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New Year Poems: खास अंदाज में करें नए साल का स्वागत, सोशल मीडिया पर पोस्ट करें ये हिंदी कविताएं

New Year Poems: खास अंदाज में करें नए साल का स्वागत, सोशल मीडिया पर पोस्ट करें ये हिंदी कविताएं

नव वर्ष की कविताएं

नव वर्ष की कविताएं

New Year 2022 Poems In Hindi: हरिवंशराय बच्चन समेत कई सारे कवियों ने नए साल का स्वागत करते हुए बहुत सुंदर कविताएं (Poems) लिखी हैं. जिन्हें आप सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकते हैं और खास अँदाज में सबको नव वर्ष (New Year) ​की शgभकामनाएं दे सकते हैं

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    New Year 2022 Poems In Hindi: हमेशा से ही साल की शुरुआत लोग अपनों के साथ खुशियां मनाते हुए करना चाहते हैं. न्यू ईयर ईव (New Year Eve) के लिए बहुत पहले से ही प्लानिंग शुरू हो जाती है. कई लोग बाहर जा कर खाना खाते हैं तो कई लोग पब में डांस करने पसंद करते हैं. कई सोसाइटीज में भी कल्चरल प्रोग्राम (Cultural program) आयोजित किए जाते हैं.

    कोविड 19 (COVID19) के पुराने आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए और ओमीक्रॉन (Omicron) के खतरे के बीच कई लोग इस बार पार्टी करने से परहेज करने की ही सोच रहे हैं. ऐसे में अगर आप नए साल के स्वागत को खास बनाना चाहते हैं तो सोशल मीडिया पर या मैसज के जरिए नव वर्ष की मशहूर कविताएं साझा कर सकते हैं.

    नव वर्ष की कविताएं (New Year Poems)

    नववर्ष

    स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
    आओ, नूतन-निर्माण लिये,
    इस महा जागरण के युग में
    जाग्रत जीवन अभिमान लिये;

    दीनों दुखियों का त्राण लिये
    मानवता का कल्याण लिये,
    स्वागत! नवयुग के नवल वर्ष!
    तुम आओ स्वर्ण-विहान लिये।

    संसार क्षितिज पर महाक्रान्ति
    की ज्वालाओं के गान लिये,
    मेरे भारत के लिये नई
    प्रेरणा नया उत्थान लिये;

    मुर्दा शरीर में नये प्राण
    प्राणों में नव अरमान लिये,
    स्वागत!स्वागत! मेरे आगत!
    तुम आओ स्वर्ण विहान लिये!

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    युग-युग तक पिसते आये
    कृषकों को जीवन-दान लिये,
    कंकाल-मात्र रह गये शेष
    मजदूरों का नव त्राण लिये;

    श्रमिकों का नव संगठन लिये,
    पददलितों का उत्थान लिये;
    स्वागत!स्वागत! मेरे आगत!
    तुम आओ स्वर्ण विहान लिये!

    सत्ताधारी साम्राज्यवाद के
    मद का चिर-अवसान लिये,
    दुर्बल को अभयदान,
    भूखे को रोटी का सामान लिये;

    जीवन में नूतन क्रान्ति
    क्रान्ति में नये-नये बलिदान लिये,
    स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
    आओ, तुम स्वर्ण विहान लिये!

    – सोहनलाल द्विवेदी

    आओ, नूतन वर्ष मना लें

    आओ, नूतन वर्ष मना लें!

    गृह-विहीन बन वन-प्रयास का
    तप्त आँसुओं, तप्त श्वास का,
    एक और युग बीत रहा है, आओ इस पर हर्ष मना लें!
    आओ, नूतन वर्ष मना लें!

    उठो, मिटा दें आशाओं को,
    दबी छिपी अभिलाषाओं को,
    आओ, निर्ममता से उर में यह अंतिम संघर्ष मना लें!
    आओ, नूतन वर्ष मना लें!

    हुई बहुत दिन खेल मिचौनी,
    बात यही थी निश्चित होनी,
    आओ, सदा दुखी रहने का जीवन में आदर्श बना लें!
    आओ, नूतन वर्ष मना लें!

    – हरिवंशराय बच्चन

    नवल हर्षमय नवल वर्ष यह

    नवल हर्षमय नवल वर्ष यह,
    कल की चिन्ता भूलो क्षण भर;
    लाला के रँग की हाला भर
    प्याला मदिर धरो अधरों पर!
    फेन-वलय मृदु बाँह पुलकमय
    स्वप्न पाश सी रहे कंठ में,
    निष्ठुर गगन हमें जितने क्षण
    प्रेयसि, जीवित धरे दया कर!

    – सुमित्रानंदन पंत

    गए साल की

    गए साल की
    ठिठकी ठिठकी ठिठुरन
    नए साल के
    नए सूर्य ने तोड़ी।

    देश-काल पर,
    धूप-चढ़ गई,
    हवा गरम हो फैली,
    पौरुष के पेड़ों के पत्ते
    चेतन चमके।

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    दर्पण-देही
    दसों दिशाएँ
    रंग-रूप की
    दुनिया बिम्बित करतीं,
    मानव-मन में
    ज्योति-तरंगे उठतीं।

    – केदारनाथ अग्रवाल

    साल मुबारक!

    जैसे सोच की कंघी में से
    एक दंदा टूट गया
    जैसे समझ के कुर्ते का
    एक चीथड़ा उड़ गया
    जैसे आस्था की आँखों में
    एक तिनका चुभ गया
    नींद ने जैसे अपने हाथों में
    सपने का जलता कोयला पकड़ लिया
    नया साल कुझ ऐसे आया…

    जैसे दिल के फ़िक़रे से
    एक अक्षर बुझ गया
    जैसे विश्वास के काग़ज़ पर
    सियाही गिर गयी
    जैसे समय के होंटो से
    एक गहरी साँस निकल गयी
    और आदमज़ात की आँखों में
    जैसे एक आँसू भर आया
    नया साल कुछ ऐसे आया…

    जैसे इश्क़ की ज़बान पर
    एक छाला उठ आया
    सभ्यता की बाँहों में से
    एक चूड़ी टूट गयी
    इतिहास की अंगूठी में से
    एक नीलम गिर गया
    और जैसे धरती ने आसमान का
    एक बड़ा उदास-सा ख़त पढ़ा
    नया साल कुछ ऐसे आया…

    -अमृता प्रीतम

    Tags: Happy new year, Lifestyle, Literature, New Year Celebration

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