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Lockdown के कारण पृथ्वी पर शोर हुआ कम, अब हो सकेगी भूकंप की सटीक भविष्यवाणीः शोध


Updated: April 3, 2020, 7:39 AM IST
Lockdown के कारण पृथ्वी पर शोर हुआ कम, अब हो सकेगी भूकंप की सटीक भविष्यवाणीः शोध
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में आवाज का ये स्तर काफी कम पाया गया है.

इंसानी गतिविधियां कम होने के कारण पृथ्वी से आने वाली आवाजों में भी कमी आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि पृथ्वी से आने वाली कंपन की आवाज में कमी आने का सीधा कारण लॉकडाउन की वजह से लोगों का घर पर रहना है.

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पृथ्वी की सतह पर होने वाली कंपन की निगरानी करने वाले वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से आने वाली आवाजों में काफी कमी देखी है. दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन को इसकी वजह बताई जा रही है.

ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे ने सिस्मोमीटर की मदद से लंदन में जो डाटा एकत्रित किया है, उसमें देखा गया है कि इंसानी गतिविधियां कम होने के कारण पृथ्वी से आने वाली आवाजों में भी कमी आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि पृथ्वी से आने वाली कंपन की आवाज में कमी आने का सीधा कारण लॉकडाउन की वजह से लोगों का घर पर रहना है.

क्या है सिस्मोमीटर ?



सिस्मोमीटर एक ऐसा यंत्र होता है जो सिस्मिक तरंगों को या कंपनों को मापते हैं. ये उपकरण पृथ्वी की सतह से उठने वाली कंपनों के अलावा इंसानी गतिविधियों, उद्योगों और ट्रैफिक की कंपनों की भी निगरानी करता है. इसमें काफी उच्च फ्रीक्वेंसी वाली आवाज सुनाई देती हैं.



इन देशों में महसूस किया गया बदलाव

शोधकर्ताओं के अनुसार सर्वे के सिस्मोमीटर के डाटा का इस्तेमाल किया गया. इससे पता चला है कि सड़कों पर बेहद कम ट्रैफिक है. इसे एम4 मोटरवे में लगाया गया था. लॉकडाउन के कारण पृथ्वी के कंपनों में आने वाले बदलाव को लंदन के अलावा पेरिस, ब्रसेल्स, लॉस एंजिलिस और ऑकलैंड में भी महसूस किया गया है . पिछले कुछ हफ्तों में आवाज का ये स्तर काफी कम पाया गया है. कुछ ऐसे ही बदलाव क्रिसमस के दौरान भी देखने को मिलता है जब सभी लोग अपने घरों में रहते हैं. लेकिन, इस बार इसका ज्यादा प्रभाव देखा जा रहा है.

रॉयल ऑब्जर्वेट्री ऑफ बेल्जियम के भूगोलविद थॉमस लीकोक ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है जो पृथ्वी की आवाजों में होने वाले बदलावों को दर्शाता है. पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है.

हो सकेगी भूकंप की सटीक भविष्यवाणी

विशेषज्ञों ने कहा कि जो वैज्ञानिक भूकंप की पहचान करने का काम करते हैं उनके लिए मानव गतिविधि के बिना और उसके साथ कंपनों के स्तर में होने वाले बदलाव को मापना आसान था. विशेषज्ञों ने कहा कि इंसानों द्वारा उत्पन्न की जाने वाले आवाजों की पहचान करके उन्हें पृथ्वी की कंपन की आवाजों से अलग कर दिया जाए तो भूकंप आने की भविष्यवाणी की जा सकती है. विशेषज्ञों ने कहा कि इंसानी गतिविधियों के अलावा हवा और समुद्र भी आवाज उत्पन्न करते हैं. इंसानी गतिविधियों से पैदा होने वाली आवाजों के साथ अगर अन्य प्राकृतिक आवाजों को भी डाटा से हटा दिया जाए तो भूकंप की भविष्यवाणी और सटीक हो सकती है.

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First published: April 3, 2020, 7:24 AM IST
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