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इतिहास से लेकर महत्व तक, जानें क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस

मई के तीसरे शुक्रवार को मनाया जाता है राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस

मई के तीसरे शुक्रवार को मनाया जाता है राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस

ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर धरती पर रह रहे जीव-जतुंओ के लिए खतरा बन चुका है. तेजी से बढ़ते तापमान के मद्देनजर धरती से कई जीव-जतुं विलुप्त होने की कगार पर हैं. इसी मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने हर साल राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाने का एलान किया. इस साल राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस 21 मई को मनाया जाने वाला है. ऐसे में राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाने के इतिहास और इसके वास्तविक महत्व को समझना सभी के लिए आवश्यक हो जाता है.

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National Endangered Species Day 2022: आमतौर पर पृथ्वी को प्रकृति और जीव-जंतुओं का समागम कहा जाता है. पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर वर्तमाल काल तक, यहां अनगिनत जीव-जंतुओं का भंडार मौजूद है. वहीं समय के साथ कुछ जीव-जंतु पृथ्वी से विलुप्त भी हो जाते हैं. डायनॉसोर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इसी मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए हर साल मई के तीसरे शुक्रवार को राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाया जाता है. इस साल भी राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस 20 मई यानी आज मनाया जा रहा है. हालांकि, क्या आप इस दिन को मनाने के महत्व और इसके इतिहास से वाकिफ हैं.

दरअसल, पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और कीड़े-मकौड़े सभी जीव-जतुंओं की फेहरिस्त में शामिल हैं. हालांकि, समय के साथ पेड़ों की कटाई, तेजी से कम होते जंगल और जलवायु परिवर्तन के चलते जीव-जतुंओं की कई प्रजातियां पृथ्वी से विलुप्त होने की कगार पर हैं. इसी गंभीर मुद्दे से लोगों को अवगत कराने के लिए हर साल राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाया जाता है. तो आइए जानते हैं इस दिन में बारे में विस्तार से.

राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस का इतिहास
सबसे पहले 1960 के दशक में लोगों ने धरती से लगातार लुप्त हो रही कई प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया. जिसके बाद 1972 में पहली बार अमेरिका में लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए कानून अस्तित्व में आया. वहीं तेजी से बढ़ती ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ ने साल 2006 में मई के तीसरे शुक्रवार को लुप्तप्राय प्रजाति दिवस के रूप में मनाने का एलान किया. जिसके बाद हर साल इसी दिन को राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाया जाने लगा.

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राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस का महत्व
बेशक पृथ्वी से लुप्त हो रहे जीव-जतुंओं का संरक्षण एक गंभीर मुद्दा है. हालांकि, दुनिया का बड़ा वर्ग अभी भी इस समस्या से पूरी तरह अनभिज्ञ है. ऐसे में राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस पर दुनिया के अलग-अलग कोनों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के जरिए लोगों को लुप्त हो रही प्रजातियों के प्रति जागरुक कराया जाता है. साथ ही इस दौरान लोगों को जीव-जतुंओं की विलुप्त होने का कारण बताते हुए इनके संक्षरण पर जोर दिया जाता है.

Tags: Day, Lifestyle

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