कोई तब तक आपका अपमान नहीं कर सकता जब तक आप इजाजत नहीं देते

शिष्य बोला- लेकिन तथागत, उस धूर्त ने आपके प्रति भी अपशब्दों का उपयोग किया है. आपको चलना ही होगा. आपको देखते ही वह अवश्य शर्मिंदा हो जाएगा और अपने किए की क्षमा मांगेगा. बस, मैं संतुष्ट हो जाऊंगा.


Updated: May 18, 2018, 3:35 PM IST
कोई तब तक आपका अपमान नहीं कर सकता जब तक आप इजाजत नहीं देते
बुद्ध के प्रेरक प्रसंग

Updated: May 18, 2018, 3:35 PM IST
एक शाम महात्मा बुद्ध बैठे हुए थे. वे डूबते सूर्य को एकटक देख रहे थे.

तभी उनका शिष्य आया और गुस्से में बोला- गुरुजी रामजी नाम के जमींदार ने मेरा अपमान किया है. आप तुरंत चलें, उसे उसकी मूर्खता का सबक सिखाना होगा.

महात्मा बुद्ध मुस्कुराकर बोले- प्रिय तुम बौद्ध हो, सच्चे बौद्ध का अपमान करने की शक्ति किसी में नहीं होती. तुम इस प्रसंग को भुलाने की कोशिश करो.

जब प्रसंग को भूला दोगे, तो अपमान कहां बचेगा.

शिष्य बोला- लेकिन तथागत, उस धूर्त ने आपके प्रति भी अपशब्दों का उपयोग किया है. आपको चलना ही होगा. आपको देखते ही वह अवश्य शर्मिंदा हो जाएगा और अपने किए की क्षमा मांगेगा. बस, मैं संतुष्ट हो जाऊंगा.

बुद्ध समझ गए शिष्य बदला लेना चाहता है.

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महात्मा बुद्ध समझ गए कि शिष्य में बदले की भावना प्रबल हो उठी है. अभी इसे उपदेश देने का लाभ नहीं है.

कुछ विचार करते हुए बुद्ध बोले- अच्छा वत्स यदि ऐसी बात है तो मैं अवश्य ही रामजी के पास चलूंगा और उसे समझाने की पूरी कोशिश करूंगा. बुद्ध ने कहा, हम सुबह चलेंगे और शिष्य ने इस बात को मान लिया.

अगले दिन सुबह हुई, बात आई-गई हो गई. शिष्य अपने काम में लग गया और महात्मा बुद्ध अपनी साधना में.

जब दोपहर होने पर भी शिष्य ने बुद्ध से कुछ नहीं कहा तो बुद्ध ने स्वयं ही शिष्य से पूछा- आज रामजी के पास चलोगे ना?

शिष्य बोला- नहीं गुरुवर. मैंने जब घटना पर फिर से विचार किया तो मुझे इस बात का आभास हुआ कि भूल मेरी ही थी. मुझे अपनी गलती का भारी पश्चाताप है. अब रामजी के पास चलने की कोई जरूरत नहीं.

तब तथागत ने हंसते हुए कहा- अगर ऐसी बात है तो अब जरूर ही हमें रामजी के पास चलना होगा. अपनी भूल की क्षमा याचना नहीं करोगे.

ये प्रसंग इस बात को सिखाता है कि अपमान और सम्मान दोनों आपकी दृष्टि पर निर्भर करता है. साथ ही किसी व्यक्ति की भूल को भुला देना और अपने कार्यों का मूल्यांकन करने से जीवन सरल हो जाता है..

 
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