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लद्दाखः इस बार छुट्टियों में पहुंच जाएं 'बर्फीला रेगिस्तान', नीला पानी और घने बादल कर देंगे जादू

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Updated: October 31, 2019, 11:23 AM IST
लद्दाखः इस बार छुट्टियों में पहुंच जाएं 'बर्फीला रेगिस्तान', नीला पानी और घने बादल कर देंगे जादू
खेलप्रेमियों के लिए भी लद्दाख एक बेहतरीन जगह है. दिसंबर से फरवरी तक यहां आईस हॉकी का मजा लिया जा सकता है.

लद्दाख की बेहतरीन खूबसूरती यहां आने वाले हर पर्यटक के दिल में अपनी एक अलग छाप बना देती है. लद्दाख की ऊंचाई इतनी है जैसे कि धरती और आकाश के बीच खड़े हों.

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  • Last Updated: October 31, 2019, 11:23 AM IST
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जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख का भी इतिहास बदल गया है. आज से लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया है. इसी के साथ ही अब लद्दाख जम्मू-कश्मीर राज्य से अलग हो गया है. बर्फ से ढंकी ऊंची चोटियां, हिमनदी, रेत के टीले, चमकती सुबह के साथ घने बादल, दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर स्थित लद्दाख का यह परिदृश्य है. लद्दाख उत्तर की तरफ से काराकोरम और दक्षिण की तरफ हिमालय से घिरा हुआ है. लगभग 9,000 से 25,170 फीट की ऊंचाई पर यह स्थित है. लद्दाख पहुंचने पर ऐसा महसूस होता है मानो पूरी दुनिया की छत पर घूम रहे हों.

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लद्दाख को बर्फीला रेगिस्तान भी कहा जाता है

लद्दाख की बेहतरीन खूबसूरती यहां आने वाले हर पर्यटक के दिल में अपनी एक अलग छाप बना देती है. लद्दाख की ऊंचाई इतनी है जैसे कि धरती और आकाश के बीच खड़े हों. लद्दाख को बर्फीला रेगिस्तान भी कहा जाता है. गर्मी के मौसम में लोग बर्फीले लद्दाख की ठंडक का नजारा देखने आते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं कुछ लोग सर्दियों में भी यहां बर्फ में मस्ती करने पहुंचते हैं. लद्दाख आने वाले पर्यटकों की भीड़ पिछले कुछ समय से सारे रिकार्ड तोड़ने में लगी है. देश के सभी राज्यों व विदेशों से भी पर्यटक भारी संख्या में लद्दाख पहुंच रहे हैं. लद्दाख का मौसम अक्टूबर-नवंबर में काफी अच्छा बना हुआ है.

17वीं शताब्दी में बना 9 मंजिला लेह पैलेस

लद्दाख का मुख्य शहर लेह है. यहां 17वीं शताब्दी में बना 9 मंजिला पैलेस जिसे लेह पैलेस कहते हैं, देखने लायक है. 1825 में बना स्टॉक पैलेस दरअसल म्यूजियम है, जिसमें बेशकीमती गहने, पारम्परिक कपड़े और आभूषण रखे हैं. इन्हें देखकर लेह के प्राचीन समय के बारे में जाना जा सकता है. यहां शक्यमुनि बुद्ध की भव्य प्रतिमा दर्शनीय है, जिसे सोने से बनाया गया है, इस पर तांबे की परत भी चढ़ाई गई है. नैमग्याल सेना गोम्पा में तीन मंजिला ऊंची बुद्ध की प्रतिमा मौजूद है. इसके अलावा यहां प्राचीन हस्तलिपि और भित्तिचित्र भी देखे जा सकते हैं.

धनुषबाजी और पोलो लद्दाख के पारम्परिक खेल
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दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील पैंगांग झील भी लद्दाख में ही है. खेलप्रेमियों के लिए भी लद्दाख एक बेहतरीन जगह है. दिसंबर से फरवरी तक यहां आईस हॉकी का मजा लिया जा सकता है. यहां क्रिकेट भी खेली जाती है. धनुषबाजी और पोलो लद्दाख के पारम्परिक खेल हैं. 17वीं शताब्दी में पोलो की शुरुआत हुई थी. लद्दाख जाने का बेहतरीन समय है मई से अक्टूबर. इस समय यहां का मौसम सबसे बेहतरीन होता है. दिसंबर से फरवरी तक यहां कड़ाके की सर्दी पड़ती है. लद्दाख का नीला पानी और घने बादल पर्यटकों पर जादू कर देते हैं. यहां सूरज जितना चमकदार होता है, हवाएं उतनी ही ठंडी.

लद्दाख को छोटा तिब्बत भी कहा जाता है

यह छोटा सा क्षेत्र अपने आप में इतनी खूबसूरती समेटे हुए है कि यहां आकर आप बिना पलकें झपकाएं यहां के प्राकृतिक दृश्यों को निहारते रह जाएंगे. लद्दाख भारत का ऐसा क्षेत्र है जो आधुनिक वातावरण से बिल्कुल अलग है. वास्तविकता से जुड़ी हुई लेकिन पुरानी परम्पराओं को समेटे हुए. यहां के जीवन पर अध्यात्म का गहरा असर है. महान बुद्ध की परम्परा को लद्दाख के लोगों ने आज भी सहेज रखा है. इसी कारण लद्दाख को छोटा तिब्बत भी कहा जाता है. छोटा तिब्बत कहने का एकमात्र कारण यह है कि यहां तिब्बती संस्कृति का प्रभाव दिखाई देता है.

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विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु भी दिखाई देते हैं

लद्दाख विश्व का सबसे ऊंचाई पर बसा निवास स्थल है. यह अपने आप में इतना अद्भुत है कि हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करता है. पहाड़ों के बीच बने यहां के गांव, आकाश छूती स्तूपें और खड़ी व पथरीली चट्टानों पर बने मठ देखने में ऐसे लगते हैं जैसे हवा में झूल रहे हों. इन मठों के अंदर बेशकीमती पुरातत्व और प्राचीन कलाएं दर्शनीय है. लद्दाख में विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु भी दिखाई देते हैं. विभिन्न प्रकार के पक्षियों और जंगली जानवर की भी अलग-अलग और दुर्लभ प्रजातियां यहां देखने को मिल सकती हैं.

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First published: October 31, 2019, 11:23 AM IST
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