लाइव टीवी

निर्मल वर्मा जन्मदिन विशेष: 'जब हम बूढ़े हो जाते हैं तो समय ठहर जाता है और मृत्यु हमारे पीछे भागती है'

News18Hindi
Updated: April 3, 2020, 7:23 PM IST
निर्मल वर्मा जन्मदिन विशेष: 'जब हम बूढ़े हो जाते हैं तो समय ठहर जाता है और मृत्यु हमारे पीछे भागती है'
हिन्दी साहित्य में नई कहानी आंदोलन के प्रमुख निर्मल वर्मा का, कहानी में आधुनिकता का बोध लाने वाले कहानीकारों में अग्रणी स्थान है.

भावनाओं को कलात्मकता से प्रतिबिंबित करने वाले निर्मल वर्मा माहौल, संबंध और प्रेम को अपने मूल रूप में जैसे उकेरते गए, वह साहित्य और लेखन को नई ऊंचाइयों पर ले गया.

  • Share this:
साहित्यकार निर्मल वर्मा (Nirmal Verma) की लेखनी को पढ़ना ऐसा लगता है जैसे कि आप एक अलग ही दुनिया में हों. आप उनकी उंगलियों को पकड़कर संवेदनाओं की सुदूर, गहराती दुनिया में चले जा सकते हैं. न तो उंगली छुड़ा पाना आसान और न ही भागकर लौट आना. कोई भी व्यक्ति निर्मल वर्मा की लेखनी के दर्द और सुख के खूबसूरत मायाजाल से बाहर निकलना नहीं चाहेगा. आज उनकी बात इसलिए हे रही है क्योंकि आज 3 अप्रैल को उस महान साहित्यकार का जन्मदिन है. हिन्दी साहित्य में नई कहानी आंदोलन के प्रमुख निर्मल वर्मा का, कहानी में आधुनिकता का बोध लाने वाले कहानीकारों में अग्रणी स्थान है.

इसे भी पढ़ेंः वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर इस की आदत भी आदमी सी है, पढ़िए मशहूर शायर गुलजार की कविताएं

साहित्य समाज को एक विशेष कोष
हिन्दी की वरिष्ठ कहानीकार कृष्णा सोबती ने कहा है कि निर्मल वर्मा जैसे कई साहित्यकार जीवन के अंतिम समय में जिस परेशानी से गुजरे उसे देखते हुए साहित्य समाज को एक विशेष कोष का निर्माण करना चाहिए ताकि साहित्य सेवा करने वाला कोई व्यक्ति फिर इस दौर से न गुजर सके. निर्मल वर्मा का जन्म 03 अप्रैल 1929 को शिमला में हुआ था. उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कालेज से इतिहास में एमए किया. इसके बाद वह कुछ दिनों तक अध्यापन से जुड़े रहे. 1959 से 1972 के बीच उन्हें यूरोप प्रवास का अवसर मिला. वह प्राग विश्वविद्यालय के प्राच्य विद्या संस्थान में 07 साल तक रहे.



ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए गए


उनकी कहानी ‘माया दर्पण’ पर 1973 में फिल्म बनी जिसे सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म का पुरस्कार मिला. उनकी कलम से कुल पांच फिल्मों की कहानियां लिखी गई हैं. 1999 में वह देश के सबसे बड़े साहित्य सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए गए. उन्होंने विश्व की 9 प्रख्यात कृतियों का हिन्दी अनुवाद भी किया था. भावनाओं को कलात्मकता से प्रतिबिंबित करने वाले निर्मल वर्मा माहौल, संबंध और प्रेम को अपने मूल रूप में जैसे उकेरते गए, वह साहित्य और लेखन को नई ऊंचाइयों पर ले गया. 25 अक्टूबर 2005 को उनका निधन हो गया.

निर्मल वर्मा के कुछ उद्धरण

वह हर किताब का पन्ना मोड़ देता है ताकि अगली बार जब वह पढ़ना शुरू करे तो याद रहे, पिछली बार कहां छोड़ा था. एक दिन जब वह नहीं रहेगा, तो इन किताबों में मुड़े हुए पन्ने अपने-आप सीधे हो जाएंगे—पाठक की मुकम्मिल जिंदगी को अपने अधूरेपन से ढंकते हुए…

जब हम जवान होते हैं, हम समय के खिलाफ भागते हैं, लेकिन ज्यों-ज्यों बूढ़े होते जाते हैं, हम ठहर जाते हैं, समय भी ठहर जाता है, सिर्फ मृत्यु भागती है, हमारी तरफ..

साहित्य हमें पानी नहीं देता, वह सिर्फ हमें अपनी प्यास का बोध कराता है. जब तुम स्वप्न में पानी पीते हो, तो जागने पर सहसा एहसास होता है कि तुम सचमुच कितने प्यासे थे..

हम अपने को सिर्फ अपनी संभावनाओं की कसौटी पर नाप सकते हैं. जिसने अपनी संभावनाओं को आखिरी बूंद तक निचोड़ लिया हो, उसे मृत्यु के क्षण की कोई चिंता नहीं करनी चाहिए..

इसे भी पढ़ेंः ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो, पढ़िए मशहूर शायर बशीर बद्र की कविताएं

आदमी को पूरी निर्ममता से अपने अतीत में किए कार्यों की चीर-फाड़ करनी चाहिए, ताकि वह इतना साहस जुटा सके कि हर दिन थोड़ा-सा जी सके..

जब तक तुम्हारा संपूर्ण अस्तित्व अर्थ की कामना नहीं करता, तब तक तुम एक मृत व्यक्ति हो. मुश्किल यह है कि जब तक मृत्यु का स्पर्श नहीं मिलता, तब तक हम अर्थ की कामना नहीं करते.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लाइफ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 3, 2020, 7:19 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading