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ओम प्रकाश वाल्मीकि पुण्य तिथि विशेष: काम के बदले दिया जाय खाने को जूठन तब तुम क्या करोगे?

ओम प्रकाश वाल्मीकि पुण्य तिथि विशेष: काम के बदले दिया जाय खाने को जूठन तब तुम क्या करोगे?

दलित साहित्य के प्रतिनिधि रचनाकार कहे जाने वाले लेखक और कवि ओमप्रकाश वाल्मीकि की आज पुण्यतिथि है.

दलित साहित्य के प्रतिनिधि रचनाकार कहे जाने वाले लेखक और कवि ओमप्रकाश वाल्मीकि की आज पुण्यतिथि है.

ओमप्रकाश वाल्मीकि पुण्यतिथि (Omprakash Valmiki):ओमप्रकाश वाल्मीकि ने हिंदी जगत में दलित साहित्य के विकास में अहम योगदान दिया. उनकी कविताओं में भी दलित जनों के लिए पीड़ा झलकती थी.

    दलित साहित्य (Dalit literature) के प्रतिनिधि रचनाकार कहे जाने वाले लेखक और कवि ओमप्रकाश वाल्मीकि (Omprakash Valmiki)की आज पुण्यतिथि है. उनका जन्‍म 30 जून 1950 को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुजफ्फरनगर जिले के बरला गांव में एक वाल्‍मीकि परिवार में हुआ था. उनको जन्म से अछूत माना जाता था. उनकी रचनाओं में दलित प्रेम और कथाओं का संगम देखने को मिलता है. इसी कारण उनको दलित साहित्य के प्रतिनिधि रचनाकारों में से एक माना जाता है. ओमप्रकाश वाल्मीकि ने हिंदी जगत में दलित साहित्य के विकास में अहम योगदान दिया है.

    इनका जन्म एक अछूत परिवार में हुआ था, इस कारण उनको शुरुआत में छुआछूत, सामाजिक भेदभाव और असमानता का शिकार होना पड़ा. यही कारण है कि उन्होंने अपने इस अनुभव को अपनी कविताओं में जगह दी और दलितों की पीड़ा को उजागर किया.
    आत्मकथा जूठन में क्या है
    आत्मकथा में लेखक ने बताया है कि आज़ादी के मिलने और आधुनिकता के तमाम आयातित अथवा मौलिक रूपों को भीतर तक आत्मसात करने के बावजूद आज भी हम कहीं-न-कहीं सवर्ण और अवर्ण के दायरों में बंटे हुए हैं. सिद्धान्तों और किताबी बहसों से बाहर, जीवन में हमें आज भी अनेक उदाहरण मिल जाएंगे, जिनसे हमारी जाति और वर्णगत असहिष्णुता स्पष्ट दिखती है.‘जूठन’ ऐसे ही उदाहरणों की शृंखला है, जिन्हें एक दलित व्यक्ति ने अपनी पूरी संवेदनशीलता के साथ खुद भोगा है.
    आइए पढ़ते हैं ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा जूठन के कुछ अंश...

    यदि तुम्हें ,
    धकेलकर गांव से बाहर कर दिया जाय
    पानी तक न लेने दिया जाय कुएं से
    दुत्कारा फटकारा जाय चिल-चिलाती दोपहर में
    कहा जाय तोड़ने को पत्थर
    काम के बदले
    दिया जाय खाने को जूठन
    तब तुम क्या करोगे ?

    **

    यदि तुम्हें ,
    मरे जानवर को खींचकर
    ले जाने के लिए कहा जाय
    और
    कहा जाय ढोने को
    पूरे परिवार का मैला
    पहनने को दी जाय उतरन
    तब तुम क्या करोगे ?

    **

    यदि तुम्हें ,
    पुस्तकों से दूर रखा जाय
    जाने नहीं दिया जाय
    विद्या मंदिर की चौखट तक
    ढिबरी की मंद रोशनी में
    काली पुती दीवारों पर
    ईसा की तरह टांग दिया जाय
    तब तुम क्या करोगे ?

    **

    'दिल में इक लहर सी उठी है अभी' पढ़ें 'नासिर' रज़ा काज़मी का दर्द से लबरेज़ कलाम

    यदि तुम्हें ,
    रहने को दिया जाय
    फूस का कच्चा घर
    वक्त-बे-वक्त फूंक कर जिसे
    स्वाहा कर दिया जाय
    बर्षा की रातों में
    घुटने-घुटने पानी में
    सोने को कहा जाय
    तब तुम क्या करोगे ?

    ***

    यदि तुम्हें ,
    अपने ही देश में नकार दिया जाय
    मानकर बंधुआ
    छीन लिए जायं अधिकार सभी
    जला दी जाय समूची सभ्यता तुम्हारी
    नोच-नोच कर
    फेंक दिए जाएं
    गौरव में इतिहास के पृष्ठ तुम्हारे
    तब तुम क्या करोगे ?

    'चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है', पढ़ें 'हसरत' मोहानी का इश्‍क़ से सराबोर कलाम

    **

    यदि तुम्हें ,
    सरे आम बेइज्जत किया जाय
    छीन ली जाय संपत्ति तुम्हारी
    धर्म के नाम पर
    कहा जाय बनने को देवदासी
    तुम्हारी स्त्रियों को
    कराई जाय उनसे वेश्यावृत्ति
    तब तुम क्या करोगे ?

     

    Tags: Lifestyle, Trending

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