपैथी चाहे आयुर्वेद, डॉक्‍टरों के प्रति बढ़ा लोगों का झुकाव
इतना ही नहीं लोगों को बीमारियों से बचाव के लिए सलाह देने वाले आयुर्वेद, होम्‍योपैथी, योग और अन्‍य पारंपरिक चिकित्‍साओं से जुड़े लोगों के प्रति भी लोगों का झुकाव तेजी से बढ़ा है. लोगों को नियमित स्‍वास्‍थ्‍य जांच का महत्‍व पता चला है. कोरोना की तरह अन्‍य संक्रामक बीमारियों के रिस्‍क का पता लगाने के लिए भी लोग अब डॉक्‍टरों से सलाह लेना पसंद कर रहे हैं. लोग अपने स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति जागरुक हो रहे हैं. डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी क्रॉनिक बीमारियों को लेकर भी लोगों में समझ पैदा हुई है.

डॉक्‍टरों का वैक्‍सीनेशन पर बढ़ा भरोसा

Tags: Apollo Hospital, Doctor

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